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सी-सेक्शन के बाद एक्सरसाइज शुरू करने से पहले जरूर जान लें ये 7 बातें

सी-सेक्शन के बाद एक्सरसाइज शुरू करने से पहले जरूर जान लें ये 7 बातें
हर महिला सी-सेक्शन के बाद वजन कम करना चाहती है, लेकिन इन बातों का ध्यान जरूर रखें!




सी-सेक्शन के बाद महिलाओं को बहुत सावधानी के साथ रहना पड़ता है। उन्हीं में से एक एक्सरसाइज भी है। दरअसल सी-सेक्शन से उबरने में समय लगता है और इस दौरान कोई भी गलत एक्सरसाइज आपको नुकसान पहुंचा सकती है। आपको बता दें कि सी-सेक्शन के बाद हालत सामान्य होने में छह से बारह हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए डॉक्टर हालत सही होने के बाद ही एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं। इंटरनेशनल सर्टिफाइड चाइल्ड बर्थ, लैक्टेशन एंड प्रेगनेंसी फिटनेस एजुकेटर सोनाली शिवलानी आपको बता रही हैं कि सी सेक्शन के बाद आपको एक्सरसाइज की शुरुआत कैसे करनी चाहिए।
(1) चेकअप कराएं- सी-सेक्शन के बाद एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर से डायस्टैसिस रीक्टी की स्थिति पर बात करें, जिसे पेट की मसल्स के दोनों साइड के बीच लगभग 2.7 सेमी या अधिक के अंतर के रूप में परिभाषित किया जाता है। आपको बता दें कि बिना सलाह लिए एक्सरसाइज करने से आपको नुकसान हो सकता है।

(2) वाकिंग करें- अगर आप सी-सेक्शन से गुजरी हैं और वजन कम करना चाहती हैं, तो वाकिंग बेहतर उपाय है। बेशक इससे देरी से रिजल्ट मिलता है लेकिन वाकिंग रूटीन को थोड़ा चेंज करें। यानि रोजाना वाकिंग के दौरान तीस मिनट थोड़ी तेजी से चलें, इससे रिजल्ट बेहतर होगा।

(3) टोनिंग और स्ट्रेथिंग एक्सरसाइज करें- वजन कम करने के लिए भारी एक्सरसाइज करने से आपको नुकसान हो सकता है। बजाय इसके अपर बॉडी की रसाइज ही करें, क्योंकि आपको ऊपरी हिस्से को मजबूत बनाने की जरूरत होती है। साथ ही पैरों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज से वजन कम करने और कोर वाले हिस्से को में टोन लाने में मदद मिलेगी।

(4) पीठ का ख्याल रखें- प्रेगनेंसी के बाद पीठ की एक्सरसाइज करना जरूरी है। इससे पोश्चर में सुधार होता है, कोर को मजबूती मिलती है और बैक पेन से राहत मिलती है। आप रोजाना कैमल और कैट पोश्चर ट्राई कर सकती हैं। इसके अलावा योग का लोकप्रिय कोबरा पोज़ भी कर सकती हैं।

(5) पेल्विक मसल्स पर काम करें- प्रेगनेंसी के दौरान आपके पेल्विस हिस्से पर बहुत असर पड़ता है, इसलिए इस हिस्से पर काम करना बहुत जरूरी है। इस हिस्से की मसल्स पर काम करने के लिए कीगल एक्सरसाइज सबसे बेस्ट है।

(6) पेट की एक्सरसाइज से बचें- सी-सेक्शन के बाद 12 हफ्तों तक पेट की कोई भी एक्सरसाइज ना करें। पेट पर दबाव पड़ने से टांकों पर असर हो सकता है और आपको दर्द हो सकता है।

(7) बॉडी का रखें ध्यान- डिलीवरी के बाद अपने शरीर को रिकवर होने के लिए थोड़ा समय दें। इसलिए रोजाना धीरे-धीरे शुरुआत करें। अगर आप थकावट महसूस करती हैं, तो थोड़ा आराम करें लेकिन जबरदस्ती एक्सरसाइज ना करें।




वजन उठाते वक्त भी होता है जोड़ों में दर्द ? कहीं आपको एवैस्कुलर नेर्कोसिस तो नहीं
कुछ लोगों में शुरुआती दौर में एवैस्कुलर नेकरोसिस के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है, तो वजन उठाने में भी जोड़ों में दर्द होता है।




हड्डियों से संबंधित कई समस्याएं हैं, जिसमें से एक है एवैस्कुलर नेर्कोसिस (avascular-nercosis)। हड्डियों से संबंधित इस समस्या में बोन टिश्यू यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। ऐसी स्थिति तब होती है, जब इन ऊतकों तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता है। इसे ऑस्टियोनेक्रोसिस भी कहते हैं। एवैस्कुलर नेर्कोसिस के कारण हड्डियां घिसने लगती हैं। हड्डी घिसने या जोड़ों के अलग हो जाने के कारण उस हिस्से में रक्त आपूर्ति बाधित हो जाती है। वैसे तो यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन आमतौर पर 30 से 60 वर्ष के बीच के आयु वर्ग के लोगों को यह अधिक होता है। लंब समय तक स्टेरॉयड के इस्तेमाल, एल्कोहल के सेवन आदि से भी यह बीमारी होती है।

