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दिल की बीमारी भगाएं

दिल की बीमारी भगाएं
दिल की बीमारियों का बढ़ता ग्राफ हर किसी की धड़कनों को तेज कर रहा है। यह अच्छी बात है कि बीमारी को लेकर काफी हद तक जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में इस जागरूकता का पूरा फायदा नहीं मिल पाता। आज दिल की सेहत से जुड़ी कुछ बेसिक बातें, उनसे संबंधित भ्रम और बाकी जानकारी दे रहे है।


खुद जानें दिल का हाल
अगर आप रोजाना 3 से 4 किलोमीटर तेज कदमों से चल सकते हैं और ऐसा करते हुए आपकी सांस नहीं उखड़ती या सीने में दर्द नहीं होता तो मान सकते हैं कि व्यावहारिक कामों के लिए आपका दिल पूरी तरह स्वस्थ है। यह फ़ॉर्म्युला उन लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता जिन्हें डायबीटीज जैसी समस्या है, क्योंकि उन्हें साइलेंट इस्कीमिया भी हो सकता है।
अगर किसी को दिल की बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं तो मानकर चलें कि 70 पसेंर्ट समस्या हो चुकी है। इस स्थिति से बचने के लिए अपना रिस्क प्रोफाइल जानना और उसके आधार पर कुछ सामान्य टेस्ट कराते रहना जरूरी है।
इसे आप 2 उदाहरणों से समझ सकते हैं:
18 साल का सोहम रेग्युलर एक्सरसाइज करता है। पढ़ाई से लेकर खेलकूद के जरिये पूरे दिन ऐक्टिव रहता है। दिल की बीमारी या इसके लिए जिम्मेदार हाई ब्लड प्रेशर, हाई कॉलेस्ट्रॉल, डायबीटीज जैसी किसी समस्या का पारिवारिक इतिहास नहीं है। उसकी खानपान की आदत ठीक है। उसे दिल की बीमारी होने का चांस कम है। ऐसे में सोहम को कोई टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।
55 साल के राम सिंह धूम्रपान करते हैं, उन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है। वह कभी-कभार ही एक्सरसाइज कर पाते हैं और दिल की बीमारी का उनका पारिवारिक इतिहास भी है। ऐसे में राम सिंह को दिल की बीमारी होने का खतरा काफी ज्यादा है। उन्हें रेग्युलर अपने टेस्ट कराने चाहिए।

