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कोलेस्ट्रॉल


कोलेस्ट्रॉल



LDL Cholesterol या खराब कोलेस्ट्रॉल, वसा का वह थक्का होता है जो नसों की दीवार पर चिपक जाता हैं तथा उसे और सख्त बना देता हैं। इस थक्के के कारण रक्त नलिकाओं का आकार सिकुड़ जाता हैं और उचित मात्रा में रक्त का प्रवाह नहीं हो पाता हैं। ख़राब कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए औषधि और व्यायाम के साथ उचित आहार करना भी बेहद जरुरी हैं।
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इस बीमारी से निजात पाने के लिए लोग महंगे से महंगा इलाज करवाने से परहेज नहीं करते, हालांकि दवाईयों से कुछ समय तक फर्क तो पड़ता ही है लेकिन अगर इसी की जगह पर देशी आयुर्वेदिक नुस्खा अपनाया जाए तो ये अत्यधिक कारगर साबित हो सकता है।

1. भूना हुआ जीरा – 50 ग्राम ।
2. मैथीदाना – 50 ग्राम ।
3. धनिया – 50 ग्राम ।
4. सौंफ – 50 ग्राम ।
5. काली मीर्च – 25 ग्राम ।
6. लेंडी पीपल – 25 ग्राम ।
7. सौंठ – 25 ग्राम । 
8. दालचीनी – 25 ग्राम ।
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खराब कोलस्ट्रोल (एल.डी.एल.) व वजन घटाने के लिए उपरोक्त आठों चीजों को कूट पीसकर कर पाउडर बनाकर छान ले । प्रतिदिन आधा चम्मच सुबह शाम भोजन के एक घंटे बाद एक कप गरम पानी में घोल कर लें । यह अच्छा पाचक व विरेचक भी है।

एड़ी में दर्द उपचार

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नौशादर एक पीस (एक चौथाई छोटा चम्मच) , गवार पाठा - एक चौथाई छोटा चम्मच, और 1/4 चम्मच हल्दी। 
एक बर्तन में गवार पाठा धीमी आंच पर गरम करे, 
उस में नौशादर और हल्दी डाले, जब गवार पाठा पानी छोड़ने लगे तब उसे एक कॉटन के टुकड़े पर रख ले और थोड़ा ठंडा करे।
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जितना गरम सह सके, उसे एक कपडे पर रख कर एड़ी पर पट्टी की तरह बांध लीजिये, ये प्रयोग सोते समय करे क्योंकि इसे बाँध कर चलना नहीं है। 
ये प्रयोग कम से कम 30 दिन तक पुरे धैर्य से करे।


चावल के पानी के चमत्कारिक उपयोग
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लगभग हर कोई भोजन में चावल खाना पसंद करता हैं, लेकिन क्‍या कभी आपने चावल के गर्मागर्म पानी का सेवन किया हैं जिसे लोग मांड के नाम से भी जानते हैं। क्या आप जानते हैं कि उबले चावलों का पानी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।

1. फायदेमंद चावल का पानी
अधिकांश महिलाये खाने को स्वादिष्ट बनाने के चक्कर में खाद्य पदार्थों के लाभकारी स्वास्थ्यवर्धक बहुमूल्य तत्वों को फेंक देती हैं जैसे चावल का मांड। चावल के मांड यानी पकाते वक्त बचा हुआ सफेद गाढा पानी बहुत काम का होता है। उसमें प्रोटीन, विटामिन व मिनरल होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ आपकी त्‍वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। आपको विश्‍वास नहीं हो रहा न लेकिन यहां दिये उपायों को जानकर अगली बार आप चावल पकाते समय उसके पानी को फेंकने से पहले दो बार सोचेगें।

2. पेट के लिए फायदेमंद
जिन लोगों को अक्‍सर पेट की समस्‍या रहती है, ऐसे कमजोर पेट वाले लोगों के लिए चावल का मांड बहुत फायदेमंद होता है। चावल का मांड खाने से खाना पचाने में आसानी होती है। चावल में दूध मिलाकर 20 मिनट तक ढककर रख दीजिए, फिर उसके खाइए ज्यादा फायदा होगा। इसके अलावा चावल का पानी डायरिया और कब्‍ज से तुरंत राहत देता है।