लक्षण
मुबंई स्थित पीडी हिंदुजा नेशनल हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के हेड डॉ. संजय अग्रवाला का कहना है कि कुछ लोगों में शुरुआती दौर में इस बीमारी के कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है, तो वजन उठाने पर जोड़ों में दर्द होता है। कई बार लेटे रहने पर भी जोड़ों में दर्द होता है। डॉ. अग्रवाला का कहना है कि कूल्हे के एवैस्कुलर नेकरोसिस होने पर पेड़ू, जांघ और नितंब में दर्द होता है। कूल्हे के अलावा इस बीमारी से कंधे, घुटने, हाथ और पैरों के भी प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। इनमें से किसी तरह के लक्षण दिखाई देने और जोड़ों में लगातार दर्द रहने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।

कारण
जोड़ों या हड्डियों में चोट लगना: जोड़ों में किसी भी तरह की चोट या परेशानी जैसे जोड़ों का खुल जाना आदि की वजह से उसके नजदीक की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

रक्त नलिकाओं में वसा का जमाव: कई बार रक्त नलिकाओं में वसा का जमाव हो जाता है, जिससे ये नलिकाएं संकरी हो जाती हैं। इस वजह से हड्डियों तक रक्त नहीं पहुंच पाता है, जिससे उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है।

कोई अन्य रोग: सिकल सेल एनिमिया और गौचर्स डिजीज जैसी चिकित्सकीय स्थिति उत्पन्न होने पर भी हड्डियों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। इन सबके अलावा कुछ ऐसे अनजाने कारण भी होते हैं, जिनकी वजह से यह बीमारी लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लेती है।


खतरा कितना
जोड़ों में चोट लगना या उनका क्षतिग्रस्त हो जाना जैसे कूल्हों के जोड़ का अलग हो जाना या उनका टूट जाना। इस स्थिति में भी जोड़ों के नजदीक की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और हड्डी तक रक्त की आपूर्ति कम हो सकती है। स्टेरॉयड का इस्तेमाल, बहुत ज्यादा मात्रा में कॉर्टिकोस्टेरॉयड जैसी दवाइयों का सेवन एवैस्कुलर नेर्कोसिस होने का सामान्य कारण है। लगातार कई वर्षों से एक दिन में कई बार शराब पीने से रक्त नलिका में वसा का जमाव हो जाता है और वे संकरी हो जाती हैं। हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने के लिए लंबे समय तक दवाइयों के सेवन से जबड़ों के नेकरोसिस होने की संभावना बढ़ जाती है। पैंक्रिएटाइटिस, डायबिटीज, गौचर्स डिजीज, एचआईवी/एड्स, सिस्टेमेटिक लुपस एरीथेमाटोसस और सिकल सेल, एनिमिया जैसी बीमारियों के होने पर भी एवैस्कुलर नेकरोसिस होने की संभावना रहती है।

जटिलताएं
डॉ. संजय अग्रवाला के अनुसार, एवैस्कुलर नेर्कोसिस का उपचार नहीं कराने पर समय बीतने के साथ मरीज की स्थिति बदतर होती जाती है। एक समय ऐसा आता है, जब हड्डी कमजोर होकर घिसने लग जाती है। इतना ही नहीं, इस बीमारी के कारण हड्डियों का चिकनापन भी खत्म होने लगता है, जिससे भविष्य में मरीज गंभीर रूप से गठिया से पीड़ित हो सकता है। इस तरह की परेशानी होने पर रुमेटोलॉजिस्ट या ऑर्थोपेडिक सर्जन से दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने जाने से पहले, कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है।

उपचार
मरीज के लिए कौन सा उपचार सही रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि हड्डियों को कितना नुकसान पहुंचा है। इस बीमारी के इलाज के लिए पहले मेडिकेशन व थेरेपी का ही सहारा लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जाती है।

सर्जरी
इस बीमारी के बहुत ज्यादा गंभीर हो जाने पर डॉक्टर जोड़ों की सर्जरी करते हैं। सर्जरी के तहत हड्डियों के क्षतिग्रस्त भाग को हटाकर उसकी जगह मरीज के शरीर के किसी दूसरे भाग हड्डी को लेकर क्षतिग्रस्त हड्डियों की जगह प्रत्यारोपित किया जाता है। हड्डियों के ज्यादा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट का सहारा भी लिया जाता है।


