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ड्राई आई सिंड्रोम क्या है?

ड्राई आई सिंड्रोम क्या है?
ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग



आंखों में आंसू बनने कम हो जाने को ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं। 

बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण व कम्प्यूटर हैं इसके बड़े कारण। 

आंखों में जलन होना, चुभन महसूस होना, सूखापन हैं इसके लक्षण। 

लगातार टीवी देखने या कम्प्यूटर पर काम करने से बचना चाहिए।


आंखे अनमोल हैं, लेकिन बदलती जीवनशैली और बढ़ते प्रदूषण के चलते आजकल ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। इसकी एक बड़ी वजह लगातार कंप्यूटर पर काम करते रहना भी है। ऐसे में या तो आंखों में आंसू बनने कम हो जाते हैं या फिर उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती है। तो चलिये विस्तार से जाने कि ड्राई आई सिंड्रोम क्या है और इसके कारण व बचाव क्या होते हैं। 


दफ्तर में कम्प्यूटर के सामने लगातार घंटों बैठकर काम करना आंखों को कतई रास नहीं आता। इससे उनकी सेहत को काफी नुकसान पहुंचता है। इसलिए दफ्तर में आंखों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। 





क्या है ड्राई आई सिंड्रोम
आजकल कंप्यूटर पर काम करने का ज़माना है, जिसके चलते ड्राई आई सिंड्रोम की समस्याएं भी बढ़ती जा रही है। ड्राई आई सिंड्रोम में या तो आंखों में आंसू बनना कम हो जाता है या फिर उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती। दरअसल आंसू, आंख के कार्निया व कन्जंक्टाइवा को नम व गीला रखकर उसे सूखने से बचाते हैं। वहीं हमारी आंखों में एक टीयर फिल्म होती है। इसकी सबसे बाहरी परत को लिपिड या ऑयली लेयर कहा जाता है। यही लिपिड लेयर आंसू के ज्यादा बहने, गर्मी एवं हवा में आंसू के सूखने या उड़ने को कम करती है। लिपिड या फिर यह ऑयली लेयर ही आंखों की पलकों को चिकनाई प्रदान करती है, जिससे पलकों को झपकाने में आसानी रहती है। लेकिन बहुत देर तक कंप्यूटर पर काम करने या बहुत ज्यादा टीवी देखने या फिर लगातार एयरकंडीशन में रहने से आंखों की टीयर फिल्म प्रभावित होती है और आंखें सूखने लगती हैं। इसे ही ड्राई आई सिंड्रोम कहा जाता है।

वहीं दूसरी ओर लोग भीषण ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए मोटे-मोटे गर्म कपड़ों का सहारा तो ले लेते हैं, लेकिन आंखों की सुरक्षा के प्रति उनका ध्यान नहीं जाता। ठंड में आंखें हमेशा बिना ढकी रहती हैं, जिस कारण सर्दियों में आंखों में ड्राई आई सिंड्रोम का खतरा चार गुणा तक बढ़ जाता है।



ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण

चिकित्सकों के अनुसार आंखों में जलन होना, चुभन महसूस होना, सूखापन लगना, खुजली होना, भारीपन रहना, आंखों में लाली पड़ना आदि आई सिंड्रोम के मुख्य लक्षणों में से होते हैं। ड्राई आई सिन्ड्रोम से पीड़ित व्यक्ति अपनी पलकों को बार-बार व जोर से झपकाते हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम से बचाव

चिकित्सकों से अनुसार आंखों में कोई समस्या हो या न हो लेकिन फिर भी समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहना चाहिए। साथ ही लगातार टीवी देखने या कम्प्यूटर पर काम करने से भी बचना चाहिए। इससे आंखों पर काफी दबाव पड़ता है और आंखें कमजोर होती हैं। इसके अलावा काम के बीच-बीच में पलकों को भी झपकाते रहना चाहिए। पलकों को झपकाने से आंख की पुतली के ऊपर आंसू फैलते हैं, जिससे उनमें नमी बनी रहती है और वे सूखेपन से बच जाती हैं।


साथ ही अगर घर से बाहर निकलते समय अच्छी क्वॉलिटी का चश्मा पहनकर निकलें। इससे आप धूल, धूप और हवा आदि से बचे रहेंगे। साथ ही थोड़ी-थोड़ी देर पर आंखों में ताज़े पानी के छीटे भी मारते रहें। इससे आंखों को आराम मिलता है। हां, खाने में हरी साग-सब्जियां, मौसमी फल और दूध आदि को शामिल करें। इससे आंखों में होने वाली तमाम तरह की समस्याओं से छुटकारा मिलता है। साथ ही आंखों की रोशनी बढ़ती है।

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