3. तुरंत एनर्जी दें
चावल का पानी तुरंत एनर्जी देने में भी मदद करता है। चावलों का पानी पीने से शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है और एनर्जी मिलती है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट की उच्‍च मात्रा के कारण यह शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। इसलिए जब भी आपको एनर्जी का स्‍तर कम हो रहा है तो चावल का पानी लें।
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4. त्‍वचा को चमकदार बनाये
त्वचा की चमक बढ़ने के लिए चावल के पानी का उपयोग किया जा सकता है। आपको नुकसान पहुंचाने वाले कॉस्मेटिक्स का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, केवल चावल के पानी के द्वारा आप उजली और चमकीली त्वचा पा सकते हैं। इसके लिए आप कॉटन को चावल के पानी में डुबाकर इसे चेहरे पर लगाकर चमकीली त्वचा प्राप्त कर सकते हैं।

5. मस्तिष्‍क के लिए फायदेमंद
चावल के पानी से दिमागी विकास और शरीर शक्तिशाली होता है। साथ यह अल्‍जामइर रोग को रोकने में मदद करता है। इसलिए अगर आप दिमाग तेज करना चाहते हैं तो चावल के पानी को बेकार समझकर फेंके नहीं।

6. हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करें
चावल का पानी हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। चावल सोडियम में कम होने के कारण हाई ब्‍लड प्रेशर और हाईपरटेंशन से पीड़ि‍त लोगों के लिए सबसे अच्‍छे आहार में से एक माना जाता है।

7. बालों के लिए फायदेमंद
बालों के लिए चावल का पानी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप पतले और बेजान बालों की समस्‍या से परेशान है तो चावलों के पानी से बालों को धोये। चावल के पानी से बालों को धोने से बाल घने होने के साथ-साथ बालों में चमक भी बनी रहती है। चावल के पानी को अपने बालों में लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर शैम्‍पू और कंडीशनर से धो लें। आप महंगे ट्रीटमेंट के बिना पा सकते हैं, सुंदर और चमकीले बाल।

8. कैंसर से बचाव
चावल का पानी पीने से कैंसर जैसी भंयकर बीमारी से भी राहत पाई जा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चावल में ट्यूमर को दबाने वाले तत्व देखे गए हैं और शायद यही आंतों के कैंसर से बचाव का एक कारण है।

माइग्रेन से बचने के लिए आयुर्वेदिक उपाय 

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1.संतुलित व पौष्टिक आहार का प्रयोग करें।

2.भोजन का समय तय कर समयनुसार भोजन करें।

3.किसी भी बात का तनाव न ले और सकारात्मक विचार बनाए रखें।

4.अपनी पूरी नींद ले।

5.थकान महसूस होने पर विश्राम करें।
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6.हल्के हाथ से सर में मालिश करें।

7.खुद को व्यस्त रखें और ऐसे काम जिससे आपका मन संतुष्ट हो।

8.किसी भी तरह के विवाद और तनाव से बचें। किसी से घमंड न करें।
बीमारी होने पर आहार का रखें ध्यान (Diet in Migraine)
माइग्रेन की शिकायत होने पर रोगी को अपने खाने पीने का विशेष ख्याल रखना चाहिए। 

आयुर्वेद के अनुसार माइग्रेन के रोगी को अपने खाने में निम्नलिखित चीजों का प्रयोग करना चाहिए:

1.संतुलित व पौष्टिक आहार ही खाएं।

2.देशी घी (विशेष तौर पर गाय के घी) से बना पदार्थ जैसे मालपुआ, जलेबी, हलुआ आदि का आधिक प्रयोग करें।
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3.देशी घी में चीनी मिलाकर खाने से माइग्रेन में आराम मिलता है।

