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नाक की एलर्जी से बचना है तो यह करे

नाक की एलर्जी से बचना है तो यह करे


जिस तरह हम भोजन करने से पूर्व हाथ धोते हैं, ठीक उसी तर्ज पर नाक की सफाई की भी जरुरत होती है. जो लोग ऑफिस के बाद सड़कों पर ज्यादा देर का रास्ता तय करके अपने घर लौटते हैं, उन्हें चाहिए कि वे मुंह धोने के बाद भी नाक की भी सफाई करें ताकि जो प्रदूषण वो सड़कों से लेकर आएं हैं, वह कुछ हद तक बाहर निकल जाए. 


इसके लिए करना यह है कि व्यक्ति नाक के एक तरफ के हिस्से को दबाकर जोर से छींके या अंदर गहरी सांस लेकर बाहर जोर से छोड़े ताकि नाक के जरिए जो भी गंदगी भीतर गई है वह निकल सकें. योग में जिस तरह हम भीतर की सांस को जोर से बाहर फेंकते हैं, ठीक वही प्रक्रिया इसमें अपनानी चाहिए.


टिशू पेपर का उपयोग सिर्फ खाना खाकर हाथ पोछने के लिए नहीं होता, आप इसका उपयोग दूसरे तरीके से भी कर सकते हैं. जब भी आप अपना काम खत्म करके वापस घर लौटे तो एक टिशू पेपर लेकर उस पर नाक के ठीक पास लगाएं और फिर गहरी सांस छोड़ें. जैसे योग करते हुए करते हैं. उससे आपको खुद ही अहसास होगा कि आप कितनी गंदगी लेकर बाहर से आए हैं. 



क्या शहद खाना हो सकता है हानिकारक?





अधिक गर्म पानी, गर्म दूध, अधिक धूप में बच्चों को शहद का प्रयोग हानिकारक साबित होता है. साथ ही घी की समान मात्रा प्रयोग करने पर यह विष की भाँति कार्य करने लगता है. इसलिए इन स्थितियों में इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए. चाय, कॉफी में शहद का उपयोग नहीं करना चाहिए.


शहद का इनके साथ सेवन विष के समान काम करता है. अमरूद, गन्ना, अंगूर, खट्टे फलों के साथ शहद अमृत है. शरीर के लिये आवश्यक, लौह, गन्धक, मैगनीज, पोटेशियम आदि खनिज द्रव शहद में होते हैं. शहद के एक बड़ा चम्मच में 75 ग्राम कैलोरी शक्ति होती है. किसी कारणवश आप को शहद सूट नहीं किया तो या खाकर किसी तरह की परेशानी महसूस हो रही हो तो नींबू का सेवन करें. इसे आग पर कमी न तपायें. मांस, मछली के साथ शहद का सेवन जहर के समान है. 


शहद में पानी या दूध बराबर मात्रा में हानिकारक है. बाजरू चीनी के साथ शहद मिलाना अमृत में विष मिलाने के समान है. शहद सर्दियों में गुनगुने दूध या पानी में लेना चाहिये. एक साथ अधिक मात्रा में शहद न लें। ऐसा करना नुकसानदायक होता है. शहद दिन में दो या तीन बार एक चम्मच लें. घी, तेल, मक्खन में शहद विष के समान है. 



बार बार पेशाब आने से है परेशान तो यह करे





बार बार पेशाब आने की समस्यां से परेशान है तो नीचे दिए उपायों को जरूर अपनाए. यह उपाय से आपको फायदा अवश्य होगा और बार बार पेशाब आना भी बंद हो जाएगा. 


राई काले तिल कलमी शोरा टेसू के फ़ूल एवं दालचीनी सभी को समभाग मेंलेकर चूर्ण बना लें,रोज दो ग्राम सुबह शाम शहद के साथ खाने पर बहुमूत्र रोग से मुक्ति मिलती है.


आंवले के पांच ग्राम रस में हल्दी की चुटकी घोलिए और उसमें पांच ग्राम शहद मिलाकर पी जाइये। ऐसा करने से जरा-जरा सी देर में पेशाब का आना बंद हो जाता है. आंवले का रस का सूखा चूर्ण गुड के साथ मिलाकर लेने से पेशाब खुलकर आता है.


मूली के नियमित प्रयोग से बहुमूत्र में आराम मिलता है. 


बहुमूत्र में बबूल का गोंद घी मे भून कर मक्खन के साथ सुबह को खाने से फ़ायदा होता है.


