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सम्पूर्ण योगासन –

सम्पूर्ण योगासन – SAMPURN YOGASAN

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आज हम अपने स्वास्थ के लिए सबसे ज्यादा परेशान और चिंतित होते हैं | आज के समय में हमारा जीवन पहले की अपेक्षा काफी बदल गया हैं | आज वातावरण, परिवेश व परिस्थितियां बदल गयी हैं | व्यायाम के द्वारा हम सम्पूर्ण स्वास्थ पा सकते हैं | रोज एक घंटे का व्यायाम या योगाभ्यास हमारे लिए अति-आवश्यक हैं | 


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इस आर्टिकल को इन्ही चुनोतियों को देखते हुए सभी वर्ग के लोगों के लिये लिखा गया हैं | इस fully packed आसन और व्यायाम के सममिश्रण को कर अपने तन-मन में आश्चर्यजनक सुधार ला सकता हैं | योग ओर व्यायाम प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिये | ये शरीर आपका हैं और इसे स्वास्थ रखना आपका ही काम हैं |

मोटे तौर पर आसन तीन तरह के होते हैं
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A. खड़े होकर करने वाले B. लेट कर करने वाले आसन C. बैठ कर करने वाले आसनों का समूह

इन आसनों और व्यायाम की शुरुआत करने के लिय सबसे पहले शरीर में लचीलापन और उर्जा का संचार होना जरुरी हैं | इसके लिय सबसे पहले शरीर की स्ट्रेचिंग वाले व्यायाम कर सकते हें जैसे Aerobics करना जरुरी हैं जो की आगे के आसनों और व्यायामों को करने के लिय शरीर को तैयार करते हैं |

1. Aerobics को लगभग 10 मिनिट करने के बाद सूर्यनमस्कार आसन करना चाहिये |




2. सूर्यनमस्कार

योगशास्त्र में सूर्यनमस्कार आसन को पूर्ण आसन माना जाता हैं | सूर्यनमस्कार को कम से कम 5 बार करना चाहिये, जिसे धीरे-धीरे बढाया जा सकता हैं | सूर्यनमस्कार से सारे शरीर का वजन घटाना आसन होता हैं |




B. लेट कर करने वाले आसन

एक ऐसा आसन या पतला मेट बिछाकर इन आसनों को करना चाहिये जिससे आपके स्पाइन को कोई चोट न पहुचें |

1. पैर घुमाना

सीधे पीठ के बल लेट जाये, पैर सीधे एवं हाथों को शरीर के दोनों और रखते हुए लेटे | बायाँ पैर को सीधा रखते हुये जमींन से उपर उठाकर 30 बार clockwise और इसी तरह 30 बार anticlockwise घुमाना हैं | इसी प्रकार फिर दाए पैर से इसको दोहराना हैं | 

20 सेकंड आराम करने के बाद दोनों पैरों को शून्य बनाकर 30 बार clockwise और इसी तरह 30 बार anticlockwise घुमाना हैं |

इस व्यायाम से Thigh का अतिरिक्त fat कम होता हैं | पावों के दर्द में भी आराम आता हैं | इस व्यायाम को करने के बाद थोड़ी थकान हो सकती हैं, इसलिय इस व्यायाम को करने के बाद थोडा आराम करन चाहिये जब तक की श्वास-प्रवास की गति सामान्य न हो जाये |

2. साईकिल चलाना

जमींन पर चित लेट कर बायाँ पैर उठाकर साईकिल चलाने के जैसे घुमाइये, 10 बार सीधा और 10 बार उल्टा पैडल घुमाने जैसा घुमाएँ, इसी प्रकार इसको दायाँ पैर से दोहराना हैं |

अब दोनों पैरों से साईकिल चलानें के अंदाज में पैरों को 10 बार सीधा और 10 बार उल्टा पैडल घुमाने जैसा घुमाएँ |