टेस्ट: कौन-से और कब कराएं
1. कॉलेस्ट्रॉल
अगर रिस्क फैक्टर (फैमिली हिस्ट्री, स्मोकिंग, मोटापा आदि) नहीं है तो 30 साल की उम्र के बाद कॉलेस्ट्रॉल टेस्ट कराएं। अगर सब कुछ नॉर्मल निकलता है तो भी हर तीन साल में एक बार टेस्ट कराएं। 40 साल के बाद हर साल टेस्ट कराएं। अगर रिस्क फैक्टर है तो 25 साल की उम्र के बाद ही हर साल टेस्ट कराएं। कॉलेस्ट्रॉल बढ़ने के लक्षण या बीमारी होने पर हर छह महीने या जब डॉक्टर कहें, टेस्ट करवाना चाहिए। कॉलेस्ट्रॉल के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराएं। इसमें एचडीएल, एलडीएल और ट्राइग्लाइसराइड और इनकी रेश्यो की जांच होती है। पहले रेस्टिंग ईसीजी कराएं। अगर उसमें सब ठीक है तो टेडमिल टेस्ट (टीएमटी) कराएं। अगर कुछ गड़बड़ी निकलती है तो इको अल्ट्रासाउंड या एंजियोग्राफी करवानी चाहिए। एंजियोग्राफी टेस्ट से धमनियों की स्थिति और ब्लॉकेज का पता चल जाता है। सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी टेस्ट स्कैन दो मिनट का होता है। इस पर 6-7 हजार रुपये तक खर्च आता है।
नोट: लिपिड प्रोफाइल के अलावा बाकी सभी टेस्ट डॉक्टर की सलाह पर ही कराएं।
2. ब्लड प्रेशर
रिस्क फैक्टर वाले लोग बीपी की जांच 25 साल की उम्र से शुरू कराएं। सामान्य लोग 35 साल की उम्र से यह टेस्ट कराएं। अगर कुछ गड़बड़ी नजर आती है तो हर दो हफ्ते में बीपी की जांच कराएं। सामान्य होने के बाद एक-दो महीने में जांच करा लें। बीपी की जांच के लिए ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट, टीएमटी, इको काडर्याग्रफी आदि टेस्ट कराए जाते हैं। जहां रिस्क फैक्टर ज्यादा होते हैं, वहां कोरोनरी स्क्रीनिंग टेस्ट कराया जाता है। अगर बीपी 120 (ऊपर वाला) और 80 (नीचे वाला) रहता है तो ठीक है। बुजुर्गों में 110-70 नॉर्मल माना जाता है। 120-140 से 81-89 तक बीपी प्रीहाइपरटेंशन कहलाता है। यह हर पांचवें आदमी को होती है। इसके लिए डॉक्टर शुरू में नॉन मेडिकल तरीके आजमाने को कहते हैं जैसे कि वजन कम करना, लंबी वॉक करना, नमक कम खाना, एक्सरसाइज करना आदि। हाई बीपी के साथ कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा हो तो हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इन मरीजों को शुगर होने की आशंका काफी ज्यादा होती है क्योंकि अक्सर लोगों को ये बीमारी लाइफस्टाइल गड़बड़ होने से होती हैं। आराम की हालत में नीचे वाला बीपी बार-बार 90 से ऊपर रहे तो नुकसानदायक है। हालांकि अगर लक्षण सही हैं तो नीचे वाला 50 तक भी ठीक है। बीपी का बहुत कम होना भी सही नहीं है। अगर ऊपर वाला 80 तक और नीचे वाला 40-45 तक पहुंच जाए तो खतरनाक होता है। ऐसे में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। जिन्हें बीपी की समस्या है, उनका बीपी अगर 10 पॉइंट ज्यादा हो तो भी नॉर्मल माना जाता है। एक्सरसाइज के दौरान बीपी बढ़ता है। इससे घबराना नहीं चाहिए।
3. शुगर
अगर रिस्क फैक्टर नहीं हैं और सेहत ठीक है तो 30 साल की उम्र में साल में पहली बार ब्लड शुगर टेस्ट करा लें। सब कुछ सामान्य आता है तो आगे तीन साल में एक बार करा सकते हैं। 40 साल के बाद हर साल टेस्ट कराना चाहिए। खाली पेट यानी फास्टिंग शुगर 100 तक और खाना खाने के बाद यानी पीपी 140 तक होना चाहिए। शुगर लेवल थोड़ा भी ज्यादा आता है या फैमिली हिस्ट्री है तो ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट जरूर कराएं। प्री डायबेटिक (फास्टिंग : 101-140 और पीपी 141-180 तक) और फैमिली हिस्ट्री वाले हर तीन महीने में जांच कराएं। जो लोग इंसुलिन का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें रोज या हफ्ते में कम-से-कम तीन बार खून की जांच करानी चाहिए। जो लोग डायबीटीज को कंट्रोल में रखने के लिए गोलियां खाते हैं, उन्हें हफ्ते में एक बार शुगर की जांच जरूर करानी चाहिए। शुगर टेस्ट खाली पेट और खाने के बाद दोनों कराना चाहिए। जिन्हें शुगर नहीं है, वे रैंडम भी करा सकते हैं लेकिन सबसे बेहतर है ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन टेस्ट, जो पिछले 3 महीनों के शुगर लेवल की जानकारी देता है। इसे एवरेज शुगर टेस्ट भी कहा जाता है और काफी भरोसेमंद टेस्ट माना जाता है।


