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चना खाने के फायदे


चना खाने के फायदे
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चने में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स पाए जाते हैं। चने के सेवन से सुंदरता बढ़ती है साथ ही दिमाग भी तेज हो जाता है।

1. 25 ग्राम काले चने रात में भिगोकर सुबह खाली पेट सेवन करने से डायबिटीज दूर हो जाती है।
2. गर्म चने रूमाल या किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है।
3. मोटापा घटाने के लिए रोजाना नाश्ते में चना लें।
4. अंकुरित चना 3 साल तक खाते रहने से कुष्ट रोग में लाभ होता है।
5. गर्भवती को उल्टी हो तो भुने हुए चने का सत्तू पिलाएं।
6. चना पाचन शक्ति को संतुलित और दिमागी शक्ति को भी बढ़ाता है। चने से खून साफ होता है जिससे त्वचा निखरती है।
7. सर्दियों में चने के आटे का हलवा अस्थमा में फायदेमंद होता है।
8. चने के आटे की नमक रहित रोटी 40 से 60 दिनों तक खाने से त्वचा संबंधित बीमारियां जैसे-दाद, खाज, खुजली आदि नहीं होती हैं।
9. भुने हुए चने रात में सोते समय चबाकर गर्म दूध पीने से सांस नली के अनेक रोग व कफ दूर हो जाता हैं।
10. शहद मिलाकर पीने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।
11. चने के पौधे के सूखे पत्तों का धुम्रपान करने से हिचकी तथा आमाशय की बीमारियों में लाभ होता है।
12. पीलिया में चने की दाल खाने से राहत मिलती है।
13. चीनी के बर्तन में रात को चने भिगोकर रख दे। सुबह उठकर खूब चबा-चबाकर खाएं इसके लगातार सेवन करने से वीर्य में बढ़ोतरी होती है व पुरुषों की कमजोरी से जुड़ी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। भीगे हुए चने खाकर दूध पीते रहने से वीर्य का पतलापन दूर हो जाता है।
14. दस ग्राम चने की भीगी दाल और 10 ग्राम शक्कर दोनों मिलाकर 40 दिनों तक खाने से धातु पुष्ट हो जाती है।
15. बार-बार पेशाब जाने की बीमारी में भुने हूए चनों का सेवन करना चाहिए। गुड़ व चना खाने से भी मूत्र से संबंधित समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाता है।


चावल के पानी के चमत्कारिक उपयोग
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लगभग हर कोई भोजन में चावल खाना पसंद करता हैं, लेकिन क्‍या कभी आपने चावल के गर्मागर्म पानी का सेवन किया हैं जिसे लोग मांड के नाम से भी जानते हैं। क्या आप जानते हैं कि उबले चावलों का पानी हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।
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फायदेमंद चावल का पानी
अधिकांश महिलाये खाने को स्वादिष्ट बनाने के चक्कर में खाद्य पदार्थों के लाभकारी स्वास्थ्यवर्धक बहुमूल्य तत्वों को फेंक देती हैं जैसे चावल का मांड। चावल के मांड यानी पकाते वक्त बचा हुआ सफेद गाढा पानी बहुत काम का होता है। उसमें प्रोटीन, विटामिन व मिनरल होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ आपकी त्‍वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद होते हैं। आपको विश्‍वास नहीं हो रहा न लेकिन यहां दिये उपायों को जानकर अगली बार आप चावल पकाते समय उसके पानी को फेंकने से पहले दो बार सोचेगें।
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पेट के लिए फायदेमंद
जिन लोगों को अक्‍सर पेट की समस्‍या रहती है, ऐसे कमजोर पेट वाले लोगों के लिए चावल का मांड बहुत फायदेमंद होता है। चावल का मांड खाने से खाना पचाने में आसानी होती है। चावल में दूध मिलाकर 20 मिनट तक ढककर रख दीजिए, फिर उसके खाइए ज्यादा फायदा होगा। इसके अलावा चावल का पानी डायरिया और कब्‍ज से तुरंत राहत देता है।
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तुरंत एनर्जी दें
चावल का पानी तुरंत एनर्जी देने में भी मदद करता है। चावलों का पानी पीने से शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है और एनर्जी मिलती है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट की उच्‍च मात्रा के कारण यह शरीर को तुरंत एनर्जी देता है। इसलिए जब भी आपको एनर्जी का स्‍तर कम हो रहा है तो चावल का पानी लें।
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त्‍वचा को चमकदार बनाये
त्वचा की चमक बढ़ने के लिए चावल के पानी का उपयोग किया जा सकता है। आपको नुकसान पहुंचाने वाले कॉस्मेटिक्स का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, केवल चावल के पानी के द्वारा आप उजली और चमकीली त्वचा पा सकते हैं। इसके लिए आप कॉटन को चावल के पानी में डुबाकर इसे चेहरे पर लगाकर चमकीली त्वचा प्राप्त कर सकते हैं।
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मस्तिष्‍क के लिए फायदेमंद
चावल के पानी से दिमागी विकास और शरीर शक्तिशाली होता है। साथ यह अल्‍जामइर रोग को रोकने में मदद करता है। इसलिए अगर आप दिमाग तेज करना चाहते हैं तो चावल के पानी को बेकार समझकर फेंके नहीं।
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हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करें
चावल का पानी हाई ब्‍लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। चावल सोडियम में कम होने के कारण हाई ब्‍लड प्रेशर और हाईपरटेंशन से पीड़ि‍त लोगों के लिए सबसे अच्‍छे आहार में से एक माना जाता है।
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बालों के लिए फायदेमंद
बालों के लिए चावल का पानी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप पतले और बेजान बालों की समस्‍या से परेशान है तो चावलों के पानी से बालों को धोये। चावल के पानी से बालों को धोने से बाल घने होने के साथ-साथ बालों में चमक भी बनी रहती है। चावल के पानी को अपने बालों में लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर शैम्‍पू और कंडीशनर से धो लें। आप महंगे ट्रीटमेंट के बिना पा सकते हैं, सुंदर और चमकीले बाल।
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कैंसर से बचाव
चावल का पानी पीने से कैंसर जैसी भंयकर बीमारी से भी राहत पाई जा सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चावल में ट्यूमर को दबाने वाले तत्व देखे गए हैं और शायद यही आंतों के कैंसर से बचाव का एक कारण है।