अदरक का ताजा रस सेवन करने से रुका हुआ मूत्र जल्दी बाहर निकल जाता है,साथ ही बहुमूत्र की शिकायत भी दूर होती है.


जामुन की गुठली एवं बहेडे का छीलका दोनो बारीक पीस लें आठ दिन तक चार ग्राम रोज पानी के साथ लें,बार बार पेशाब आना बंद हो जायेगा. 



: यह सब्जी खाने से कैंसर होने के चांस कम होते है






कैंसर का नाम सुनते ही अच्छे अच्छे लोगो के पसीने छूट जाते है. यह बिमारी मरीज के साथ साथ पुरे परिवार की जिंदगी उथल पुथल कर देती है. इसलिए समझदारी इसी में है कि आप ऐसे चीजों का सेवन करना शुरू कर दे जिससे कैंसर होने का चांस ना के बराबर हो जाए. 


बंदगोभी में ऐसे तत्व होते है जो कैंसर की रोकथाम करने और उसे होने से बचाने में मदद करता है. इसमें डिनडॉलीमेथेन ( डीआईएम ), सिनीग्रिन, ल्यूपेल, सल्फोरेन और इंडोल - 3 - कार्बीनॉल ( 13 सी) जैसे लाभदायक तत्व होते है. ये सभी कैंसर से बचाव करने में सहायक होते है. 


सुबह खाली पेट पत्तागोभी का कम से कम आधा कप रस रोजाना पीने से आरम्भिक अवस्था में कैंसर, बड़ी आंत का प्रवाह (बहना) ठीक हो जाता है. पत्ता गोभी, शरीर में इम्यूनिटी सिस्टम को स्ट्रांग बनाती है. इसमें विटामिन सी भरपूर मात्रा में होता है जिससे बॉडी का इम्यूनिटी सिस्टम काफी मजबूत हो जाता है. 



बंदगोभी खाने के फायदे





बंदगोभी को पत्तागोभी भी कहा जाता है. पत्ता गोभी में लैक्टिक एसिड काफी मात्रा में होती है जो मांसपेशियों के चोटिल होने और उसे रिकवर करने में काफी सहायक होती है. नींद की कमी, पथरी और मूत्र की रुकावट में पत्तागोभी लाभदायक है, इसकी सब्जी घी से छौंक लगाकर बनानी चाहिए.


सल्फर, क्लोरीन तथा आयोडीन साथ में मिल कर आँतों और आमाशय की म्यूकस परत को साफ करने में मदद करते हैं. इसके लिए कच्चे पत्तागोभी को नमक लगा कर खाना चाहिए. यह अमीनो एसिड में सबसे समृद्ध होता है जो सूजन आदि को कम करता है. 


पत्ता गोभी के सेवन से मोतियाबिंद का खतरा कम होता है। इसके लगातार सेवन से बॉडी में बीटा केराटिन बढ़ जाता है जिससे आंखे सही रहती है. इसका रस पीने से घाव ठीक होते हैं. इसके रस का आधा गिलास 5 बार पानी मिलाकर पीना चाहिए. घाव पर इसके रस की पट्टी बाँधें. 



: हरी पालक करती है कई फायदे





पालक एक पत्तियो वाली सब्जी हैं, यह अनेक गुण से भरपूर है. पालक में कई प्रकार के विटामिन होते हैं गिसमै A,B,C और प्रोटीन, सोडियम, आइरन भरपूर मात्रा मैं पाए जाते हैं. लो ब्लड प्रेशर के रोगियो को पालक की सब्ज़ी खानी चाहिए. यह खून बढ़ाने के साथ ब्लड के सर्क्युलेशन को कंट्रोल करने में मदद करता हैं. हार्ट पेशेंट को हर रोज 1 ग्लास पालक के जूस के साथ 2 चम्मच सहद मिला कर पीना चाहिए. यह बहुत गुणकारी होता हैं.


थॉयराइड में एक प्याला पालक के रस के साथ 1 चम्मच सहद और चौथाई चम्मच जीरे का चूरन मिला कर पीने से लाभ होता हैं. पालक के एक ग्लास जूस में स्वादानुसार सेंधा नमक मिला कर पीने से दमा और साँस संबंधित रोगो में लाभ मिलता हैं. पालक, ककड़ी और गाजर की समान मात्रा लेकर उसका जूस पीने से बालो का बढ़ना शुरू हो जाता हैं.