दिल के करीबी 4 यार
1. खानपान
चाहे दिल की बीमारी हो या न हो, हर किसी को संतुलित आहार लेना चाहिए। संतुलित आहार का मतलब है, जिसमें काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन आदि की पर्याप्त मात्रा हो। वनस्पति घी या देसी घी से खाना बनाने से बचें। टोंड मिल्क का इस्तेमाल करें। बादाम और अखरोट जैसी मेवाएं, गुड कॉलेस्ट्रॉल के सबसे अच्छे स्त्रोत हैं। तेलों का सही बैलेंस जरूरी है। एक दिन में कुल तीन चम्मच तेल काफी है। तेल बदल-बदल कर और कॉम्बिनेशन में खाएं। आॅलिव आॅयल या सरसों का तेल ज्यादा यूज करें। इससे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है, लेकिन इसे ज्यादा गरम न करें। फैट दो तरह का होता है। एक हैवी फैट, जो किसी भी तापमान पर जम जाता है जैसे घी, मक्खन, मलाई, चॉकलेट, मटन आदि। दूसरा होता है लिक्विड फैट, जो जमता नहीं है और जिसकी थोड़ी मात्रा शरीर के लिए जरूरी होती है। इसमें सरसों का तेल या कैनोला आॅयल आदि शामिल हैं। कैनोला सरसों की प्रजाति का होता है, लेकिन इसमें सरसों के तेल की तरह कड़वेपन वाली महक नहीं होती। एक्सर्पट्स के मुताबिक कैनोला आॅयल और आॅलिव आॅयल सेहत के लिए बेस्ट होते हैं। ऐसी चीजें खाएं, जिनमें फाइबर खूब हो, जैसे गेहूं, ज्वार, बाजरा, जई, ईसबगोल आदि। दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स और दालों के फाइबर से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। आटे में चोकर मिलाकर इस्तेमाल करें। गेहूं, बाजरा आदि अनाजों की मिक्स रोटी खाएं। हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी के बीज आदि खाएं। इनमें फॉलिक एसिड होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल लेवल घटाता है। सरसों तेल, बीन्स, बादाम, अखरोट, फिश लीवर आॅयल, सामन मछली, फ्लैक्स सीड्स (अलसी के बीज) खाने चाहिए। इनमें काफी ओमेगा-थ्री होता है, जो दिल के लिए अच्छा है। मेथी, लहसुन, प्याज, हल्दी, सोयाबीन आदि खाएं। इनसे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए रोजाना पांच-छह बादाम खाएं। अखरोट व पिस्ता भी फायदेमंद हैं। स्किफ्ड, फैट फ्री दूध या सोया मिल्क लें। अंडे का सफेद हिस्सा खाएं। पीला निकाल लें। कॉलेस्ट्रॉल लिवर के डिस्आॅर्डर से बढ़ता है। लिवर साफ करने के लिए एलोवेरा जूस, आंवला जूस और वेजिटेबल जूस लें। इन्हें बराबर मात्रा में मिलाकर रोज एक गिलास और कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा हो तो दो गिलास भी पी सकते हैं।
परहेज करें

- कॉलेस्ट्रॉल सिर्फ अंडे के पीले हिस्से, रेड मीट और दूध (मलाई) में ही पाया जाता है। इनसे बचें।
- एलडीएल या बैड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ा है तो चीनी, चावल और मैदा न खाएं।
- सैचुरेडेटिड फैट (देसी घी, वनस्पति, मक्खन, नारियल तेल, मियोनिज) न लें।
- तला-भुना खाना न खाएं। भाप में पकाकर खाना खाएं। बिस्कुट, मट्ठी आदि में काफी ट्रांसफैट होता है, जो सीधा लिवर पर असर करता है। उससे बचें।
- प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम, खोए की मिठाई, भुजिया आदि से परहेज करें।
- फुल क्रीम दूध और उससे बना पनीर या खोया नहीं खाएं।
- नारियल और नारियल के दूध से परहेज करें। इसमें तेल होता है।
- उड़द दाल, नमक और चावल ज्यादा न खाएं। कॉफी भी ज्यादा न पीएं।