अब दोनों पैरों को एक साथ मिलाकर एक जोड़ रखकर 10 बार सीधा और 10 बार उल्टा पैडल घुमाने जैसा घुमाएँ | सावधानी-: जमींन पर पैर छूना न पायें, सिर और वाकी शरीर जमींन पर सपाट बना रहे | इसके हर स्टेप के बाद थोडा आराम करना चाहिये जब तक की आपकी श्वास-प्रवास की गति सामान्य न हो जाये साथ ही व्यायाम के दौरान क्षमता से अधिक जोर नही लगाना चाहिये |

3.पैर मोड़ना

अब इसी पिछले आसन की position में ही दायाँ पैर को घुटने से मोड़कर ठोड़ी से लगाना हैं और साथ ही दोनों हाथों की अंगुलियों को फसांकर घुटने को पकड़ना हैं इस को 10 बार करना हैं | इसको फिर बाया पैर से भी 10 दोहराना हैं | साथ ही आखिर में दोनों पैरो को घुटने से मोड़कर इसी अभ्यास को 10 बार करना हैं |


सावधानियां-: इन अभ्यास को करने से पहले गहरी श्वास लेकर जितना हो सके घुटनों को मोड़ते हुए फेफड़ो को खाली रखना हैं एवं तक घुटने को ठोड़ी से touch रखना हैं |

लाभ-: इस व्यायाम से पेट का फेट कम होता हैं, आमाशय की अच्छी मालिश हो जाती हैं, पेट की मासपेशियाँ मजबूत होती हैं कमर तथा पावों की मासपेशियाँ toned होती हैं, वायुविकार और कब्ज से राहत मिलती हैं |

4. सर्वांग आसन

यह बहुत जरुरी आसन हैं | सबसे पहले पीठ के बल लेट जाये, दोनों हाथ जमींन पर बाजू में तथा हथेलियाँ नीचे की और खुली हुई रखे | अब हाथों को कोहोनियो से मोडकर सहारा देकर पैरो को धीरे-धीरे उपर उठाये | कमर को हाथों से आधार देना जरुरी हैं | ठुड्डी आपकी छाती से स्पर्श करना चाहिये | इसे 3 से 5 मिनिट तक करना चाहिये |


सावधानियां-: हाई वी.पी., दिल की बीमारी ,चुलिल्का ग्रन्थि व यकृत की समस्या होने पर इस आसन को न करें |

लाभ-: चुलिल्का ग्रंथि को क्रियाशील बनाता हैं जिससे रक्त-परिवहन, पाचन तंत्र को लाभ होता हैं | शरीर का उचित विकास में लाभदायक हैं | सर्वांग आसन के बाद हलासन करना जरुरी हैं |

C. बैठ कर करने वाले आसनों का समूह
दोनों पैरो को लगभग 60-70°के आसपास फैलाकर बैठ जाये या जितना अधिक पैरो को फैलाकर आप सुविधा से बैठ सके | मेरुदंड सीधा रखते हुये अब दायें हाथ से बाएं पैर के अंगूठे को छूने की कोशिश करना हैं फिर बाएं हाथ से दायें पैर के अंगूठे को छूने की कोशिश करना हें | पैरो घुटनों से अभ्यास करते समय मोड़ना नही चाहिये | इसकी अपनी सुविधानुसार 30-40 cycle करना चाहिये | इससे उपर का शरीर रिलैक्स होगा |

पैरो को सामने फैलाकर बैठ जाये अब बाएं पैर को मोड़े और इस प्रकार रखे कि ऐड़ी मूलाधार को छूती रहें और पैर का तलवा दांये पैर की थाई को, अब पैरो का फैलाव को अपनी सुविधानुसार कर मेरुदंड सीधा कर बैठना हैं | अब सामने की और झुकते हुए अपने दोनों हाथों से दायें पैर के अंगूठे को पकड़ना हैं | इसी तरह इसे दुसरे पैर से करना हैं | इस आसन को कम से कम दो बार करना चाहिये | इससे कमर का फेट कम होता हें शरीर लचीला बनता हैं |