साँस और मूँह की बदबू दूर करने के लिए पालक के जूस से कुल्ला करने से दांतो की समस्या और मूँह की समस्याओं में आराम मिलता हैं और मूँह की बदबू दूर हो जाती हैं. पीलिया के दौरान रोगी को पालक के रस को कच्चे पपीते में मिला कर दिया जाए तो काफ़ी फयडा होता हैं. आदिवासी पीलिया के रोगी को च्चिलके वाली मूँग डाल में पालक डालकर तैयार की गई सब्ज़ी को खिलाते हैं. 



सेक्स के समय वजाइना ब्‍लीडिंग का सच





तमाम लोगों के मन में यह भ्रंति होती है कि पहली बार सेक्‍स करने पर लड़की की योनि से ब्‍लीडिंग यानी रक्‍तस्राव जरूर होना चाहिये. रक्‍तस्राव नहीं होने पर कई लोग तो यह समझ बैठते हैं कि लड़की पहले किसी के साथ संबंध स्‍थापित कर चुकी है या फिर उसका कौमार्य भंग हो चुका है या वो वर्जिन नहीं थी. 


सच पूछिए तो यह सब पूरी तरह गलत है. तमाम लोगों में यह भ्रांति होती है कि पहली बार संभोग करने पर योनिच्छद टूट जाता है, इसलिए रक्‍तस्राव होता है.

धार्मिक भावनाओं की बात करें तो पहली बार संभोग करने पर विवाह-देवता प्रसन्‍न होते हैं और उस स्थिति में योनि से खून निकलता है. 


सेक्‍सोलॉजिस्‍ट की मानें तो यह सब महज भ्रांतियां हैं. रक्‍त निकलना यह सिद्ध नहीं करता कि लड़की का कौमार्य पहली बार भंग हुआ है, बल्कि रक्‍त उस स्थिति में निकलता है, जब रक्‍त कोशिकाएं फट जाती हैं. ऐसा दूसरी या तीसरी बार संभोग करने पर भी संभव है. जब मांसपेशियां मजबूत हों तो रक्‍त निकलने का सवाल ही पैदा नहीं उठता. 



ब्रेस्ट इम्प्लांट के लिए क्या है सही उम्र





पामेला से लेकर केटी प्राइस तक ब्रेस्ट इम्प्लांट कराने वाली महिलाओं की कैटिगरी में शामिल हैं. इसके इफ़ेक्ट से बॉलीवुड भी अछूता नहीं रह सका. बॉलीवुड में भी कई हिरोइंस ने ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया है. दुनिया भर में 2 मिलियन (20 लाख ) से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने ब्रेस्ट इम्प्लांट कराया है. 


यह संख्या दर्शाती है कि महिलाएं अपने ब्रेस्ट को लेकर कितना सोचती हैं. हालांकि इसमें उनकी भी को गलती नहीं है. इस शोध के अनुसार 100 में से 98 मर्द महिलाओं में सब से पहले ब्रेस्ट को नोटिस करते है. उनके लिए ब्रेस्ट महिलाओं के शरीर का सब से आकर्षक अंग है. 


हालांकि यह अलग बात है कि सर्जरी से गुजरने वाली हर महिला रिजल्ट से खुश नहीं होती. ब्रेस्ट इम्प्लांट्स के लिए औसत उम्र की बात करें तो डॉक्टरों की राय है कि यह 34 साल के बाद कराना बेहतर होता है. 



ब्रेस्ट को लेकर कुछ रोचक तथ्य





महिलाओं के जिस्म में सबसे खूबसूरत ब्रेस्ट को माना जाता है और कहा जाता है कि पुरुषों को भी यह सबसे अधिक आकर्षित करता है. शायद, इसीलिए महिलाएं ब्रेस्ट को लेकर कुछ ज्यादा ही कॉन्शस रहती हैं. इसके बावजूद महिलाओं को भी इस बारे में ज्यादा पता नहीं होता. सेक्शुअल डिज़ायर की बात को एक तरफ रखें तो ब्रेस्टखूबसूरती और फेमिनिटी का सिंबल भी है. 


यह नोटिस करना थोड़ा मुश्किल है, लेकिन वास्तव में बाएं तरफ के ब्रेस्ट की साइज़ दाएं से हमेशा बड़ी होती है. दोनों ब्रेस्ट की साइज़ कभी बराबर नहीं होता. इसके साथ - साथ निपल की साइज़ और डायरेक्शन भी डिफ़रेंट होते हैं. 