4.माइग्रेन होने पर ताजे फल व हरी सब्जियों का बहुत ज्यादा प्रयोग करें।

5.पौष्टिक तत्वों के लिए दूध, दलिया व पनीर का बहुत अधिक प्रयोग करें।


किडनी में पथरी निर्माण होना एक भयंकर पीडादायक रोग है।

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 मूत्र में पाये जाने वाले रासायनिक पदार्थों से मूत्र अंगों में पथरी बनती है। जैसे युरिक एसिड, फास्फोर्स केल्शियम और ओ़क्झेलिक एसिड। लगभग 90 प्रतिशत पथरी का निर्माण केल्शियम ओक्झेलेट से होता है। गुर्दे की पथरी का दर्द आमतौर पर बहुत भयंकर होता है। पथरी जब अपने स्थान से नीचे की तरफ़ खिसकती है तब यह दर्द पैदा होता है। पथरी गुर्दे से खिसक कर युरेटर और फ़िर युरिन ब्लाडर में आती है। पेशाब होने में कष्ट होता है, उल्टी मितली, पसीना होना और फ़िर ठंड महसूस होना, ये पथरी के सामान्य लक्षण हैं। नुकीली पथरी से खरोंच लगने पर पेशाब में खून भी आता है। इस रोग में पेशाब थोड़ी मात्रा में कष्ट के साथ बार-बार आता है|
रोग के निदान के लिये सोनोग्राफ़ी करवाना चाहिये।वैसे तो विशिष्ठ हर्बल औषधियों से 30 एम एम तक की पथरी निकल जाती है। लेकिन 4+5 एम एम तक की पथरी घरेलू नुस्खों के प्रयोग से समाप्त हो सकती हैं। मैं ऐसे ही कुछ सरल नुस्खे यहां प्रस्तुत कर रहा हूं।
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1..तुलसी के पत्तों का रस एक चम्मच एक चम्मच शहद में मिलाकर जल्दी सबेरे लें। ऐसा 5-6 माह तक करने से छोटी पथरी निकल जाती है।

2..मूली के पत्तों का रस २०० एम एल दिन में २ बार लेने से पथरी रोग नष्ट होता है।

3.. दो अन्जीर एक गिलास पानी मे उबालकर सुबह के वक्त पीयें। एक माह तक लेना जरूरी है।

4..नींबू के रस में स्टोन को घोलने की शक्ति होती है। एक नींबू का रस दिन में 1-2 बार मामूली गरम जल में लेना चाहिये।

5..पानी में शरीर के विजातीय पदार्थों को बाहर निकालने की अद्भुत शक्ति होती है। गरमी में 4-5 लिटर और सर्द मौसम में 3-4 लिटर पानी पीने की आदत बनावें।
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6.. तरबूज में पानी की मात्रा ज्यादा होती है । जब तक उपलब्ध रहे रोज तरबूज खाएं। तरबूज में पुरुषों के लिये वियाग्रा गोली के समान काम- शक्ति वर्धक असर भी पाया गया है।

7..कुलथी की दाल का सूप पीने से पथरी निकलने के प्रमाण मिले है। 20 ग्राम कुलथी दो कप पानी में उबालकर काढा बनालें। सुबह के वक्त और रात को सोने से पहले पीयें।

8..अंगूर में पोटेशियम और पानी की अधिकता होने से गुर्दे के रोगों लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसमें अल्बुमिन और सोडियम कम होता है जो गुर्दे के लिये उत्तम है।

9..गाजर और मूली के बीज 10-10 ग्राम, गोखरू 20 ग्राम, जवाखार और हजरूल यहूद 5-5 ग्राम लेकर पाउडर बनालें और 4-4 ग्राम की पुडिया बना लें। एक खुराक प्रत: 6 बजे दूसरी 8 बजे और तीसरी शाम 4 बजे दूध-पानी की लस्सी के साथ लें। बहुत कारगर उपचार है|

10..पथरी को गलाने के लिये चौलाई की सब्जी गुणकारी है। उबालकर धीरे-धीरे चबाकर खाएं। दिन में 3-4 बार यह उपक्रम करें।

11..बथुआ की सब्जी आधा किलो लें। इसे 800 मिलि पानी में उबालें। अब इसे कपडे या चाय की छलनी में छान लें। बथुआ की सब्जी भी इसमें अच्छी तरह मसलकर मिलालें। काली मिर्च आधा चम्मच और थोडा सा सेंधा नमक मिलाकर पीयें। दिन में ३-४ बार प्रयोग करते रहने से गुर्दे के विकार नष्ट होते हैं और पथरी निकल जाती है।