. एक्सरसाइज
अगर सेहतमंद हैं तो...
दिल की बीमारी से बचने के लिए रोजाना कम-से-कम आधा घंटा काडिर्यो एक्सरसाइज करना जरूरी है। इससे वजन कम होता है, डायबीटीज का खतरा कम होता है, फुतीर् बढ़ती है, बीपी कम हो जाता है और दिल की बीमारी की आशंका 25 फीसदी कम हो जाती है। काडिर्यो एक्सरसाइज में तेज वॉक, जॉगिंग, साइकलिंग, स्विमिंग, एरोबिक्स, डांस आदि शामिल हैं। अगर तरीके से करें तो ब्रिस्क यानी तेज वॉक जॉगिंग यानी हल्की दौड़ से भी बेहतर साबित होती है, क्योंकि जॉगिंग में जल्दी थक जाते हैं और घुटनों की समस्या होने का खतरा होता है। वॉक और ब्रिस्क वॉक में फर्क यह है कि वॉक में हम 1 मिनट में आम तौर पर 40-50 कदम चलते हैं जबकि ब्रिस्क वॉक में 1 मिनट में लगभग 80 कदम चलते हैं। जॉगिंग में 160 कदम चलते हैं। एक्सरसाइज शुरू करने से पहले 5 मिनट वॉर्म-अप यानी हाथ-पांव हिलाएं, हल्की जंपिंग आदि करें और खत्म करने के बाद 5 मिनट कूल डाउन यानी आराम से बैठ कर लंबी सांसें लें और छोड़ें।
नोट: एक्सराइज किसी भी वक्त कर सकते हैं लेकिन पूरा खाना खाने के दो घंटे बाद तक न करें। खाना खाने के बाद वॉक पर निकलने का भी दिल को कोई फायदा नहीं है। इसके लिए खाली पेट तेज वॉक करना जरूरी है। अगर एक बार में पूरा वक्त नहीं मिलता तो एक्सरसाइज या वॉक दिन में दो बार में 15-15 मिनट के लिए भी कर सकते हैं।

योगासन

- रोजाना कम-से-कम 10 बार सूर्य नमस्कार करें।
- सिर से पैर तक की मूवमेंट के अलावा पादहस्तासन, त्रिकोणासन, शशांकासन, वक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, मेरुदंडासन और उत्तानपादासन करें। ये दिल के लिए अच्छे हैं।


अगर दिल के मरीज हैं तो...
- डॉक्टर की सलाह से ही एक्सरसाइज करें। डॉक्टर यह जांच करता है कि कोई मरीज कितना स्ट्रेस बर्दाश्त कर सकता है। उसी हिसाब से एक्सरसाइज चार्ट बनाया जाता है।
- रोजाना वॉक जरूर करें। लेकिन रफ्तार इतनी ही रखें, जिसमें आराम महसूस करते हों और सांस ज्यादा न फूले।
- सुबह-शाम खाली पेट सैर करें। बीमारों को खाने के दो घंटे बाद सैर करनी चाहिए।
- एक्सरसाइज के बाद 15-20 मिनट आराम जरूर करें।
- वेटलिफ्टिंग ज्यादा न करें




3. लाइफस्टाइल
- तंबाकू का सेवन किसी रूप में न करें। स्मोकिंग छोड़ने से दिल की बीमारी का खतरा 30-50 फीसदी तक कम हो जाता है। स्मोकिंग से दिल की आटर्रीज में दरारें पड़ जाती हैं, जो कभी भी ब्लॉकेज की वजह बन सकती हैं।
- फास्ट फूड मसलन, मैगी, नूडल्स, बर्गर, पित्जा, पास्ता, कोला, समोसा, टिक्की आदि जंक फूड से बचें।
- पैदल चलें और कसरत करें।
- हर वक्त दबाव व तनाव में रहने से बचें।
- लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
- गाड़ी को आॅफिस से एकाध किलोमीटर दूर पार्क करें और उस फासले को पैदल पूरा करें।
- जितना हो सके, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करें क्योंकि उसमें पैदल चलना पड़ता है।
- सीट पर बैठकर कैंटीन या किसी सहयोगी को फोन कर बुलाने की बजाय चलकर वहां तक जाएं।