कमरदर्द का रामबाण इलाज



कमरदर्द का रामबाण इलाज
आधुनिक जीवनशैली पर चलने वाला हर एक व्यक्ति आज किसी न किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी से ग्रस्त है। इन सामान्य दिखने वाली बेहद घातक बीमारियों में से ही एक है कमर दर्द। अगर आप कमर दर्द से परेशान हैं तो इससे बचने के लिए आप के सामने प्रस्तुत हैं कुछ रामबाण नुस्खे जो कि बहुत कारगर तो हैं ही साथ ही इनका कोई भी साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।

( अजवाइन को तवे के ऊपर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें तथा ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। लगातार 7 दिनों तक यह प्रयोग किया जाए तो आठवे दिन से कमर दर्द में 100 फीसदी लाभ होता है।

जहां दर्द होता होता है हो वहाँ 5 मिनट तक गरम सेंक, और दो मिनट ठंडा सेंक देने से तत्काल लाभ पहुंचता है। 

सुबह सूर्योदय के समय 2-3 मील लंबी सैर पर जाने वालों को कमर दर्द की शिकायत कभी नहीं होगी।
नियमित रूप से चक्रासन करें )

रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें।

नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है।

कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है।

अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें।

नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए।

योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, श्वसन आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए।

कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें।

कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा।

कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं।

कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।

ऑफिस में काम करते समय कभी भी पीठ के सहारे न बैठें। अपनी पीठ को कुर्सी पर इस तरह टिकाएं कि यह हमेशा सीधी रहे। गर्दन को सीधा रखने के लिए कुर्सी में पीछे की ओर मोटा तौलिया मोड़ कर लगाया जा सकता है।


इन समानों को फ्रिज में न रखे



कई चीजों को हम रेफ्रिजरेटर में इसलिए रखते हैं ताकि वे खराब न हों, लेकिन कई चीजें ऐसी भी होती हैं, जिन्हें फ्रिज में नहीं रखना चाहिये, क्योंकि वे यहां खराब हो सकती हैं।

1.तेल को कभी फ्रिज में नहीं रखना चाहिये। फ्रिज में रखने से यह गाढ़ा हो जाता है और कुछ हद तक मक्खन की तरह हो जाता है। कुछ तेल जैसे नारियल और ऑलिव ऑयल को खासतौर पर फ्रिज में नहीं रखना चाहिये। और जब आप इन्हें फ्रिज से निकालते हैं तो इन्हें सामान्य तापमान तक आने में काफी समय लगता है।

2. प्याज को तो कभी भी फ्रिज में न रखें। फ्रिज में रखने पर ये न सिर्फ पिलपिले हो जाते हैं बल्कि इससे फ्रिज के अंदर भी अजीब सी गंध भर जाती है। इससे फ्रिज में रखे अन्य सामान पर भी इसका असर आता है। तो बेहतर है कि प्याज को बाहर ही रखा जाए।

3. आलू स्टार्च से भरा होता है, जो ठंड में बुरा असर डालती हैं। ठंड में स्टार्च शुगर के रूप में टूटने लगता है। इससे यह ग्रीटी और एक प्रकार से मीठा हो जाता है। इससे इसका स्वाद और आकार दोनों खराब हो जाते हैं। आलू वास्तव में ठंडे और अंधेरे में ही रखने चाहिये। अच्छा है अगर आप इन्हें कागज में लपेटकर रखें। और प्याज से दूर क्योंकि दोनों को साथ रखने पर दोनों जल्दी खराब हो सकते हैं।

4. टमाटर पकने पर ज्यादा स्वाद देते हैं। लेकिन फ्रिज में रखने से टमाटर के पकने की कुदरती प्रक्रिया रुक जाती है। फ्रिज में रखने पर वे मुलायम हो जाते हैं और उनके भीतर बर्फ के कण जमने लगते हैं। इसके बजाय आपको चाहिये कि आप ताजा टमाटर खरीदें और उन्हें फ्रिज में न रखें।

5. शहद कुदरती प्रिजरवेटिव है, तो अगर आप इसे बरसों तक जार में ऐसे ही रखा रहने दें तो भी यह खराब नहीं होता। शहद को फ्रिज में रखने से उसमें चीनी के कण जमा हो जाते हैं और शहद सख्त हो जाता है। ऐसे में इसे जार से निकालना मुश्किल हो जाता है।

6.फ्रिज में रखने से खरबूजा अपने एंटीऑक्सीडेंट गुण खो देता है। खासतौर पर अगर आप उन्हें बिना काटे फ्रिज में रखें तो इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों पर विपरीत असर पड़ता है। हालांकि काटकर आप इसे फ्रिज में रख सकते हैं।

7. फ्रिज में रखने से ब्रेड जल्दी खराब होती है। फ्रिज में रखने पर यह जल्दी सख्त हो जाती है और आसानी से चूरा हो जाती है। अगर ब्रेड सैंडविच के रूप में हो, तो आप उसे फ्रिज में रख सकते हैं। अन्यथा आप उसे फ्रिज में न रखें और सीधा फ्रिजर में रख दें।

8. लहसुन फ्रिज के बाहर भी सुरक्षित रहता है। बल्कि अगर आप इसे फ्रिज में रखेंगे तो यह ज्यादा जल्दी खराब होगा। तो लहसुन को फ्रिज के बाहर ही रखना