12..प्याज में पथरी नाशक तत्व होते हैं। करीब 70 ग्राम प्याज को अच्छी तरह पीसकर या मिक्सर में चलाकर पेस्ट बनालें। इसे कपडे से निचोडकर रस निकालें। सुबह खाली पेट पीते रहने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।

13.. स्टूल पर चढकर १५-२० बार फ़र्श पर कूदें। पथरी नीचे खिसकेगी और पेशाब के रास्ते निकल जाएगी। निर्बल व्यक्ति यह प्रयोग न करें।

14..गाय के दूध के लगभग 250 मिलीलीटर मट्ठे में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह-शाम पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है। जवाखार और चीनी 2-2 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर पानी के साथ खाने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस मिश्रण को रोज सुबह-शाम खाने से आराम मिलता है।

15..100 मिलीलीटर नारियल का पानी लेकर, उसमें 10 मिलीलीटर पालक का रस मिलाकर पीने से 14 दिनों में पथरी खत्म हो जाती है। पालक के साग का रस 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से पथरी में लाभ मिलता है।

16.. गोक्षुर के बीजों का चूर्ण 3 से 6 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन 2 बार खाने से पथरी खत्म होती है।

17..भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम दिन में 3 बार रोगी को पानी के साथ सेवन कराने से रोग ठीक होता है।

18..कलमीशोरा, गंधक और आमलासार 10-10 ग्राम अलग-अलग पीसकर मिला लें और हल्की आग पर गर्म करने के 1-1 ग्राम का आधा कप मूली के रस के साथ सुबह-शाम लेने से गुर्दे की पथरी में लाभ मिलता है।

19..एक या दोनों गुर्दो में पथरी होने पर केवल आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है। पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक मात्रा में पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियां और रेत आसानी से निकल जाती हैं। आलू में मैग्नीशियम पाया जाता है जो पथरी को निकालता है तथा पथरी बनने से रोकता है।

20..प्याज का रस पीना पथरी निकालने के लिए बेहद लाभप्रद उपाय है। दो मध्यम आकार के प्याज लेकर भली प्रकार छीलें। एक गिलास जल में डालकर मध्यम आंच पर पकाएं। अब इस मिश्रण को मिक्सर में पीसकर इस रस को छानकर पियें। 7 दिन तक यह उपचार करने से पथरी के टुकड़े निकल जाते हैं।

आँखों की रौशनी तेज करने के उपाय
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ईश्वर की बनायी गयी इस दुनिया को दखने का माध्यम केवल हमारी ऑंखें ही है और इनको उम्र के पड़ाव के साथ देखभाल की भी नितांत आवयकता होती है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ हमारी आँखों के चारो तरफ क मांसपेशियां ढीली पड़ने लगती है और हमारी आँखें कमजोर हो जाती है। आंखों की रौशनी हमारे आहार और जीवनशैली पर भी निर्भर करती है।
हम यहाँ पर आपको आँखों की देखभाल और उसकी रौशनी बढ़ाने के कुछ आसान से उपाय बता रहे है ।

* सुबह उठकर मुहँ में पानी भरकर आँखें खोलकर साफ पानी के छीटें आँखों में मारने चाहिए इससे आँखों की रौशनी बढ़ती है ।

* प्रातः खाली पेट आधा चम्मच ताजा मक्खन, आधा चम्मच पसी हुई मिश्री और 5 पिसी काली मिर्च मलाकर चाट लें, इसके बाद कच्चे नारीयल की गिरी के 2-3 टुकड़े खूब चबा-चबाकर खाये और ऊपर से थोड़ी सौंफ चबाकर खा लें फिर दो घंटे तक कुछ भी न खाये। यह क्रिया 2-3 माह तक जरूर करिये ।

* बालों पर रंग, हेयर डाई और केमीकल शैम्पू लगाने से परहेज करें ।

* रात को 1 चम्मच त्रिफला मिट्टी के बर्तन में भिगाकर सुबह छाने हुए पानी से आँखें धोयें। इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है और कोई बीमारी भी नहीं होती है।