भूलकर भी ना करें ये 6 काम वर्ना पत्नी छोड़ देगी आपको
कई बार हमारी कुछ छोटी ग़लतियां पड़ सकती हैं बहुत भारी।



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कपल्स के बीच प्यार बरकरार रहे तो रिश्ता लंबा चलता है। लेकिन प्यार के अलावा भी रिश्ते को टिकने के लिए कुछ और चीज़ों की ज़रूरत पड़ती है। जैसे कि आपका व्यवहार और छोटी-छोटी आदतें। जी हां, इस आर्टिकल में लिख रहे हैं हम 6 ऐसी आदतों के बारे में जिनकी वजह से आपकी पत्नी या गर्लफ्रेंड आपको छोड़ सकती है।

आप उसकी नज़रों में गिर चुके हैं– जी हां, अगर आप उनकी नज़र में इज़्जत पाने लायक नहीं हैं तो आपकी पत्नी आपके साथ रहना या कहीं आना-जाना भी पसंद नहीं करेंगी। खुद से छोटे या कमज़ोर लोगों के साथ आपका व्यवहार, सोशल टॉपिक्स पर आपकी राय हो या फिर महिलाओं से जुड़े आपके विचारों के आधार पर वह आपकी इज़्ज़त करेंगी। अगर यहां आपके बर्ताव में उन्हें कोई कमी दिखी तो वो आपके साथ रहना पसंद नहीं करेंगी।

धोखेबाजी– वैसे बहुत सी पत्नियां ऐसी भी होती हैं जो धोखा देने के बाद भी अपने पति के साथ रहती हैं। लेकिन यह आपके लिए केवल अपनी भूल सुधारने का एक मौका भर है, माफी नहीं। इसीलिए अगर आपने जानबूझकर अपनी पत्नी को धोखा दे रहे हैं तो आपको माफी नहीं मिल सकती। आप उसका भरोसा तोड़ेगे तो वह आपके साथ अपना रिश्ता खत्म कर देगी।

समर्पण की कमी- एक रिश्ता दो लोगों की कोशिशों से आगे बढ़ता है। माना आपकी पत्नी आपको बचपन से प्यार करती है या शादी के लिए उसी ने सबको मनाया हो लेकिन अगर आपकी तरफ से रिश्ते में कमिटमेंट की कमी है तो वो आपको हमेशा के लिए छोड़ देगी। अगर लड़कियों को प्यार के मामले में सामने से ठीक प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो उन्हें समझ जाती हैं कि आप तवज्जो और समय देने के काबिल नहीं।

उसका सम्मान करें- अपनी पत्नी या गर्लफ्रेंड के साथ सम्मानपूर्ण व्यवहार करें। उसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी या आर्थिक विषयों की समझ नहीं या फिर आपके ऑफिस से जुड़ी किसी बात पर वह कोई राय नहीं दे पाती तो इसका मतलब ये कतई नहीं कि वो बेवकूफ या बेकार हैं। अगर आप चाहते हैं कि वो आपके आसपास रहें या आपका रिश्ता बचा रहे तो उन्हें सम्मान दें।

फायदा ना उठाएं – पुरुष अक्सर छोटी-मोटी बातों में भी अपने पार्टनर का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। जब उन्हें इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत होती है तो वो उम्मीद करते हैं कि उनकी पत्नी या गर्लफ्रेंड उनके पास रहे लेकिन जैसे ही सब ठीक हो जाता है फिर से उसकी अहमियत कम हो जाती है। कई बार ऐसा भी होता है कि पहले तो पुरुष अपनी पार्टनर को छोड़ देते हैं लेकिन जब वो ज़िन्दगी के किसी मोर्चे पर फेल होते हैं तो फिर लौट आते हैं उनके पास, भावनात्मक सपोर्ट और सहारा पाने की आस में। लेकिन एक बात का ख्याल रहे महिलाएं चाहे आपसे कितना भी प्यार क्यों न करती हों इस तरह के व्यवहार को वे हर बार बर्दाश्त नहीं कर सकतीं।

पर्सनल स्पेस में ना दें दखल –आप अपने दोस्तों के साथ देर रात पार्टी कर सकते हैं, ऑफिस के लोगों के साथ घूमने-फिरने या फिल्म देखने जाते हैं तो आपकी पत्नी क्यों नहीं? महिलाओं को उनकी पर्सनल स्पेस पसंद होती है। आपको बहुत सारा समय देने के बावजूद वो अपने लिए भी थोड़ा समय चाहती है। माना वह आपसे प्यार करती है पर उसके बदले आपकी पत्नी या गर्लफ्रेंड खुद को दुनियाभर से काट भी नहीं सकती। अगर उससे अपनी पर्सनल स्पेस नहीं मिल रही और इससे साबित होगा कि आप बहुत ज़्यादा इनसेक्योर हैं, और इसीलिए वह आपको कभी भी छोड़कर जा सकती है।

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