लहसुन की एक कली रोज सेवन करे



लहसुन की एक कली रोज सेवन करे -

लहसुन को वैसे तो तामसिक यानी काम व गुस्से की भावना बढ़ाने वाला माना गया है। लेकिन लहसुन के औषधिय गुण इन बुराईयों से कही अधिक बढ़कर हैं। ये गुण ऐसे हैं जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं। हम आपको आज बताने जा रहे हैं लहसुन के ऐसे ही गुणों के बारे में-
लहसुन में पाए जाने वाले तत्व - लहसुन में प्रोटीन 6.3 प्रतिशत,वसा 0.1 प्रतिशत, कार्बोज 21 प्रतिशत, खनिज पदार्थ- 1 प्रतिशत, चूना 0.3 प्रतिशत तथा लोहा1.3 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम होता है। इसके अतिरिक्त वीटामिन ए, बी, सी एवं सल्फ्यूरिक एसिड विशेष मात्रा में पाई जाती है।
विटामिन सी की कमी होने पर- जिनके शरीर में रक्त की कमी है, उन्हें लहसुन का सेवन अवश्य करना चाहिए, इसमें पर्याप्त मात्रा में लौह तत्व होता है जो कि रक्त निर्माण में सहायक होता है। लहसुन में विटामिन सी होने से यह स्कर्वी रोग से भी बचाता है।
कॉलेस्ट्रोल को कम करता है- कॉलेस्ट्रोल की समस्या से परेशान लोगों के लिए लहसुन का नियमित सेवन अमृत साबित हो सकता है।
कैंसर से रक्षा करता है- कैंसर के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। लहसुन में कैंसर निरोधी तत्व होते हैं। यह शरीर में कैंसर बढऩे से रोकता है। लहसुन के सेवन से ट्यूमर को 50 से 70फीसदी तक कम किया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद- गर्भवती महिलाओं को लहसुन का सेवन नियमित तौर पर करना चाहिए। गर्भवती महिला को अगर उच्च रक्तचाप की शिकायत हो तो, उसे पूरी गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी रूप में लहसुन का सेवन करना चाहिए।
कफ में लहसुन लाभदायक - ठंड या बदलते मौसम में अक्सर किसी भी उम्र के लोगों को कफ और जुकाम जैसी परेशानी हो जाती हैं। ऐसे में अगर आप लहसुन का नियमित रूप से सेवन करते हैं तो आप ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं से बड़ी ही आसानी से निजात पा सकते हैं।
एंटीबायोटिक की तरह असरदार- लहसुन में एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक गुण हैं, जिसकी वजह से वह रोगाणुओं का नाश करती है। यही कारण है कि घाव धोने के लिए लहसुन के एक भाग रस में तीन भाग पानी मिलाकर काम में लिया जाता है।
लहसुन का इस्तेमाल दांत की हड्डियों के आसपास होने वाले संक्रमण से बचाता है.
लहसुन में पाया जाने वाला सल्फाइड हृदय वाहिनी तंत्र को भी ठीक रखता है. शोध में इस बात की पुष्टि हुई है कि लहसुन खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित करता है. लहसुन चिकित्सा के बारे में मास्को के नेशनल कार्डियोलॉजिकल रिसर्च सेंटर में भी काफी शोध किया गया. 12 सप्ताह तक 42 लोगों के परीक्षण के बाद ये बात साबित हुई है कि लहसुन खाने के बाद खून में 7.6 प्रतिशत तक कोलेस्ट्रॉल में गिरावट आई है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर हर दिन लहसुन का सेवन किया जाए तो दिल की धमनियों के संकरे होने का खतरा कम हो जाता है. इससे हार्टअटैक की संभावना भी काफी कम हो जाती है.


दिमाग को तेज करने वाली जड़ी-बूटियां




दिमाग हमारे शरीर को वो हिस्‍सा है जिसके संकेत के बिना शरीर का कोई भी अंग काम नहीं कर सकता। लेकिन कई बार बढ़ती उम्र, गलत आदतों, नशे और आवश्यक पोषक तत्वो की कमी आदि से याददाश्त कमजोर होने लगती है। लेकिन अपने आहार में कुछ विशेष जड़ी-बूटियों को शमिल करके आप अपने दिमाग को तेज कर सकते हैं। आइए जानें ऐसी कौन सी जड़ी-बूटियां है जिनको अपने आहार में शामिल कर आप आसानी से तेज दिमाग पा सकते हैं।

जटामांसी :- 
जटामांसी औषधीय गुणों से भरपूर जड़ी-बूटी है। इसे जटामांसी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी जड़ों में जटा बाल जैसे तंतु लगे होते हैं। यह दिमाग के लिए एक रामबाण औषधि है, यह धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है। एक चम्मच जटामासी को एक कप दूध में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।

बाह्मी :-
बाह्मी नामक जड़ी-बूटी को दिमाग का टॉनिक भी कहा जाता है। यह दिमाग को शांति और स्पष्टता प्रदान करती है और याद्दाश्त को मजबूत करने में भी मदद करती है। आधे चम्मच बाह्मी के पाउडर और शहद को गर्म पानी में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।

दालचीनी :- 
दालचीनी सिर्फ गर्म मसाला ही नहीं, बल्कि एक जड़ी-बूटी भी है। यह दिमाग को तेज करने की बहुत अच्‍छी दवा है। रात को सोते समय नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी पाउडर को शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और दिमाग तेज होता है।

हल्दी :- 
हल्दी दिमाग के लिए बहुत अच्‍छी जड़ी-बूटी है। यह सिर्फ खाने के स्वाद और रंग में ही इजाफा नहीं करती है, बल्कि दिमाग को भी स्वस्थ रखने में मदद करती है। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में हुए शोध के अनुसार, हल्दी में पाया जाने वाला रासायनिक तत्व कुरकुमीन दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद करता है और इसके नियमित सेवन से एल्जाइमर रोग नहीं होता है।

जायफल :- 
दिमाग को तेज करने वाली जड़ी-बूटियों में जायफल भी एक उपयोगी जड़ी-बूटी है। गर्म तासीर वाले जायफल की थोड़ी मात्रा का सेवन करने से दिमाग तेज होता है। इसको खाने से आपको कभी एल्‍जाइमर यानी भूलने की बीमारी नहीं होती। भूलने वालों के लिए अत्यंत लाभप्रद है। 

अजवायन की पत्तियां :- 
अजवायन की पत्तियां खाने में सुगंध के अलावा शरीर को स्‍वस्‍थ बनाए रखने में भी मदद करती है। इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट दिमाग के लिए एक औषधि की तरह काम करता है।

केसर :- 
केसर एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग खाने में स्‍वाद बढ़ाने के सा‍थ-साथ अनिद्रा और डिप्रेशन दूर करने वाली दवाओं में किया जाता है। इसके सेवन से दिमाग तेज होता है।

लीवर आपका सही काम नहीं कर रहा है तो करे ये ‪‎उपाय‬




* लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्यर अंग है, यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्किपल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं।

* लीवर की खराबी होने का कारण ज्याबदा तेल खाना, ज्या दा शराब पीना और कई अन्यि कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं। हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है तब हमारे शरीर में क्यार क्याा बदलाव पैदा होते हैं यानी की लक्षण क्या हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता। वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो वे बिल्कुषल गलत हैं।

* क्या आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर की खराबी हो सकती है। क्यों चौंक गए ना?

* हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्याक आपका लीवर वाकई में खराब है। कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती, इसलिये आप सावधान रहें।

* मुंह से बदबू -यदि लीवर सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी। ऐसा इसलिये होता है क्योरकि मुंह में अमोनिया ज्याहद रिसता है।

* लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्किरन क्षतिग्रस्तो होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी। आंखों के नीचे की स्कि न बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्थन का असर साफ दिखाई पड़ता है।

* पाचन तंत्र में खराबी यदि आपके लीवर पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा।

* त्वंचा पर सफेद धब्बे यदि आपकी त्वैचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्बेा पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्पॉ ट के नाम से बुलाएंगे।

* यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है। यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है।

* यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्डितस हो सकता है। इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है।

* लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्वानद में बहुत खराब लगता है। यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है।

* जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्सहर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं।

* मानव पाचन तंत्र में लीवर एक महपत्वजपूर्ण हिस्सा। है। विभिन्नर अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्पादन शामिल हैं। लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं।

कुछ घरेलू उपाय
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* हल्दी= लीवर के स्वास्य् में सुधार करने के लिए अत्यं त उपयोगी होती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। इसलिए हल्दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं

* सेब का सिरका, लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है। सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्तेममाल कर सकते हैं- एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं। इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।

* आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है। अध्ययनों ने साबित किया है कि आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं। लीवर के स्वाधस्य्सा के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.

* पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए। हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें.

* सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर के स्वासस्य् ल को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है। अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं। आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं। सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा।

* लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसके इस्तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। फिर ठंड़ा होने पर छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं।

* फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्लोड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है। टोस्ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्तेछमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है

* एवोकैडो और अखरोट को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं। एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है।

* पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं। लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं

* सेब और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा, हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

* एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है , जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है . इसे भुई आंवला कहते है. इस पौधे को भूमि आंवला या भू- धात्री भी कहा जाता है .यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है.इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है.तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं .

* क्या आप जानते है ये यकृत ( लीवर ) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है . लीवर बढ़ गया है या या उसमे सूजन है तो यह पौधा उसे बिलकुल ठीक कर देगा. बिलीरुबिन बढ़ गया है , पीलिया हो गया है तो इसके पूरे पढ़े को जड़ों समेत उखाडकर , उसका काढ़ा सुबह शाम लें . सूखे हुए पंचांग का 3 ग्राम का काढ़ा सवेरे शाम लेने से बढ़ा हुआ बाईलीरुबिन ठीक होगा और पीलिया की बीमारी से मुक्ति मिलेगी . 

किडनी में creatinine और urea की समस्या का समाधान

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किडनी हमारे शरीर की सफाई करती हैं जिसमे मुख्या तौर पर ये क्रिएटिनिन और यूरिया शरीर से यूरिन के ज़रिये बाहर निकालती हैं, मगर हमारी दिनचर्या और बिगड़ती आदतो के कारण ये अपनी कार्य क्षमता खो देती हैं जिस कारण से इन ज़हरीले तत्वों को शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती और हमको भयंकर रोग लग जाते हैं। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे नुस्खे जिन से आपकी किडनी बिलकुल सही काम करने लग जाएगी। आप धैर्यपूर्वक इनका उपयोग करे। और दुसरो को भी बताये।

किडनी का क्रिएटिनिन और यूरिया का लेवल अगर बढ़ जाए तो आप कुछ उपचार करे जो बिलकुल निर्दोष हैं और 90% मरीजों को फायदा देते हैं।

चीनी और सफ़ेद नमक बिल्कुल बंद कर दे इसकी जगह शक्कर और सेंधा नमक इस्तेमाल करे।

सुबह खाली पेट लौकी का जूस निकाले 5-5 पत्ते तुलसी और पोदीने के डाल कर और इसको पिए।

100 ग्राम हरड़, 200 ग्राम बहेड़ा, और 300 ग्राम आंवला, इन सब का चूर्ण मिक्स करोगे तो ये त्रिफला चूर्ण बन जाएगा, अब इसमें 100 ग्राम गोखरू, और 300 ग्राम भूमि आंवला चूर्ण मिक्स कर ले। इस चूर्ण को 1-1 (5 gram) चम्मच सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ ले।

दिन में एक समय पीपल के 15 पत्ते ले इनको कूट कर 2 गिलास पानी में उबाले, आधा रहने पर इसको छान कर पिए। नाश्ते के आधे घंटे बाद ये करे।

इसके साथ में आप सुबह नाश्ते के पहले ज्वार का काढ़ा बना कर पिए। 10 ग्राम ज्वार को एक गिलास पानी में डाल कर उबाले आधा रहने पर इसको पिए।

और शाम के खाने के बाद पुनर्नवा का काढ़ा बना कर पिए। 5 ग्राम पुनर्नवा एक गिलास पानी में डाल कर उबाले और आधा रहने पर इसको छान कर पी ले।

एक टाइम के भोजन में सहजन की फली नियमित खाए। और भोजन में कड़ी पत्ता ज़रूर डाले। भोजन में दही का इस्तेमाल ज़रूर करे और दही में सेंधा नमक ज़रूर डाले।

भोजन में अलसी के तेल का इस्तेमाल करे।

जिन लोगो का dialyasis चल रहा हैं वह भी ये प्रयोग कर सकते हैं।

इसके साथ में आपको सुबह जल्दी उठ कर कपाल भाति प्राणायाम भी करना होगा।
ये सब करने के बाद आपको रिजल्ट एक से ३ महीने में मिल जाएगा। 
अगर आप डायलिसिस पर है तो आप प्राणायाम किसी शिक्षक की देख रेख में करे।

