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30 के बाद माँ बन रही हैं तो कुछ इस बढ़ाएं तरह नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस


30 के बाद माँ बन रही हैं तो कुछ इस बढ़ाएं तरह नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस




आज के इस दौर में हर कोई अपने करियर पर ज़्यादा ध्यान देता है, अब चाहे वो महिला हो या पुरुष हर कोई पहले आत्मनिर्भर होकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है, फिर शादी के बंधन में बंधना चाहता है। अब ऐसे में देर से शादी करने के बाद महिलाओं में गर्भधारण भी देरी से ही होती है और अगर कोई जल्दी शादी कर भी लेते हैं तो शादी के बाद अपने करियर पर ज़्यादा ध्यान देते हैं क्योंकि यह ज़ाहिर सी बात है कि शादी के बाद खर्चे बढ़ते हैं और ऐसे में सेविंग करना भी ज़रूरी है क्योंकि बिना सेविंग के आजकल कोई भी बच्चा प्लैन नहीं करता।

इन्हीं सब कारणों के चलते अधिकतर महिलाएं 30 के बाद माँ बनने का फैसला करती हैं जिस कारण आजकल नॉर्मल डिलीवरी कम और सी-सेक्शन का चलन ज़्यादा बढ़ गया है। हालांकि, आज भी कई महिलायें नॉर्मल डिलीवरी ही चाहती हैं क्योंकि इससे ना सिर्फ महिला को बल्कि उसके शिशु को भी कई फायदे होते हैं। वहीं कुछ महिलाएं सी-सेक्शन को चुनना सही समझती हैं क्योंकि वो प्रसव को झेलने से डरती है, लेकिन वो शायद ये भूल जाती हैं कि नॉर्मल डिलीवरी के लिए अगर शरीर को सही से तैयार किया जाए तो यह मुश्किल भी नहीं है और यह सिर्फ माँ नहीं बल्कि शिशु के लिए भी फायदेमंद होता है। आज इस ब्लॉग के ज़रिये हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप तीस के बाद माँ बन रहीं हैं तो कैसे अपने शरीर को नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार करें।
लाइफस्टाइल में करें बदलाव

तीस से ऊपर की उम्र में खुद को नॉर्मल डिलीवरी के लिए थोड़ा तैयार करना पड़ता है क्योंकि इस उम्र में महिलाओं में मेटाबॉलिज्म काम होने लगता है और इसी वजह से वज़न भी आसानी से बढ़ने लगता है। इसके अलावा हार्मोनल परिवर्तन भी तेज़ी से होने लगता है जिस वजह से नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस कम होने लगता है। ऐसे में महिला को अपने लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। आप हल्के-फुल्के एक्सरसाइज ज़रूर करें ताकि आपका वज़न संतुलित रहे और प्रेगनेंसी के दौरान आपको डायबेटिज़ या हाई बीपी की शिकायत ना हो और आपकी गर्भावस्था हेल्दी हो और नॉर्मल डिलीवरी से अपने शिशु को जन्म दे सके। इसके अलावा सोने और उठने का भी सही वक़्त तय करें क्योंकि नींद आपके जीवन में बहुत ज़्यादा असर डालती है।
खाने-पीने का रखें ध्यान

खाना आपके स्वास्थ्य कप बहुत प्रभावित करता है, आपने तो सुना ही होगा कि जैसा या जो भी आप खाते हैं उसका सीधा असर आपके शरीर पर पड़ता है इसलिए आपका खाना सही होना बहुत ज़रूरी है। आजकल कई महिलाएं भी शराब का सेवन आय धूम्रपान करने से हिचकिचाती नहीं और ऐसे में अगर आप शिशु के सपने देख रहीं हैं तो आपको ये सब बंद करना होगा। इसके अलावा सही आहार लें, प्रोटीन, विटामिन का सेवन करें, जंक फूड्स या कोई भी ज़्यादा तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन ना करें। अपने खाने में फल, हरी सब्ज़ियां या सलाद को ज़रूर शामिल करें। जब आपको इसकी आदत लग जाए उसके बाद ही गर्भधारण के बारे में सोचे और जितना हो सके इन सब चीज़ों से दूर रहें।
तनाव से रहें दूर

आजकल के इस व्यस्त जीवन में किसी को भी किसी के लिए वक़्त नहीं है, ऐसे में अपने लोग बहुत सी ऐसी बातें जो दूसरों से शेयर नहीं कर पाते जिस कारण उनको अंदर-अंदर घुटन और तनाव होने लगता है। ऐसे में इसका असर गर्भावस्था पर भी पड़ता है, इसलिए जितना हो सके खुश रहें और तनाव से दूर रहें।

वॉक है ज़रूरी

सुबह-शाम वॉक ज़रूर करें, खासकर के गर्भावस्था के दूसरे या तीसरे तिमाही से।थोड़ी-थोड़ी देर ही सही, लेकिन वॉक करने से नार्मल डिलीवरी के चांसेस बढ़ते हैं और साथ ही आपके शरीर को भी आराम मिलेगा। अगर आपको ज़्यादा वॉक करने का मन नहीं करता तो आप चाहे तो लगातार वॉक ना करके एक-दो दिन छोड़कर भी वॉक पर जा सकती हैं या घर में ही हल्का-फुल्का टहल सकती हैं। इसके अलावा आप एक्सरसाइज के तौर पर घर के छोटे-मोटे काम भी कर सकती हैं।
सकारात्मक सोच और डॉक्टर की सलाह है ज़रूरी

गर्भावस्था के मन को शांत रखें और सकारात्मक सोच रखें, हमेशा यह ध्यान में रखें कि आप नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार हैं। कभी भी मन में नकारात्मक सोच या डर की भावना ना लाएं, हालांकि डरना खासकर के जो पहली बार माँ बन रही हैं उनके लिए लाज़मी है लेकिन मन में हिम्मत होना भी ज़रूरी है। इसके अलावा डॉक्टर से रेगुलर बात करते रहे और नियमित चेकअप कराते रहें।
गर्भावस्था एक बहुत ही अनमोल पल होता है और इसको डर और तनाव से नहीं बल्कि खुश होकर महसूस करें क्योंकि ना सिर्फ आपके खाने-पीने का आपके शिशु पर असर होगा बल्कि आपके सोच का भी आपके शिशु पर प्रभाव पड़ेगा।

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