4. तनाव को बाय

- रोजाना आधा घंटा योगासन करें। इसमें आसन, ध्यान, गहरी सांस और अनुलोम-विलोम को शामिल करें।
- सुबह-शाम मेडिटेशन करें। दोनों वक्त मुमकिन नहीं है तो किसी एक वक्त ध्यान जरूर लगाएं। इसके लिए शांत जगह पर बैठकर मंत्रोच्चारण करें या आंखें बंद करके आती-जाती सांसों पर ध्यान दें। इससे शरीर में आॅक्सिजन की मात्रा बढ़ती है।
- डीप ब्रिदिंग यानी गहरे सांस लेना-छोड़ना और अनुलोम-विलोम करें। इनसे रिस्क फैक्टर कम होते हैं।
- शवासन में लेटकर कायोत्सर्ग नामक ध्यान करें। इसमें आंखें बंद करके पूरे शरीर के अंगों को महसूस करें। शवासन से मांसपेशियों का तनाव कम होता है।
- अगर दिल के मरीज हैं तो ऊपर लिखी गई सभी क्रियाओं को कर सकते हैं। बस सांस बहुत देर तक न रोकें।




कुछ और तरीके

तनाव कम करने के कई तरीके हो सकते हैं, जिन्हें सेहतमंद और बीमार, सभी आजमा सकते हैं :
- किसी हॉबी के लिए वक्त निकालें, जैसे कि पेंटिंग, फोटॉग्रफी, गाना सुनना, खेलना, किताबें पढ़ना आदि।
- बच्चों और पालतू जानवरों के साथ खेलें।
- जब भी मुमकिन हो, घूमने जाएं। नई-नई जगहें मन को रिलैक्स करती हैं।
- कॉम्पिटिशन की अंधी दौड़ से बचने कोशिश करें। जो हो रहा है, उसे स्वीकार करें।
- अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें। ध्यान से भावनाओं का नेगेटिव असर कम होकर पॉजिटिव असर बढ़ जाता है।
- परफेक्शनिस्ट होने की कोशिश न करें। यह तनाव पैदा करता है।
- अपने काम को थोड़ा-थोड़ा करें। एक साथ बहुत सारा काम सिर पर न लें।