किडनी बेकार, जिंदगी नहीं

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किडनी बेकार, जिंदगी नहीं

बदलते लाइफस्टाइल से दूसरी बीमारियों के साथ-साथ किडनी खराब होने के मामले भी बढ़ रहे हैं। एक बार किडनी की बीमारी हो गई तो ज्यादातर लोग जिंदगी से हताश हो जाते हैं, जबकि सच यह है कि अगर सही से इलाज कराया जाए और पूरी सावधानियां बरती जाएं तो किडनी खराब होने के बाद भी मरीज लंबी ठीक-ठाक जिंदगी जी सकता है। इस बीमारी के बारे में एक्सपर्ट्स से बात करके पूरी जानकारी दे रहे हैं अनूप भटनागर:
एक्सपर्ट्स पैनल
डॉ. दीपांकर भौमिक, अडिशनल प्रफेसर, डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रॉलजी, एम्स
डॉ. एस. सी. तिवारी, डायरेक्टर, फोर्टिस इंस्टिट्यूट ऑफ रीनल साइंसेज
डॉ. शबाना आजमी, हेड, होम्योकेयर
रामनिवास पाराशर, चीफ एडवाइजर, वेदांता आयुर्वेद
अनीता लांबा, डायटीशियन
मोहन गुप्ता, एक्सपर्ट, नैचरोपैथी
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10 आम आदतें, जो किडनी खराब करती हैं:

1. पेशाब आने पर करने न जाना
2. रोज 7-8 गिलास से कम पानी पीना
3. बहुत ज्यादा नमक खाना
4. हाई बीपी के इलाज में लापरवाही बरतना
5. शुगर के इलाज में कोताही करना
6. बहुत ज्यादा मीट खाना
7. ज्यादा मात्रा में पेनकिलर लेना
8. बहुत ज्यादा शराब पीना
9. पर्याप्त आराम न करना
10. सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा ज्यादा लेना

नोट: किसी को भी दवाओं को लेकर एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहिए। बहुत-सी दवाएं, खासकर आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं में लेड और पोटैशियम ज्यादा मात्रा में होता है, जो किडनी के लिए बेहद नुकसानदेह साबित होता है।
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किडनी की बीमारी से बचने के उपाय - रोज 8-10 गिलास पानी पीएं। 
- फल और कच्ची सब्जियां ज्यादा खाएं। 
- अंगूर खाएं क्योंकि ये किडनी से फालतू यूरिक एसिड निकालते हैं। - मैग्नीशियम किडनी को सही काम करने में मदद करता है, इसलिए ज्यादा मैग्नीशियम वाली चीजें जैसे कि गहरे रंग की सब्जियां खाएं। 
- खाने में नमक, सोडियम और प्रोटीन की मात्रा घटा दें। 
- 35 साल के बाद साल में कम-से-कम एक बार ब्लड प्रेशर और शुगर की जांच जरूर कराएं। 
- ब्लड प्रेशर या डायबीटीज के लक्षण मिलने पर हर छह महीने में पेशाब और खून की जांच कराएं। 
- न्यूट्रिशन से भरपूर खाना, रेग्युलर एक्सरसाइज और वजन पर कंट्रोल रखने से भी किडनी की बीमारी की आशंका को काफी कम किया जा सकता है।
किडनी के मरीज खाने में रखें ख्याल किसी शख्स की किडनी कितना फीसदी काम कर रही है, उसी के हिसाब से उसे खाना दिया जाए तो किडनी की आगे और खराब होने से रोका जा सकता है :

1. प्रोटीन : 1 ग्राम प्रोटीन/किलो मरीज के वजन के हिसाब से लिया जा सकता है। नॉनवेज खानेवाले 1 अंडा, 30 ग्राम मछली, 30 ग्राम चिकन और वेज लोग 30 ग्राम पनीर, 1 कप दूध, 1/2 कप दही, 30 ग्राम दाल और 30 ग्राम टोफू रोजाना ले सकते हैं।

2. कैलरी : दिन भर में 7-10 सर्विंग कार्बोहाइड्रेट्स की ले सकते हैं। 1 सर्विंग बराबर होती है - 1 स्लाइस ब्रेड, 1/2 कप चावल या 1/2 कप पास्ता।

3. विटामिन : दिन भर में 2 फल और 1 कप सब्जी लें।

4. सोडियम : एक दिन में 1/4 छोटे चम्मच से ज्यादा नमक न लें। अगर खाने में नमक कम लगे तो नीबू, इलाइची, तुलसी आदि का इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए करें। पैकेटबंद चीजें जैसे कि सॉस, आचार, चीज़, चिप्स, नमकीन आदि न लें।

5. फॉसफोरस : दूध, दूध से बनी चीजें, मछली, अंडा, मीट, बीन्स, नट्स आदि फॉसफोरस से भरपूर होते हैं इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही लें। डॉक्टर फॉसफोरस बाइंडर्स देते हैं, जिन्हें लेना न भूलें।

6. कैल्शियम : दूध, दही, पनीर, टोफू, फल और सब्जियां उचित मात्रा में लें। ज्यादा कैल्शियम किडनी में पथरी का कारण बन सकता है।

7. पोटैशियम : फल, सब्जियां, दूध, दही, मछली, अंडा, मीट में पोटैशियम काफी होता है। इनकी ज्यादा मात्रा किडनी पर बुरा असर डालती है। इसके लिए केला, संतरा, पपीता, अनार, किशमिश, भिंडी, पालक, टमाटर, मटर न लें। सेब, अंगूर, अनन्नास, तरबूज़, गोभी ,खीरा , मूली, गाजर ले सकते हैं।

8. फैट : खाना बनाने के लिए वेजिटबल या ऑलिव ऑयस का ही इस्तेमाल करें। बटर, घी और तली -भुनी चीजें न लें। फुल क्रीम दूध की जगह स्किम्ड दूध ही लें।

9. तरल चीजें : शुरू में जब किडनी थोड़ी ही खराब होती है तब सामान्य मात्रा में तरल चीजें ली जा सकती हैं, पर जब किडनी काम करना कम कर दे तो तरल चीजों की मात्रा का ध्यान रखें। सोडा, जूस, शराब आदि न लें। किडनी की हालत देखते हुए पूरे दिन में 5-7 कप तरल चीजें ले सकते हैं।

