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गर्भपात से बचने के लिए जरुरी जाँचें


गर्भपात से बचने के लिए जरुरी जाँचें



हर एक गर्भवती महिला को, ठीक समय पर वह सभी जाँचें करानी चाहिए जो जरूरी होती हैं, और जिनके द्वारा उनकी गर्भावस्था की सही जानकारी मिलती रहती है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी महिला के साथ गर्भपात जैसी दुर्घटना से बचने के लिए यह जाँचें जरूरी होती हैं। गर्भावस्था के दौरान, कुछ ऐसी जाँचें हैं, जो की जाती हैं और जिनके द्वारा यह पता लगाया जाता है कि गर्भवती महिला का स्वास्थ कैसा है और कहीं उसमें गर्भपात होने की संभावनाएं तो नहीं हैं।



गर्भपात की जाँच करने के लिए डॉक्टर महिला के चिकित्सकीय इतिहास के साथ-साथ, उसकी शारीरिक जाँच और कुछ प्रयोगशाला जांच भी कर सकते हैं।


गर्भपात से पहले की जाने वाली शारीरिक जाँच, इसमें शामिल है- 
गर्भवती महिला के रक्तचाप और हृदय के धड़कनों की जाँच । 
गर्भवती महिला के हृदय और फेफड़ों की जाँच। 
गर्भवती महिला के गर्भाशय के आकार के बारे में जानने के लिए, उसके श्रोणि की जाँच। गर्भाशय के आकार से, यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि महिला ने कितने महीने का गर्भ धारण किया हुआ है। श्रोणि की जाँच के द्वारा, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब की जाँच की जाती है, ताकि यह पता चल सकें कि महिला को कही एक्टोपिक प्रेगनेंसी (इसमें भ्रूण का प्रत्यारोपण, गर्भाशय में न होकर, कही और जैसे- फैलोपियन ट्यूब में हो जाता है) तो नहीं है। 


गर्भपात से पहले की जाने वाली प्रयोगशाला जांचों में, निम्न जाँचें शामिल हैं,


जैसे:- 
रक्त में आयरन की जाँच- यदि किसी महिला के रक्त में आयरन की कमी है तो उसे एनीमिया हो सकता है, जिस कारणं डॉक्टर महिला को गर्भपात से पहले और इसके बाद आयरन की गोलियां खाने के लिए दे सकते हैं। 
यदि महिला Rh-नेगेटिव है, तो डॉक्टर उसे गर्भपात के बाद, Rh इम्म्युनोग्लोब्युलिन का टिका दे सकते हैं। 
यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) की जाँच, यह गर्भपात से पहले किया जाने वाला नियमित परीक्षण नहीं है, लेकिन डॉक्टर इसे प्रक्रिया के बाद होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए, यह जाँच करवा सकते हैं। 
पैप स्मीयर, इस जाँच से ग्रीवा में होने वाली असामान्यताओं (डिसप्लासिया), की जाँच की जाती है। यह भी जरुरी नहीं है कि हर डॉक्टर यह जाँच करें। 

इन सभी के अलावा डॉक्टर यह निश्चित करने के लिए कि प्रेग्नेंसी गर्भाशय में ही है, गर्भाशय के आकर की जाँच करने के लिए, अल्ट्रासाउंड करते हैं। अक्सर गर्भावस्था के पहले तिमाही में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

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