3. पश्चिमोत्तासन-: पैरो को सामने की और फैलाकर लेकिन एक दूसरे के पास-पास रखकर मेरुदंड सीधा रखकर बैठ जाये | अब धीरे-धीरे आगे झुकते हुए पैरो के अंगूठो को पकड़ने का प्रयास करे, अगर अंगूठो को पकड़ना संभव न हो तो घुटनों को ही स्पर्श करने का प्रयास कर सकते हैं | साथ ही अपने माथे को घुटनों से स्पर्श करना हें | जितनी देर इस अवस्था में रह सके रहे फिर धीरे धीरे वापस सीधे बैठ जाये | शुरूआत में इसकी 2 cycle कर सकते हैं |

सावधानी-: आगे झुकने में शरीर पर दवाव नही डालना हैं, घुटनों को किसी भी समय मोड़ना नही हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात आगे झुकते समय श्वास को बाहर छोड़ना हैं | जिनको साइटिका, जोड़ो का पुराना दर्द, पीठ का दर्द या कोई उदर रोग हो तो इस आसन को न करे |

लाभ-: इस आसन से कमर का फेट निश्चित रूप से कम होता हैं महिलायों के लिये ये आसन विशेष रूप से लाभदायक हैं |

4. तितली (Butterfly) आसन -: सीधे बैठ जाये मेरुदंड सीधा हो | अब दोनों पैरो के तलवो को आपस में मिला ले, एडियो को शरीर के जितना हो सके पास रखे, अब दोनो हाथो कि अॅगुलियो को एक दुसरे में फंसा कर पैरो के पंजो के नीचे रखना और फिर पैरो को उपर नीचे की और चलाना हैं इसे करीब 5 मिनिट करना हैं |


5. सूक्ष्म-व्यायाम- अर्धपद्मासन में बैठ जाएँ

दोनों हाथों को अपने कंधो के समान्तर सामने की और फैलाकर रखे | इस पूरे अभ्यास में हथेलियाँ खुली और अंगुलियाँ सीधी रखना हैं | अब हथेलियों को कलाई से उपर (छत की ओर) एवं नीचे (जमींन की ओर) चलाना हैं, इस पूरे अभ्यास में कुहोनियो को मोड़ना नही हैं | इसे कम से कम 20 बार करना हैं |


अब हाथों को कुहोनियो से मोडकर अंगुलियों से कंधो पर रखकर clockwise और anti-clockwise कंधो से 30 घुमाना हैं |


अब दोनों हाथों को एकदूसरे को कोहनियों से पकड़ कर सर के उपर रख कर बारी बारी से बाएं और दायें और खीचना हें साथ में ही हर पोजीशन में कम से कम दस सेकंड रुकना हें इस अभ्यास को कम से कम तीन बार करना हैं | इस अभ्यास से कंधो, हाथों और पीट का फेट कम होता हैं | 

अब थोड़ी देर रेस्ट करे ……

इसके बाद व्रज आसन में बेठ जाये

व्रज आसन में बैठकर दोनों हाथों की हथेलियों से पेट के निचले हिस्से पर दबाब डालते हुए आगे की और झुकना हें जिससे सर जमींन को छुए इस आसन को तीन बार करना चाहिये इस आसन से कब्ज और महिलाओं की समस्या दूर होती हैं |


2. सुप्त व्रजआसन

इसके बाद सुप्त व्रजआसन करना चाहिये | व्रजआसन में बैठ जाएँ | पहले दाहिनी कोहनी तथा भुजा और इसके पश्चात बायीं कोहनी और भुजा के सहारे पीछे की ओर झुके, पीठ को धनुष के समान बनाते हुए सर के उपरी भाग को जमींन पर रखना हैं , हथेलियों को घुटनों पर रखना हैं ओर घुटनों को जमींन के सम्पर्क में रखना हैं लेकिन इसके लिये शरीर पर अनावश्यक दबाब नही डालना हैं | इस स्थिति में धीमा और गहरा श्वसन करे फिर श्वास लेते हुए कोहनियों और भुजाओं के सहारे वापस व्रजासन में बैठ जायें | इस आसन को एक बार ही लेकिन 5 मिनिट से ज्यादा नही करना चाहिये | 