10. सही समय पर उचित मात्रा में जितना खाएं, पौष्टिक खाएं।
खाने में इनसे करें परहेज - फलों का रस, कोल्ड ड्रिंक्स, चाय-कॉफी, नीबू पानी, नारियल पानी, शर्बत आदि। - सोडा, केक और पेस्ट्री जैसे बेकरी प्रॉडक्ट्स और खट्ट‌ी चीजें। - केला, आम, नीबू, मौसमी, संतरा, आडू, खुमानी आदि। - मूंगफली, बादाम, खजूर, किशमिश और काजू जैसे सूखे मेवे। - चौड़ी सेम, कमलककड़ी, मशरूम, अंकुरित मूंग आदि। - अचार, पापड़, चटनी, केचप, सत्तू, अंकुरित मूंग और चना। - मार्केट के पनीर के सेवन से बचें। बाजार में मिलने वाले पनीर में नींबू, सिरका या टाटरी का इस्तेमाल होता है। इसमें मिलावट की भी गुंजाइश रहती है।

कैसे तैयार करें खाना- - वेजिटेबल ऑयल और घी आदि बदल-बदल कर इस्तेमाल करें। - घर पर ही नीबू के बजाय दही से डबल टोंड दूध फाड़कर पनीर बनाएं। - खाना पकाने से पहले दाल को कम-से-कम दो घंटे और सब्जियों को एक घंटे तक गुनगुने पानी में रखें। इससे उनमें पेस्टिसाइड्स का असर कम किया जा सकता है। -महीने में एकाध बार लीचिंग प्रक्रिया अपनाकर घर में छोले और राजमा भी खा सकते हैं, पर इसकी तरी के सेवन से बचें। -नॉनवेज खानेवाले रेड मीट का सेवन नहीं करें। चिकन और मछली भी एक सीमित मात्रा में ही खाएं। -रोजाना कम-से-कम दो अंडों का सफेद हिस्सा खाने से जरूरी मात्रा में प्रोटीन मिलता है।

शुरुआती लक्षण - पैरों और आंखों के नीचे सूजन - चलने पर जल्दी थकान और सांस फूलना - रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना - भूख न लगना और हाजमा ठीक न रहना - खून की कमी से शरीर पीला पड़ना

नोट: इनमें से कुछ या सारे लक्षण दिख सकते हैं।

देर से पता लगती है बीमारी

पहली स्टेज: पेशाब में कुछ गड़बड़ी पता चलती है लेकिन क्रिएटनिन और ईजीएफआर (ग्लोमेरुलर फिल्टरेशन रेट) सामान्य होता है। ईजीएफआर से पता चलता है कि किडनी कितना फिल्टर कर पा रही है।

दूसरी स्टेज: ईजीएफआर 90-60 के बीच में होता है लेकिन क्रिएटनिन सामान्य ही रहता है। इस स्टेज में भी पेशाब की जांच में प्रोटीन ज्यादा होने के संकेत मिलने लगते हैं। शुगर या हाई बीपी रहने लगता है।

तीसरी स्टेज: ईजीएफआर 60-30 के बीच में होने लगता है, वहीं क्रिएटनिन भी बढ़ने लगता है। इसी स्टेज में किडनी की बीमारी के लक्षण सामने आने लगते हैं। अनीमिया हो सकता है, ब्लड टेस्ट में यूरिया ज्यादा आ सकता है। शरीर में खुजली होती है। यहां मरीज को डॉक्टर से सलाह लेकर अपना लाइफस्टाइल सुधारना चाहिए।

चौथी स्टेज: ईजीएफआर 30-15 के बीच होता है और क्रिएटनिन भी 2-4 के बीच होने लगता है। यह वह स्टेज है, जब मरीज को अपनी डायट और लाइफस्टाइल में जबरदस्त सुधार लाना चाहिए नहीं तो डायैलसिस या ट्रांसप्लांट की स्टेज जल्दी आ सकती है। इसमें मरीज जल्दी थकने लगता है। शरीर में कहीं सूजन आ सकती है।

पांचवीं स्टेज : ईजीएफआर 15 से कम हो जाता है और क्रिएटनिन 4-5 या उससे ज्यादा हो जाता है। फिर मरीज के लिए डायैलसिस या ट्रांसप्लांट जरूरी हो जाता है।

नोट: शुरुआती स्टेज में किडनी की बीमारी को पकड़ना बहुत मुश्किल है क्योंकि दोनों किडनी के करीब 60 फीसदी खराब होने के बाद ही खून मे क्रिएटनिन बढ़ना शुरू होता है।

क्या है इलाज
इस बीमारी के इलाज को मेडिकल भाषा में रीनल रिप्लेसमेंट थेरपी (RRT) कहते हैं। किडनी खराब होने पर फाइनल इलाज तो ट्रांसप्लांट ही है, लेकिन इसके लिए किडनी डोनर मिलना मुश्किल है, इसलिए इसका टेंपररी हल डायैलसिस है। यह लगातार चलनेवाले प्रोसेस है और काफी महंगा है।

क्या है डायैलसिस 
खून को साफ करने और इसमें बढ़ रहे जहरीले पदार्थों को मशीन के जरिए बाहर निकालना ही डायैलसिस है। 

डायैलसिस दो तरह की होती है:

1. हीमोडायैलसिस : सिर्फ अस्पतालों में ही होती है। तय मानकों के तहत अस्पताल में किसी मरीज की हीमोडायैलसिस में चार घंटे लगते हैं और हफ्ते में कम-से-कम दो बार इसे कराना चाहिए। इसे बढ़ाने या घटाने का फैसला डॉक्टर ही कर सकते हैं।

2. पेरीटोनियल : पानी से डायैलसिस घर पर की जा सकती है। इसके लिए पेट में सर्जरी करके वॉल्व जैसी चीज डाली जाती है। इसका पानी भी अलग से आता है। डॉक्टर घर में किसी को करना सिखा देते हैं। यह थोड़ी कम खर्चीली है लेकिन इसमें सफाई का बहुत ज्यादा ध्यान रखना होता है, वरना इन्फेक्शन हो सकता है।

कैसे होती है हीमोडायैलसिस इमरजेंसी में मरीज की गर्दन के निचले हिस्से में कैथेटर डालकर या फिर जांघ की ब्लड वेसल्स में फेमोरल प्रक्रिया से डायैलसिस की जाती है। 
रेग्युलर डायैलसिस के लिए मरीज की बाजू में सर्जरी करके 'एवी फिस्टुला' बनाया जाता है ताकि बगैर किसी परेशानी के डायैलसिस की जा सके। एवी फिस्टुला में आर्टरी को नाड़ी से जोड़ा जाता है। इस तरह से बनाए गए फिस्टुला को काम करने लायक होने में 8 हफ्ते लगते हैं। 
फिस्टुला डायैलसिस कराने वाले मरीजों की लाइफलाइन है, इसलिए इसकी हिफाजत बहुत जरूरी है। ध्यान रखें कि जिस हाथ में फिस्टुला बना है, उससे न तो बीपी नापा जाए और न ही जांच के लिए खून निकाला जाए। इस हाथ में इंजेक्शन भी नहीं लगवाना चाहिए। यह हाथ न तो दबना चाहिए और न ही इससे भारी सामान उठाना चाहिए। 
अगर एवी फिस्टुला सही समय पर बन जाए तो मरीज के लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है।