10 गलतियां जो दिल पर पड़ती हैं भारी
1. ब्रेकफ़स्ट छोड़ना
ज्यादातर लोग मोटापे के डर से ब्रेकफ़स्ट नहीं करते। सच यह है कि ब्रेकफ़स्ट करने वाले, न करने वालों की तुलना में पतले होते हैं। नाश्ते में किसी भी रूप में प्रोटीन, दही और बेरी, ग्रिल की हुई मछली, एक आॅमलेट या सूखे मेवा खाने वाले लोग ज्यादा पतले होते हैं।
2. वीकेंड पर ट्रीट
माना जाता है कि पूरे हफ्ते हेल्दी खाना खाने के बाद वीकेंड पर खुद को ट्रीट देनी चाहिए। इससे आपका मोटापा बढ़ सकता है। वीकेंड पर खुद को ट्रीट देने के लिए सप्ताह के बाकी दिन अतिरिक्त एक्सरसाइज करें। वीकेंड पर एक साथ फैटी चीजों की बजाय एक चीज लें।
3. अरे ये तो हेल्दी है!
लोग यह कहते हुए ज्यादा खा लेते है कि अरे ये तो हेल्दी है। यह सोच आपके फिटनेस रिजीम को फेल कर सकती है। मसलन पिस्ता या मूंगफली हेल्दी हैं, लेकिन इनमें कैलरी ज्यादा होती है। ऐसे में जिन्हें ओवरईटिंग की आदत है, उन्हें ये पतला नहीं होने देंगी।
4. टीवी के सामने खाना
ज्यादातर लोग टीवी के सामने बैठकर खाते हैं। यह अच्छी आदत नहीं है, क्योंकि इससे ध्यान बंटता है और व्यक्ति को यह क्लू नहीं मिल पाता है कि कब उसके खाने का कोटा पूरा हो गया। ऐसी आदत है तो अपने पास उतनी ही चीज रखें जितनी आपको खानी चाहिए।
5. डिनर हो सबसे खास
भारतीय घरों में डिनर सबसे बड़ा मील होता है। करना यह चाहिए कि दोपहर में हल्का-फुल्का खाना लें और रात में सोने से दो घंटे पहले लो कैलरी वाली डाइट जैसे सब्जियां, फ्रूट सलाद, जूस या दूध लें।
6. डिनर के बाद फौरन सोना
सोने से ठीक पहले खाना सेहत के लिए खतरनाक है। ऐसा करने वालों के शरीर में कैलरी बर्न नहीं हो पाती, जिसे बॉडी लॉक कहते हैं। ऐसे में मोटापा तेजी से बढ़ता है। रात में शरीर आराम में आ जाता है और कैलरी बर्न होने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
7. ईटिंग फैमिली स्टाइल
आमतौर पर लोग डाइनिंग टेबल पर बड़े सविंर्ग बाउल में खाना सर्व करते हैं और लोग अपनी जरूरत के हिसाब से उसमें से प्लेट में लेते हैं। इसके बजाय परंपरागत फैमिली स्टाइल डिनर परोसना बेहतर है, जिसमें सबकी प्लेट में नियंत्रित मात्रा में सारी चीजें परोस दी जाती हैं।
8. टेबल पर नमक रखना
मोटापा बढ़ाने में नमक की भी भूमिका होती है। टेबल पर नमक रखने की आदत आपके डाइट रिजीम को प्रभावित कर सकती है। नमक हाई ब्लड प्रेशर और खाने के स्वाद की वजह बनता है। इससे बचने के लिए नमक को खाने की टेबल से दूर रखें।
9. तेल का दोबारा इस्तेमाल
भारतीय घरों में तेल के दोबारा इस्तेमाल की आदत बेहद आम है। यह आदत सेहत के लिए खराब है। कितना भी अच्छा तेल क्यों न हो, एक बार इस्तेमाल के बाद वह खाने योग्य नहीं बचता। उसे इस्तेमाल न करें।
10. खाने के बाद टहलना
आम भारतीय घरों में खाना खाने के बाद ईवनिंग वॉक पर जाने की आदत आम है। डॉक्टरों के मुताबिक, कोई भी एक्सरसाइज, वॉकिंग, जॉगिंग खाने से पहले करना ही बेहतर है। खाने के चार घंटे बाद तक ऐसा नहीं करना चाहिए।
एक्सर्पट्स पैनल

डॉ. समीर श्रीवास्तव, डायरेक्टर (काडिर्यॉलजी), फोटिर्स एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टिट्यूट

