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स्तनपान के क्या लाभ हैं?


स्तनपान के क्या लाभ हैं?

स्तनपान आप और आपके बच्चे दोनों के लिए कई लाभ प्रदान करता है। मगर, सबसे अच्छी बात यह है कि स्तनों का दूध आपके शिशु को वह प्रदान करता है, जिसकी जरुरत उसे जिंदगी के पहले छह महीनों में बढ़ने के लिए होती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय भी शिशु के पहले छह महीने तक उसे केवल स्तनपान कराने की सलाह देता है। उसके बाद स्तनपान के साथ-साथ आप ठोस आहार देना शुरू कर सकती हैं।

लगभग छह महीने पर ठोस आहार शुरु करने के बाद भी आप शिशु को स्तनपान कराना जारी रख सकती हैं। स्तनों के दूध में मौजूद पोषक तत्व उसे लाभ पहुंचाते रहेंगे।
स्तनपान निम्नांकित तरीकों से आपके शिशु को लाभ पहुंचा रहा हैः

स्तन दूध के संघटक आदर्श रूप से आपके शिशु की आंतों के लिए अनुकूल हैं। इसलिए यह आसानी से पच जाता है। 
स्तन दूध में रोगप्रतिकारक होते हैं, जो जठरान्त्रशोथ, सर्दी-जुकाम, मूत्रमार्ग संक्रमण (यू.टी.आई) और कान के संक्रमण आदि से रक्षा करते हैं। यह कॉट डेथ (एस.आई.डी.एस) के खतरे को कम करने में भी मदद करता है। 
स्तनों का दूध शिशु में दमा और एक्जिमा जैसी एलर्जिक प्रतिक्रियाएं होने के खतरे को कम करता है। 
स्तनपान शिशु को बाल्यावस्था मधुमेह और ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) जैसी गंभीर बीमारियों से भी रक्षा करने में मदद करता है। 
स्तन दूध में वसीय अम्ल होते हैं, जो शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए जरुरी हैं। शिशु के जन्म के शुरुआती कुछ माह तक केवल स्तनपान कराने से शिशु का संज्ञानात्मक विकास बेहतर होता है। सैद्धांतिक रूप से, इसका अर्थ यह है कि स्तनपान आपके शिशु को अधिक बुद्धिमान बना सकता है। 
जब आप किसी संक्रमण के संपर्क में आती हैं, तो आपका शरीर उसका नया रोगप्रतिकारक बना देता है। ये रोगप्रतिकारक आपके दूध में जाते हैं, जो आप शिशु को अगली बार पिलाने वाली हैं। ये आपकी बीमारी शिशु तक फैलने से बचाते हैं। 
स्तन दूध को समय-पूर्व जन्मे शिशुओं और कम जन्म वजन शिशुओं के लिए बहुमूल्य पाया गया है। यह इसलिए क्योंकि शिशु शुरुआती जिंदगी में संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। 
मां के दूध में इंसुलिन, डिब्बाबंद दूध (फॉर्म्युला मिल्क) की तुलना में काफी कम होता है। इन्सुलिन वसा निर्माण को उत्प्रेरित करता है, इसलिए स्तन दूध आपके शिशु का वजन बढ़ना आसान बना सकता है। 
स्तनपान करने वाले शिशु अपने भोजन को नियमित रूप से लेने में कुशल होते है। इससे जैसे-जैसे उनका विकास होता है, वैसे-वैसे वे स्वस्थ खाने की आदतें विकसित करते हैं। 
स्तनपान आपके शिशु की उसके शरीर का तापमान सामान्य रखने में मदद करता है। उसे गर्म रखने के अलावा, त्वचा का त्वचा से स्पर्श आपके और आपके शिशु के बीच भावनात्मक बंधन को और भी मजबूत बनाता है। 
विशेशज्ञों का मानना है कि टीकाकरण के दौरान या उसके बाद स्तनपान कराना शिशु को शांत करने में मदद कर सकता है। । 

स्तनपान कराना आपके लिए भी एक स्वास्थ्यकर विकल्प है। आपके लिए लाभ हैं: 

स्तनपान कराने से आपके गर्भाशय को सिकुड़ कर वापस गर्भपूर्व स्थिति में आने में मदद मिलती है। यह प्रसवोपरांत रक्तस्राव को कम करने और एनीमिया के खतरे को दूर करने में भी मदद करता है। 
इससे रजोनिवृत्तिपूर्व स्तन कैंसर, डिम्बग्रंथि कैंसर और अस्थिसुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस) के कारण हड्डी टूटने का खतरा भी कम रहता है। 
स्तनपान अधिक कैलोरी भी जलाता है, इसलिए यह गर्भावस्था में आपके बढ़े वजन को कम करने में मदद कर सकता है। 
स्तनपान आपको व्यस्त दिनचर्या से नियमित फुरसत लेने और अपने शिशु को दूध पिलाने के दौरान, लेटने और बैठने का मौका देता है। 
स्तनपान कराने से आपका काम—काज भी कुछ कम हो जाता है। आपको दूध की बोतल धोने, विसंक्रमित करने अथवा दूध तैयार करने की जरुरत नहीं होती। 
आपको स्तन के दूध की लागत, तापमान अथवा स्वच्छता के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। स्तन दूध एकमात्र ऐसा भोजन है, जो हमेशा सही समय, सही जगह, सही मात्रा और सही तापमान पर उपलब्ध रहता है। 
स्तनपान करने वाले शिशुओं की मल से सनी नैपियां उतनी बदबूदार नहीं होती, जितनी कि फॉर्म्युला दूध पीने वाले शिशुओं की होती है। 
स्तन दूध पूर्णतया मुफ्त है! 


जब स्तनपान बढि़या तौर से चल रहा होता है, तो आप अपने शिशु को बढ़ते और विकसित होते हुए देखकर असीम शान्ति और उपलब्धि का अहसास कर सकती हैं। यह सब आपकी ही तो मेहनत है।


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