कितना हो फर्क 
किडनी की समस्या से जूझ रहे मरीज की हफ्ते में 8 से 12 घंटे डायैलसिस होनी चाहिए। चूंकि आमतौर पर एक बार में चार घंटे की डायैलसिस होती है, इसलिए मरीज की सेहत को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर उसे हफ्ते में दो बार या हर तीसरे/ दूसरे दिन डालसिसिस कराने की सलाह देते हैं। मरीज को अपनी मर्जी से दो डायैलसिस के बीच का फर्क नहीं बढ़ाना चाहिए 
क्योंकि ऐसा करने पर कभी-कभी बड़ी परेशानी पैदा हो जाती है और मरीज आईसीयू तक में पहुंच जाता है।

खर्च 
एक डायैलसिस पर 2000 से 3000 रुपये खर्च आता है। महीने में 8-10 डायैलसिस कराने पर करीब 25 से 30 हजार रुपये खर्च होते हैं। सरकारी अस्पतालों में डायैलसिस मशीनें और डायैलसिस करने वाले ट्रेंड कर्मी जरूरी संख्या में नहीं हैं। जो मरीज वहां भर्ती हैं, सिर्फ उन्हीं को डायैलसिस की सुविधा मिलती है। डायैलसिस मेडिक्लेम में कवर है।

ध्यान दें: दिल्ली सरकार छह अस्पतालों में 120 डायैलसिस मशीनें लगा रही है। इनमें गरीबी की रेखा से नीचे जिंदगी गुजारनेवालों की मुफ्त डायैलसिस होगी, जबकि आम जनता को इसके लिए 1073 रुपये देने होंगे।
ये अस्पताल हैं: 1. राजीव गांधी सुपर स्पेशलिटी स्पिटल, ताहिलपुर 2. डॉ. हेड़गेवार आरोग्य संस्थान, कड़कड़डूमा 3. जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, जनकपुरी 4. भगवान महावीर हॉस्पिटल, पीतमपुरा 5. पं. मदन मोहन मालवीय हॉस्पिटल, मालवीय नगर 6. लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल, दिल्ली गेट

खून की नियमित जांच जरूरी 
- डायैलसिस कराने वाले मरीजों को महीने में कम-से-कम एक बार खून की जांच (KFT) करानी चाहिए। इस जांच से मरीज के शरीर में हीमोग्लोबीन, ब्लड यूरिया, क्रिएटनिन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और सोडियम की मात्रा का पता लगता है।

- हालात के अनुसार समय-समय पर डॉक्टर मरीज के खून की जांच के जरिए शरीर में पीटीएच, आयरन और बी-12 आदि की भी जांच करते हैं। - हर डायैलसिस यूनिट अपने मरीजों से हर छह महीने पर एचआईवी, हैपेटाइटिस बी और सी के लिए खून की जांच कराने का अनुरोध करती है।
- अगर किसी मरीज की रिपोर्ट से उसके एचआईवी, हैपेटाइटिस बी या सी से प्रभावित होने का संकेत मिलता है तो उसकी डायैलसिस में खास सावधानी बरती जाती है। ऐसे मरीज की डायैलसिस में हर बार नए डायैलजर का इस्तेमाल होता है ताकि कोई दूसरा मरीज इस इन्फेक्शन की चपेट में न आ सके।

बरतें ये सावधानियां 
- डायैलसिस कराने वालों को लिक्विड चीजें कम लेनी चाहिए। किडनी खराब होने पर खून की सफाई के प्रॉसेस में रुकावट आती है और आमतौर पर मरीज को पेशाब भी कम आने लगता है, इसलिए उन्हें सीमित मात्रा में लिक्विड चीजें लेनी चाहिए।
- लिक्विड चीजों में पानी के अलावा दूध, दही, चाय, कॉफी, आइसक्रीम, बर्फ और दाल-सब्जियों की तरी भी शामिल हैं। यही नहीं, रोटी, चावल और ब्रेड आदि में भी पानी होता है।
- लिक्विड पर कंट्रोल रखने से दो डायैलसिस के बीच में मरीज का वजन (जिसे वेट गेन या वॉटर रिटेंशन भी कहते हैं) अधिक नहीं बढ़ता। दो डायैलसिस के बीच में ज्यादा वजन बढ़ने से डायैलसिस का प्रॉसेस पूरा होने पर कई बार कमजोरी या चक्कर आने की शिकायत भी होने लगती है।
- किडनी के मरीज को डायटीशियन से भी जरूर मिलना चाहिए क्योंकि इस बीमारी में खानपान पर कंट्रोल बहुत जरूरी है।
- किडनी के जो मरीज डायैलसिस पर नहीं हैं, उन्हें कम प्रोटीन और डायैलसिस कराने वाले मरीजों को ज्यादा प्रोटीन की जरूरत होती है। लेकिन खानपान की पूरी जानकारी डायट एक्सपर्ट ही दे सकते हैं।
- डायैलसिस कराने वाले शख्स को कोई भी दवा लेने से पहले अपने किडनी एक्सपर्ट (नेफ्रॉलजिस्ट) से सलाह जरूरी है। नोट: किडनी की बीमारी सुनकर जिंदगी खत्म होने की बात सोचना गलत है क्योंकि अगर खानपान और रुटीन में सावधानी बरती जाए तो डायैलसिस कराते हुए भी लंबी जिंदगी का आनंद लिया जा सकता है। मरीज को घर-परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों का पूरा साथ मिलना जरूरी है ताकि वह उलट परिस्थितियों का ज्यादा संयम के साथ सामना कर सके।
लिक्विड का सेवन ऐसे कम करें 

