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क्या आपको पता है कि हार्ट रेट 100 बीट्स प्रति मिनट क्यों होती है |


क्या आपको पता है कि हार्ट रेट 100 बीट्स प्रति मिनट क्यों होती है |

एक सामान्य व्यक्ति का दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है लेकिन कभी कभी सामान्य व्यक्तियों में भी हार्ट रेट 60-90 बीट्स तक हो जाती है | दिल की धड़कन घटती बढ़ती रहती है लेकिन जब आपके दिल की धड़कन 100 के पार होने लगे तो आपको परेशानी होने लगती है | इस समस्या को टैकीकार्डिया (tachycardia) के नाम से जाना जाता है |





कुछ लोग दिल सम्बन्धी बिमारियों से ग्रस्त रहते है जिनके लिए ऐसी स्थिति होने का कारण उनके हार्ट का इलेक्ट्रिक सिस्टम प्रभावित होना है | इसी वजह से हार्ट रेट नार्मल नहीं रहती है | कई बार इस तरह की समस्या सामान्य व्यक्तियों में भी देखी जाती है क्योंकि उनमे भी कई बार हार्ट के इलेक्ट्रिक सिंग्लिग में खराबी होने से ऐसा हो सकता है |

आज हम आपको दिल की धड़कन असामान्य होने के कारणों के बारे में बताने जा रहे है जिन्हें जानकर आपको पता चल सकता है कि आप किसी बीमारी से ग्रस्त है या नहीं | इसके साथ साथ आपको इसका उपचार करने में भी आसानी हो सकती है | इसलिए आइये जानते है इस विषय से सम्बंधित कुछ खास जानकारी जो आपके सामने इस तरह से है :


ऑटोमैटिसिटी (Automaticity) :


मनुष्य के शरीर में हार्ट रेट इलेक्ट्रिक इम्पल्स होती है जिसके कारण हार्ट की पम्पिंग को नियंत्रण में किया जाता है | इसी वजह से हमारा दिल पम्प करता है और धड़कता रहता है | यह इलेक्ट्रिक सिग्नल्स एक निश्चित मार्ग जिसे एवी नोड कहते के जरिए अपर चैम्बर से लोअर चैम्बर की तरफ जाते हैं |


जब व्यक्ति सामान्य रूप से बैठा रहता है या आराम करता है तो उसकी नार्मल हार्ट बीट्स 60 से 90 बीट्स प्रति मिनट के आस पास रहती है लेकिन जब वो किसी गतिविधि में लग जाता है तो हार्ट बीट्स भी बढ़ने लगती है और उस समय ये 120/130 बीट्स प्रति मिनट तक बढ़ जाती है |
हालाँकि इनके इस तरह से बढ़ने से कोई गंभीर समस्या नहीं होती है क्योंकि कई बार बिना किसी वजह के अपर और लोअर चैम्बर की मसल्स हाइपरएक्टिवेटिड होने के कारण भी ऐसा हो सकता है | जब आपके अपर चैम्बर में हाइपरएक्टिविटी होती है तो अट्रियल टैकीकार्डिया (atrial tachycardia) बनने लगता है और जब लोअर चैम्बर में ऐसा होता है तो वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (ventricular tachycardia) बनता है | इसी वजह से आपकी हार्ट बीट 140 के आस पास भी पहुँच जाती है |


अबनॉर्मल कंडक्टशन :


जब इलेक्ट्रिक इम्पल्स इलेक्ट्रिसिटी पास करने के लिए जो रूट लिए जाते है तो इस तरह की स्थिति बन सकती है | जब किसी बच्चे का जन्म होता है या व्यक्ति की उम्र ज्यादा होने लगती है तब भी ऐसा हो सकता है | जब एक रूट से होकर इलेक्ट्रिक इम्पल्स लोअर चैम्बर तक पहुंचते है और दूसरे रूट से होते हुए अपर चैम्बर तक जाते है तो टैकीकार्डिया की संभावना होने लगती है |

ट्रिगर एक्टिविटी :

इस तरह की स्थिति में हार्ट बीट को बाहरी तत्व प्रभावित करने लगते है जिसके कारण हार्ट बीट बढ़ने लगती है | कई बार ऐसा किसी दवा के संक्रमण के कारण भी हो सकता है जिससे हाइपरएक्टिविटी होने लगती है और दिल की धड़कन बढ़ने लगती है |


किसी रोग जैसे एनीमिया, ब्लीडिंग, बुखार, चोट या दर्द, थाइरोटाक्सीकोसिस और इन्फेक्शन आदि से ग्रस्त होने पर भी व्यक्ति की हार्ट बीट नार्मल नहीं रहती है | थाइरोटाक्सीकोसिस रोग से ग्रस्त होने पर इलेक्ट्रिकल इम्पल्स साइनस नोड पर रुक जाती हैं और इस स्थिति में हार्ट बीट 130 से 140 बीट्स प्रति मिनट होने लगती है | हालाँकि कुछ उपायों दवारा इस समस्या को ठीक किया जा सकता है |

दिल की धड़कन या हार्ट बीट का सामान्य से असामान्य होना कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन अगर किसी रोग से ग्रस्त होने के बाद ऐसा लगातार होने लगे तो आपको ऐसी स्थिति में किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेकर उचित उपाय कर लेना चाहिए ताकि आगे चलकर इसके कारण कोई गंभीर समस्या ना होने पाए |

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