ब्रेस्ट के औसत वजन की बात करें तो यह 0.5 किलोग्राम है. ब्रेस्ट पूरे शरीर के फैट का 4-5 पर्सेंट हिस्सा होता है, जबकि कुल बॉडी वेट का 1 पर्सेंट हिस्सा. जैसे - जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है ब्रेस्ट की चर्बी भी बढ़ती जाती है. यहां आपको बता दें कि स्मोकिंग करने वाली महिलाओं की ब्रेस्ट नॉन स्मोकर महिलाओं की तुलना में ज्यादा ढीले पड़ जाते हैं. 



: नहाते हुए ले यौन क्रिया का मजान


संभोग से पहले एक दूसरे के साथ स्नान करना बेहतरीन फोरप्ले माना जाता है, लेकिन यदि संभोग के बाद कपल साथ स्‍नान करें तो उन्‍हें फिर से रिचार्ज होने का अवसर मिल जाता है. संभोग की रात को लंबा, सुखदार्यी और आनंददायक बनाने के लिए संभोग के बाद का स्‍नान बेहद महत्‍वपूर्ण है. 


बाथ टब हो तो अच्‍छा है, अन्‍यथा नग्‍नावस्‍था में एक-दूसरे में खोकर शॉवर के नीचे खड़े होने से एक अजीब सुकूल का पल हासिल होता है और फिर से प्‍यार करने को जी मचल उठता है.


आप चाहे तो अपने बाथ टब में कोई खुशबूदार शैम्पू मिला सकते है और ऊपर से गुलाब की पंखुड़ियां भी डाल दे. इस तरह माहौल और भी ज्यादा रोमांटिक हो जायेगा और सेक्स का मज़ा दुगुना हो जाएगा. 

तनाव मुक्ति के लिए करे सेक्स


आज कल की भागदौड़ और जिम्मेदारियों से भरी जिंदगी में तनाव का होना आम बात है. यह तनाव ना सिर्फ हमे मानसिक तौर पर परेशान करता है बल्कि हमारे काम पर भी इसका नेगेटिव असर पड़ता है. 


इस तनाव के कारण इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है और फिर घर में भी इस चिड़चिड़ेपन के कारण लड़ाई झगड़े होने लगते है. इस तनाव से मुक्ति पाने के लिए आपको दवाई गोली खाने की जरूरत नहीं है बस रोजाना खूब सेक्स करिये. 

ये एक वैज्ञानिक तथ्य है कि सेक्स करने से स्ट्रेस यानी तनाव से मुक्ति मिलती है. इस प्रक्रिया के दौरान आपके शरीर में डोपामाइन नाम का एक पदार्थ बनता है जो स्ट्रेस हॉरमोन से लड़ता है. इसके अलावा इंडॉरफिन हॉरमोन और ऑक्सिटॉक्सिन भी शरीर में बनता है जो तनाव से शरीर को छुटकारा दिलाता है. 

: सेक्स के बाद भी लड़कियों को चाहिए प्यार


आमतौर पर पुरुष संभोग के बाद या तो सो जाते हैं, या फिर अपने पार्टनर से दूर हो जाते हैं. उसके बाद ऐसा लगता है कि अपने पार्टनर से नाराज हो गए हैं. मगर आपकी यह हरकत आपके पार्टनर के नाराजगी का कारण बन सकती है. कई बार पार्टनर का मूड खराब हो जाता है. साइको सेक्सोलाजिस्ट डॉक्‍टर बीके कश्‍यप के अनुसार महिलाएं यौन क्रिया के बाद भी आपका प्‍यार चाहती हैं. डॉक्‍टर कश्‍यप हमें कुछ तरीके बताएंगे, जिसे अपनाकर हम सकारात्‍मक फर्क महसूस करेंगे.


- सेक्‍स करने के तुरंत बाद कभी ना सोयें. इससे महिला को लगता है कि आप केवल सेक्‍स करने के लिए उसके करीब आते हैं.


- संभोग करने के बाद आप अपनी पार्टनर के साथ स्‍पून फिटिंग पोजीशन में लेट जाएं जैसे दो चम्‍मच एक दूसरे में फिट हो जाते हैं. साथ ही अपने हाथों से हल्‍के हल्‍के स्‍पर्श करते हुए प्‍यार भरी बाते करें. इससे महिला अपने आपको सुरक्षित महसूस करेगी.