* प्रातःकाल सूर्योदय से पहले नियमित रूप से हरी घास पर 15-20 मिनट तक नंगे पैर टहलना चाहए। घास पर ओस की नमी रहती है नंगे पैर इस पर टहलने से आँख को तनाव से राहत मिलती है।और रौशनी भी बढ़ती है ।

* पैरों के तलवे की सरसों के तेल से नियमित मालिश करनी चाहिए । नहाने से 10 मिनट पूर्व पैरों के अंगूठों को सरसों के तेल से तर करने से आँखों की रौशनी लम्बे समय तक कायम रहती है ।
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* पालक, पत्ता गोभी, हरी सब्जियाँ और पीले फल खाएं। विटामिन ए, सी और ई से भरपूर कई पीले फल हमारी आंखों के लिए फायदेमंद हैं। इसके अतिरिक्त पपीता, संतरा, नींबू आदि के सेवन से दिन की रोशनी में हमारे देखने की क्षमता बढ़ती हैं।

* आँखों की रौशनी बढ़ाने के लिए प्रतिदिन 1-2 गाजर खूब चबा-चबाकर खाएँ ।गाजर का रस निकालकर भोजन के घंटे भर बाद पिएँ।
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* नियमित रूप से अंगूर खाएं, अंगूर के सेवन से रात में देखने की क्षमता बढ़ती है।

* 2 अखरोट और 3 हरड की गुठली को जलाकर उनकी भस्म के साथ 4 काली मिर्च को पीसकर उसका अंजन करने से आँखों की रौशनी बढती हे।

* 10 ग्राम छोटी हरी इलाइची , 20 ग्राम सौंफ के मिश्रण को महीन पीस लें। एक चम्मच चूर्ण को दूध के साथ नियमित रूप से पीने से आंखों की ज्योति अवश्य ही बढ़ती है।

* अनार के 5 से 6 पत्ते को पीस कर दिन में 2 बार लेप करने से दुखती आँख में लाभ होता हे और रौशनी भी बढ़ती है ।

* 300 ग्राम सौंफ को अच्छे से साफ करके कांच के बर्तन में रख ले अब बदाम और गाजर के रस से सौंफ को तीन बार भगोएँ जब सुख जाए तो इसे रोज रात दूध के साथ लें इससे भी आँखों की रोशनी बढ़ती है ।

* सूखें आँवले को रात में पानी में अच्छी तरह धोकर भिगो दें फिर दिन में 3 बार इसे रुई से आँखों में डालें और आँवले का ज्यादा ज्यादा किसी ना किसी रूप में अपने खाने / पीने में अवश्य ही प्रयोग करें। 3 माह के अंदर ही चश्मा उतर जायेगा ।
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* प्रतिदिन भोजन के साथ 50 से 100 ग्राम मात्रा में पत्तागोभी के पत्तों का सलाद बारीक कतर कर, इन पर पिसा हुआ सेंधा नमक और काली मिर्च डालकर खूब चबा-चबाकर खाएँ।

* आंखों की स्वस्थ्यता के लिए अच्छी नींद जरूरी है, नहीं तो आंखों के नीचे काला घेरा पड़ जाता है और रोशनी भी कम होती है।

* जब आँख भारी होने लगे नींद का समय हो जाए तब जागना उचित नहीं। सूर्योदय के बाद सोये रहने, दिन में सोने और रात में देर तक जागने से आँख पर बुरा प्रभाव पड़ता है और धीरे-धीरे आँखे रुखी और बेजान होने लगती है

* लगातार, बिस्तर पर लेट कर और यात्रा के दौरान पढ़ना नहीं चाहिए। पढ़ाई के समय आंखों को पर्याप्त विश्राम दें। अतिरिक्त सूर्य की और भी टकटकी लगाकर नहीं देखना चाहिए।

* आंखों की रोशनी तेज करने के लिए अपनी डाइट में प्याज और लहसुन को जरूर शामिल करें। इनमें सल्फर होता है जो आंखों के लिए ग्लूटाथाइन नामक एंटीऑक्सीडेंट तैयार करता है, जिससे नेत्रों की ज्योति बढ़ती है ।