डॉ. आर. एन. कालरा, सीनियर काडिर्योलॉजिस्ट, कालरा हॉस्पिटल
डॉ. एल. के झा, इंदप्रस्थ अपोलो हॉस्टिल
डॉ. ऋषि गुप्ता, एशियन इंस्टिट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज
खुद संभालें सेहत
अगर वजन नॉर्मल है, कमर का घेरा महिलाओं में 32 इंच और पुरुषों में 36 इंच या इससे कम है, बीएमआई 23 तक हो, सिगरेट और अल्कोहल नहीं लेते हों, खानपान ठीक हो, तनाव कम से कम हो और रेग्युलर एक्सरसाइज करते हों तो आपको दिल की बीमारी होने का खतरा काफी कम हो जाता है।
अचानक दर्द उठे तो...
अगर छाती में अचानक दर्द हो, पसीना आए और घबराहट हो तो हार्ट अटैक का दर्द हो सकता है। हालांकि कई बार गैस दर्द में भी यही लक्षण होते हैं। सबसे पहले मरीज के कपड़े ढीले कर दें। उसे ज्यादा चलाएं-फिराएं नहीं। खुद धीरज न खोएं। अगर पहले से दिल के मरीज हैं तो एक गोली सॉरबिट्रेट (5 मिग्रा.) की दें। एस्पिरिन (ब्रैंड नेम डिस्प्रन आदि) भी ले सकते हैं। 300 मिग्रा एस्पिरिन की गोली चबा लेने से जान जाने का जोखिम नहीं रहता। अगर नहीं जानते कि दिल का दर्द है या कुछ और, तो भी ये गोली दे सकते हैं। अल्सर है तो एस्पिरिन न दें, फौरन डॉक्टर के पास जाएं।
दिल की बीमारी और गैस
सीने में दर्द होने पर अक्सर यह कन्फ़्यूज़न रहता है कि इसके पीछे गैस जिम्मेदार है या कोई दिल की बीमारी हो गई है। एक्सर्पट्स का कहना है कि इस तरह के कन्फ़्यूज़न में कई बार लोगों की जान भी चली जाती है। ऐसे में अगर किसी को पता है कि उसे हार्ट की बीमारी है तो वह एस्पिरिन की गोली अपने पास रखे। सीने में दर्द होने पर जुबान के नीचे एस्पिरिन की गोली रखें, लेकिन जिन्हें नहीं पता है, वे इसे अपनी मर्जी से बिल्कुल न लें क्योंकि इससे उनका ब्लड प्रेशर तेजी से गिर जाता है। सीने में दर्द के मामले में कुछ लक्षणों पर गौर करें, मसलन अगर एग्जर्शन की वजह से दर्द हो रहा है तो इसके दिल से संबंधित होने के चांस ज्यादा हैं। आराम करते समय होने वाला सीने का दर्द जो कुछ सेकंड में गायब हो जाता है, वह एसिडिक हो सकता है, लेकिन यह ध्यान रखें कि आराम के समय होने वाला सीने का दर्द भी अगर जबड़े और बायीं बांह तक पहुंच रहा है तो यह हार्ट से संबंधित है। लक्षणों को लेकर जरा सा भी कन्फ़्यूज़न हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें और ईसीजी टेस्ट कराकर सही वजह का पता लगाएं।
सेक्सुअल लाइफ पर असर
दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों के दिमाग में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या अब वह पहले की तरह अपने जीवनसाथी के साथ अंतरंग संबंध बना सकेंगे। एक्सर्पट्स का मानना है कि सावधानी न बरतने पर ऐसा करना जानलेवा भी हो सकता है। इसके कई उदाहरण सामने आए हैं। अगर व्यक्ति को पहले से दिल की बीमारी है और उसका इलाज नहीं हुआ है, तो बेहतर है कि वह संबंध बनाने से बचे।
अगर बीमारी का इलाज हो चुका है तो वह सामान्य जिंदगी जी सकता है, लेकिन इससे पहले यह जरूर देख लें कि आप ऐसा करने के लिए फिट हैं या नहीं। इसके लिए एक ट्रेडमिल टेस्ट होता है। अगर कोई 5 मिनट से अधिक समय ट्रेडमिल टेस्ट बिना सांस उखड़े या बिना दर्द के कर सकता है तो वह फिट है। मगर ऐसे लोगों को वायग्रा जैसी दवाएं नहीं लेनी चाहिए, खासतौर से तब जब वे नाइट्रेट की कैटिगरी की कोई दवा ले रहे हों क्योंकि सिल्डेनालिल कैटिगरी की दवा लेने से दिल के कई मरीजों की सेक्स करते वक्त अचानक हुए हार्ट अटैक से मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इस बारे में अपने डॉक्टर की सलाह लें।
हार्ट अटैक आने या हार्ट संबंधी बीमारी के इलाज के बाद पहले दो हफ्ते तक सेक्स करने से परहेज बताया जाता है। इसके बाद ट्रेडमिल टेस्ट पास करने वाले को सामान्य ऐक्टिविटी की इजाजत दी जाती है। इसके बाद भी सेक्स के दौरान अगर सीने में दर्द या प्रेशर महसूस हो, थकान, बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, पल्स तेज होने या सिर चकराने जैसे लक्षण दिखें तो समझ जाएं कि आपके दिल को कठिनाई हो रही है। अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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