सावधानियां-: साइटिका, स्लिपडिस्क, लोअर-स्पाइन और घुटनों की जिनको कोई समस्या हो वो ये आसन न करें |

लाभ-: इससे कमरदर्द में आराम मिलता हैं | आमाशय के अंगो की मालिश होती हैं ओर पाचन संबधी रोगों एवं कब्ज में आराम मिलता हैं |

उपर दिये गये आसनों को करने के बाद अब प्राणायाम करने के लिय अर्ध पद्मासन में बैठ जाएँ | प्राणायाम की शुरुआत कपालभारती से करना चाहिये, इस आसन को लगभग 8-10 मिनिट तक करना चाहिये हैं | इसके बाद अनुलोम-विलोम को भी लगभग 8-10 तक करना चाहिये | अनुलोम-विलोम के बाद नाड़ी-शोधन जरूर करना चाहिये |

3. नाड़ी-शोधन

नाड़ी-शोधन के लिए दायें हाथ की उँगलियों का अपने चेहरे के सामने लाये, पहली दो उँगलियों को अपने माथे (भ्रू-मध्य) पर रखे, अगुंठे से नाक का दायें हिस्से के उपर और तीसरी ऊँगली को बाएं नाक के हिस्से पर रखे |


अब नाक का बायाँ हिस्से को तीसरी ऊँगली से बंदकर; दायें हिस्से से श्वास को 5 तक मन ही मन गिनते हुए लेना हैं फिर नाक के दोनों हिस्सों को क्रमशः अंगूठे और तीसरी ऊँगली से 10 की गिनती को मन ही गिनते हुए बंद कर श्वास को अंदर ही रोकना हैं | इसके बाद नाक का दायाँ हिस्से को खोलकर धीरे-धीरे 5 तक की गिनती को गिनते हुए श्वास को छोड़ना हैं | श्वास लेने और छोड़ने के समय को बढाया जा सकता हें लेकिन दोनों में जो दुगने का अनुपात हें उसे बना कर रखना चाहिये |

इस प्रक्रिया को अब बाएं नाक के हिस्से से दोहराना हैं | इस तरह बारी-बारी से नाक के दायें और बाएं हिस्से से इसे करना हैं | श्वास लेने और छोड़ने के समय को बढाया जा सकता हें लेकिन दोनों में जो दुगने समय का अनुपात हें उसे बना कर रखना चाहिये |

नाड़ी-शोधन को 10 से 15 तक किया जाना चाहिये | नाड़ी-शोधन से आक्सीजन की मात्रा हमारे शरीर में बढ़ जाती हैं जिससे हमारे सारे शरीर का पोषण होता हैं और हमारे रक्त का शुद्दिकरण होता हैं | नाड़ी-शोधन से शांति, विचारो में स्पर्श स्पष्टा और एकाग्रता की प्राप्ति होती हैं | यह प्राण-शक्ति को बढाता हैं और तनाव और चिंता में कमी लाता हैं और गहन ध्यान की अवस्था की प्राप्ति में सहायता करता हैं | अतः ध्यान से पहले यह बहुत जरूरी हैं |

शरीर को शिथिल करते हुए ध्यान करना करना चाहिये | आखिर में गोमुख-आसन करना चाहिये |

3. गोमुख-आसन 

बाएं पैर की एडी को दाहिने नितम्ब के पास रख कर दायाँ पैर को बायीं जांघ के उपर रखना हैं जिससे दोनों घुटने एक-दुसरे के उपर रहे | अब बायाँ हाथ को पीठ के पीछे से ले जाना हैं फिर दायाँ हाथ को कंधे पर से पीछे ला कर दोनों हाथों को बांध लीजिये पीठ सीधी रहे और आखें बंद रहना चाहिये | इस आसन से कंधो का कड़ापन दूर होता हैं, मधुमेह के रोग और साइटिका में यह उपयोगी हैं | छाती को मजबूत बनाता हैं |


आखिर में गोमुख आसन करने के बाद 10 मिनिट के लिय शवासन करना चाहिये |

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