* सोया व इसके उत्पाद में फैट्स बहुत कम व प्रोटीन बहुत अच्छी मात्रा में होता है। इसमें जरूरी फैटी एसिड, विटामिन ई व कई जरूरी तत्व होते हैं जो आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। * बालों पर रंग, हेयर डाई और केमीकल वाले शैम्पू नहीं लगाना चाहिए इसका भी बुरा असर हमारी आँखों पर पड़ता है ।

* लगातार टीवी देखने से आंखों की ज्योति घटती है क्योंकि टीवी से निकलने वाली घातक किरणे हमारी आँखों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँचती है। कभी भी बहुत पास या बहुत दूर और लेटकर भी टीवी नहीं देखना चाहिए
लहसुन खाने से फायदे और नुकसान
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लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता बल्कि इसे खाने के अनेक हेल्दी फायदे भी हैं।

इसे खाने से शरीर को विटामिन ए, बी और सी के साथ आयोडीन, आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम व मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व मिलते हैं। यही कारण है कि इसके नियमित सेवन से शरीर ताकतवर व त्वचा चमकदार हो जाती है।

लहसुन का सेवन करने वालों को फेफड़े के रोग नहीं होते। लहसुन एक शानदार कीटाणुनाशक है, यह एंटीबायोटिक दवाइयों का अच्छा विकल्प है, लहसुन से टीबी के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।

लहसुन दमा के इलाज में कारगर साबित होता है। 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करें। इससे दमा की शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है।
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रोजाना इसे खाने से आपका कॉलेस्ट्रॉल लेवल 12 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह ब्लड क्लॉटिंग को रोकता है, खून पतला करता है और रक्त प्रवाह सुचारू करता है।

लहसुन में विटामिन सी होने से यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है। यह आँतों के छिपे मल को भी बाहर निकाल देता है और कब्ज, गैस व एसिडिटी से मुक्ति दिलाता है।

100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने व एक लहसुन की कलियां डालकर धीमी आंच पर पकाएं। लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें। तेल की मालिश करने से पहले इसे हल्का गर्म कर लें।इससे हर प्रकार का बदन दर्द दूर हो जाएगा।
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अगर आप थुलथुले मोटापे से परेशान हैं तो - लहसुन की दो कलियां भून लें उसमें सफेद जीरा व सौंफ सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें। इसका सेवन सुबह खाली पेट गर्म पानी से करें। - लहसुन की चटनी खाना चाहिए और लहसुन को कुचलकर पानी का घोल बनाकर पीना चाहिए। - लहसुन की पांच-छ: कलियां भिगो दें। सुबह पीस लें। उसमें भुनी हिंग और अजवाइन व सौंफ के साथ ही सोंठ व सेंधा नमक, पुदीना मिलाकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज फांकना चाहिए।

खांसी और टीबी में लहसुन बेहद फायदेमंद है। लहसुन के रस की कुछ बूंदे रुई पर डालकर सूंघने से सर्दी ठीक हो जाती है।
लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसमें और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे सिर्फ मुहांसों पर लगाएं। मुहांसे साफ हो जाएंगे।

लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे।


लहसुन की अधिक मात्रा आपके स्‍वास्‍थ्‍य को हानिकारक प्रभाव भी दे सकती हैं।
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लहसुन सांस में बदबू, मुंह, पेट या सीने में जलन, गैस, मतली, उल्टी, शरीर में गंध और दस्त का कारण बन सकता है।

लहसुन के गाढ़े पेस्ट का त्‍वचा पर उपयोग त्‍वचा को जलने की तरह नुकसान पहुंचा सकता है।

गर्भावस्था एवं स्तनपान करानेवाली स्त्रियों को वैद्यराज की देखरेख में लेवे |

लहसुन के सेवन से खून का बहाव ज्‍यादा होता है। इसलिए अनुसूचित सर्जरी से कम से कम दो सप्ताह पहले लहसुन का सेवन करना बंद कर दें।

लहसुन गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट में जलन पैदा कर सकता है। इसलिए अगर आपको पाचन संबंधी समस्‍या हो तो लहसुन का प्रयोग सावधानी से करे|

अधिक कच्चा लहसुन लेने के बाद एक स्वस्थ आदमी में दिल का दौरा पड़ने की संभावना हो जाती है |

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