डायैलसिस कराने वाला शख्स नीचे लिखे तरीकों से लिक्विड का सेवन कम कर सकता है:
- गर्मियों में 500 एमएल की कोल्ड ड्रिंक की बोतल में पानी भरके उसे फ्रीजर में रख लें। यह बर्फ बन जाएगा और फिर इसका धीरे-धीरे सेवन करें।
- फ्रिज में बर्फ जमा लें और प्यास लगने पर एक टुकडा मुंह में रखकर घुमाएं और फिर उसे फेंक दें।
- गर्मियों में रुमाल भिगोकर गर्दन पर रखने से भी प्यास पर काबू पाया जा सकता है।
- घर में छोटा कप रखें और उसी में पानी लेकर पीएं।
- खाना खाते समय दाल और सब्जियों की तरी का सेवन कम-से-कम करने की कोशिश करें।

आयुर्वेद
बीमारी की वजह के आधार पर ही जरूरी दवा खाने की सलाह दी जाती है:
- चूंकि किडनी का काम शरीर में खून की सफाई करना और जहरीली चीजों को बाहर निकालना होता है। इलाज के दौरान मरीज के खानपान को सुधारने के साथ ही उसके बीपी और शुगर को कंट्रोल में रखने पर खास ध्यान दिया जाता है।
- वरुण, पुनर्नवा, अर्जुन, वसा, कातुकी, शतावरी, निशोध, कांचनार, बाला, नागरमोथा, भबमिआमलकी, सारिवा, अश्वगंधा और पंचरत्नमूल आदि दवाओं का इस्तेमाल किडनी के इलाज में किया जाता है।
- किडनी की बीमारी का लगातार इलाज जरूरी है और यह ताउम्र चलता है। किडनी की बीमारी का इलाज से ज्यादा मैनेजमेंट होता है।

होम्यॉपथी 
लक्षणों के आधार पर कॉलि-कार्ब 200, एपिस-मेल-30, एसिड बेंजोक, टेरीबिंथ,बर्बेरिस वल्गरीस, लेसीथिन, फेरम मेट और चाइना जैसी दवाएं दी जाती हैं। थकान और कमजोरी दूर करने के लिए अल्फाल्फा टॉनिक भी दिया जाता है।

नोट: होम्यॉपथी डायैलसिस बंद कराने में सक्षम नहीं है लेकिन यह ऐसे मरीजों की सहायक जरूर है। ऐलोपैथी दवाओं के साथ ही होम्योपैथी दवाओं के सेवन से मरीज ज्यादा सेहतमंद रह सकता है।

नेचरॉपथी 
- किडनी की क्षमता बढ़ाने के लिए नेचरोपैथी में मरीद को सलाद, फल आदि कुदरती चीजें लेने को कहा जाता है। इससे किडनी की सफाई शुरू होती है और उसे आराम भी मिलता है।
- किडनी की जगह पर सूती कपड़े की पट्टी को ताजे पानी में भिगोकर रोजाना आधे घंटे लगाते हैं। ऐसा करने से किडनी की तरफ के शरीर का तापमान कम होता है और उस ओर खून का दौरा बढ़ता है।
- इसी तरह किडनी की जगह पर गर्म और ठंडे पानी से सिकाई करते हैं। इसे भी रोजाना आधे घंटे के लिए कर सकते हैं। इससे किडनी में खून का दौरा बढ़ता है।
- धूप स्नान के जरिए सुबह-सुबह किडनी पर सूरज की सीधी किरणों से इलाज किया जाता है और किडनी की सफाई होती है।
- मरीज को एक टब में बिठाकर उसकी नाभि तक पानी रखा जाता है। यह क्रिया आधे घंटे तक की जाती है। कटिस्नान से भी किडनी की ओर खून का दौरा बढ़ता है।

योग
- रोजाना कम-से-कम 20 मिनट तक अनुलोम-विलोम करना चाहिए।
- गलत लाइफस्टाइल और बुरी आदतों को छोड़ दें तो किडनी के साथ-साथ दूसरी बीमारियों से भी बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

किडनी ट्रांसप्लांट
किडनी खराब होने का परमानेंट इलाज ट्रांसप्लांट के जरिए ही मुमकिन है।
कहां होता है: सरकारी अस्पतालों में एम्स और आरएमएल के अलावा सर गंगाराम, मैक्स, अपोलो, फोर्टिस, रॉकलैंड और बी. एल. कपूर आदि प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी ट्रांसप्लांट होता है।
कितना खर्च: किडनी किसी ब्रेन डेड शख्स की ली जाती है तो सरकारी अस्पताल में करीब 2 लाख रुपये तक वरना 7-8 लाख रुपये तक खर्च आता है। अगर किडनी देने वाले और लेनेवाले का ब्लड ग्रुप मैच नहीं करता तो खर्च बहुत बढ़ जाता है।

क्या हैं नियम: ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट कानून में उन लोगों की जानकारी दी गई है, जो अंग दान कर सकते हैं। डोनेशन के प्रॉसेस के तहत एक समिति दानकर्ता से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विचार करती है। इस प्रॉसेस की वीडियोग्राफी भी की जाती है ताकि डोनर से संबंधित सारे फैक्ट्स रिकार्ड में रहें। आमतौर पर ब्लड रिलेशन वाले लोगों को अंगदान के लिए सबसे सही माना जाता है।

कैसे होता है: ट्रांसप्लांट के प्रोसेस के दौरान मरीज और डोनर के ब्लड ग्रुप से लेकर टिश्यू मैचिंग तक कई टेस्ट करके यह तय किया जाता है कि डोनर मरीज के लिए सही है या नहीं। ट्रांसप्लांट के बाद हालांकि डोनर कुछ ही दिनों में सामान्य जीवन जीने लगता है लेकिन मरीज को काफी सावधानी बरतनी होती है। मरीज को ट्रांसप्लांट के बाद दूसरे लोगों से अलग रखा जाता है ताकि उसे किसी तरह का इन्फेक्शन न हो। अस्पताल से घर पहुंचने पर भी कुछ महीने परिवार के सदस्यों से भी दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती ह। इन्फेक्शन से बचने के लिए हमेशा मुंह पर पटटी लगा कर रखनी होती है। किसी के भी कॉन्टैक्ट में आने पर फौरन हाथ साफ करने होते हैं। किडनी एक्सपर्ट की देखरेख में हमेशा दवाएं खानी होती हैं और जांच भी करानी होती है।

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