- चरम सीमा तक पहुंचने के बाद भी महिलाएं अपने पार्टनर से बातें करना पसंद करती हैं. ऐसे में अगर आप मीठा सा चुंबन करेंगे, तो उन्‍हें अच्‍छा लगेगा.


- अगर आप अपने पार्टनर के मन की बात जानने चाहते हैं, तो स्‍पून फिटिंग पोजीशन में उनसे पूछें कि उन्‍हें इस समय कैसा महसूस हो रहा है. वो खुद ब खुद अपनी इच्‍छाए बया कर देंगी. उनकी इच्‍छाओं को पूरा करके आप अपने प्‍यार भरे जीवन को और अच्‍छा बना सकते हो.


- संभोग के बाद आप अपने पार्टनर से पूछें कि उन्‍हें कौन सी यौन क्रिया से सबसे ज्‍यादा आनंद आया. संभोग के दौरान उन्‍हें कौन सी चीज सबसे ज्‍यादा अच्‍छी लगती है. उन बातों को अगली बार आजमाकर आप अपनी पार्टनर के और ज्‍यादा करीब जा सकते हैं. 

ऐसे दूर करे टाइफाइड



दूषित भोजन, पेय और पानी की वजह से टाइफाइड रोग होता है. टाइफाइड बुखार के लक्षण प्रदर्शन के बाद कुछ हफ्तों दिखाई देते हैं. इस बुखार को दोहराने की प्रवृत्ति है. इस रोग से निपटने के लिए यह नुस्खे ट्रॉय करे. 


1. छाछ: धनिया के रस की -2 चम्मच को 1 कप छाछ में मिला कर पिए. यह एक दिन में 2-3 बार लिया जा सकता है.


2. केले: केले को मेश कर उसमे शहद की कुछ बुँदे मिलाये और इसे रोजाना खाये. इसे दिन में दो बार लिया जा सकता है. 


3. मधु: मधु यानि की शहद पाचन के लिए अच्छा होता है. एक गिलास गर्म पानी में शहद की कुछ बुँदे मिलकर इसका सेवन रोज करना चाहिए. 


4. लौंग: लौंग भी एक प्रभावी उपाय के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. 2 लीटर पाने में 5 लौंग डाल कर उबाले. इस मिश्रण को ठंडा कर के पिए. 


5. नारंगी: नारंगी या ऑरेंज बेचैनी से राहत दिलाने में फायदा करता है. इसे आप ऐसे ही खा जाए या फिर दूध के साथ भी ले सकते है. 



: लिंग की लंबाई नापने का सही तरीका



लिंग की सही लम्बाई को नापने को लेकर अक्सर अलग अलग लोगो की अलग अलग राय होती है. इसे नापने की सही विधि को लेकर लोगो में मतभेद चलते आये है. लेकिन हेराल्ड रीड जो रीड सेंटर फॉर एम्बुलैटरी यूरोलॉजिकल सर्जरी के डॉक्टर हैं के अनुसार लिंग की लंबाई नापने का सही तरीका निम्न है. 

सर्वप्रथम आप सीधे खड़े हो जाएं फिर लिंग को पूर्ण उत्तेजित अवस्था में ले आएं. इसके बाद लिंग को पकड़ कर तब तक नीचे झुकाएं जब तक कि वह जमीन के समानान्तर अवस्था में न आ जाए. 


इसके पश्चात लिंग जहां शरीर से शुरू होता है वहां से शिश्न मुण्ड की सीध तक स्केल से नाप लें. जो लंबाई आएगी वही लिंग की वास्तविक लंबाई है. 



सेक्स के दौरान क्यों होता है लड़कियों को दर्द


भारतीय समाज में लडकी की परवरिश ऎसे माहौल में होती है कि उसके मन में संभोग को लेकर डर बैठा होता है. पहली बार संभोग से कई तरह के मिथ जुडे हुए हैं. लोगों का ऎसा मनोविज्ञान है कि पहले संभोग के समय में लडकियों को काफी दर्द होता है. इस दौरान ब्लीडिंग को लेकर भी अनेक तरह की भ्रांतियां हमारे समाज में मौजूद हैं.


संभोग के दौरान होने वाले दर्द को मेडिकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं. यह ऎसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पड़ता है.


वास्तव में पहली बार संभोग के समय महिलाओं को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना है. ऎसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खिंच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है. ऎसी स्थिति में संभोग के समय महिला को बहुत अधिक दर्द होता है.

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