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जानकारी 02 दूध में हल्दी मिलाएँ और इन तीन रोगों से निजात पाएँदूध में हल्दी मिलाएँ और इन तीन रोगों से निजात पाएँ

    यदि आप रोज सादा दूध पीते है तो आज से ही उसमे हल्दी मिलाना चालू कर दिजिये. हल्दी कई रोगों का नाश करती है और दूध में भी कई पोष्टिक तत्व होते है और जब इन दोनों को मिला दिया जाता है तो फायदे ही फायदे होते है. आइए जाने इन फायदे के बारे में...   खांसी में राहत: खांसी में कफ की समस्या होने पर एक गिलास गर्म दूध में एक-चौथाई चम्मच हल्दी मिलाकर पीना फायदेमंद है. पुरानी खांसी या अस्थमा के लिए आधा चम्मच शहद में एक-चौथाई चम्मच हल्दी अच्छी तरह मिलाकर चाटने से आराम मिलता है. चोट और सूजन के इलाज में सहायक: एक गिलास गर्म दूध में एक टी-स्पून हल्दी मिलाकर पीने से चोट के दर्द और सूजन में राहत मिलती है. चोट पर हल्दी और पानी का लेप लगाने से आराम मिलता है. आधा लीटर गर्म पानी, आधा चम्मच सेंधा नमक और एक चम्मच हल्दी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं. इस पानी में एक कपड़ा डाल कर निचोड़ लें और चोट वाली जगह पर इससे सिंकाई करें. टाइप 2 के मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद: हल्दी में मौजूद कुरकूमिन ब्लड शुगर को कम करता है और ग्लूकोज के चयाचपय को बढ़ाकर मधुमेह को नियंत्रित रखता है. दिन में भोजन के साथ आधा-आधा चम्मच हल्दी पाउडर के सेवन से आराम मिलता है.
    यदि आपकी पत्नी अपनी सेक्स लाइफ से संसुष्ट नहीं है और इसका कारण आपकी यौन कमजोरी है तो फिक्र मत कीजिए. आज हम आपको तीन ऐसे नायाब और कारगर नुस्खे बताएँगे जिसका प्रयोग कर आपकी पत्नी बिस्तर पर सदा खुश रहेगी. 1. लगभग 10-10 ग्राम सफेद प्याज का रस और शहद, 2 अंडे की जर्दी और 25 मिलीलीटर शराब को एक साथ मिलाकर रोजाना शाम के समय लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है. 2. लगभग 5 बादाम की गिरी, 7 कालीमिर्च और 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा जरूरत के अनुसार मिश्री को एक साथ मिलाकर पीस लें और फंकी लें। इसके ऊपर से दूध पी लें. इस क्रिया को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से संभोगक्रिया के समय जल्दी वीर्य निकलने की समस्या दूर हो जाती है. 3. उड़द की दाल को पानी में पीसकर पिट्ठी बनाकर कढ़ाई में लाल होने तक भून लें. इसके बाद गर्म दूध में इस पिसी हुई दाल को डालकर खीर बना लें. अब इसमें मिश्री मिलाकर किसी कांसे या चांदी की थाली में परोसकर सेवन करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है. इस खीर को लगभग 40 दिनों तक प्रयोग करने से लाभ होता है.
    संभोगक्रिया के समय बहुत से पुरुष अपनी बीवियों को सेक्स के अलग-अलग आसनों को प्रयोग करने की प्रयोगशाला बना देते हैं. पुरुष अक्सर किताबों या फिल्मों में सेक्स करने के अलग-अलग तरीकों को देखकर अपनी पत्नी के साथ भी उसी तरह सेक्स करने के लिए जोर डालते हैं. लेकिन सेक्स करने के यह तरीके या आसन जो दिखाए जाते हैं उनको करना लगभग नामुनकिन होता है. इन अलग-अलग आसनों को करते समय या संबंध बनाते समय पुरुष इस कदर उत्तेजित हो जाते हैं कि उसके लिए संबंध बनाए रखना मुश्किल हो जाता है जिसकी वजह से वे शीघ्र स्खलित हो जाते हैं. पत्नी को भी ऐसा महसूस होता है कि उसका पति तो उसे किसी खिलौने की तरह प्रयोग कर रहा है जिसके कारण वह शारीरिक और दिमागी रूप से पीड़ित रहने लगती है. वैसे भी सेक्स संबंधों का जितना आनंद सामान्य आसन से मिलता है उतना अलग-अलग आसनों का प्रयोग करने से नहीं मिलता. बहुत से विद्वानों का कहना है कि जो व्यक्ति सामान्य आसनों का प्रयोग करके सेक्स संबंधों का आनंद उठा रहा है उन्हें भूलकर भी अलग-अलग आसनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए. इसके लिए सबसे अच्छा आसन है कि संभोगक्रिया के समय पत्नी को नीचे और पति को उसके ऊपर लेटना चाहिए. इस आसन को करते समय पुरुष का लिंग बहुत ही आसानी के स्त्री की योनि में प्रवेश कर जाता है और पुरुष संभोग के समय स्त्री के चेहरे के भावों को पढ़ सकता है. विराम के समय स्त्री के शरीर पर निश्चल लेटने से एक अनोखा सुख प्राप्त होता है. इसके बाद सिर्फ विपरीत रति वाले आसन को ही अच्छा माना गया है. इस आसन में पति नीचे लेटता है और पत्नी उसके ऊपर लेटती है. इसमें शरीर संचालन स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर कर सकते हैं. इस आसन में भी सारी स्थितियां पहले आसन के ही जैसी होती हैं लेकिन विराम के समय आराम का सुख स्त्री को ही मिलता है. इन दोनों आसनों की खासियत यह है कि इसमें जब तक संभोगक्रिया चलती है तब तक बिना किसी परेशानी के चलती है. दूसरे किसी आसन में यह सुविधा नजर नहीं आती है. बाकी सारे आसनों में जो कमी नजर आती है वह यह है कि उनमें संभोग और विराम काल में स्त्री-पुरुष एक-दूसरे के सीने से लगकर आनंद नहीं उठा पाते. दूसरे आसनों में लिंग योनि में इतनी आसानी से प्रवेश नहीं कर पाता जितनी आसानी से पहले वाले आसन में हो जाता है. कई बार लिंग को योनि में प्रवेश कराने से पुरुष की उत्तेजना इतनी बढ़ जाती है कि योनि में प्रवेश के साथ ही पुरुष का वीर्य निकल जाता है. इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि जो व्यक्ति शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त होता है उन्हें पहले वाले आसन में ही संभोग करना चाहिए.
     आइये आज हम आपको बता दे की बासी खाना खाने से हमें किन-किन परेशानीयों का सामना करना पड़ता है. 1. लगातार बासी खाना खाने से फूड प्‍वाइज़न होने का खतरा बना रहता है. फ्रिज में रखा खाने में बैक्टेरिया की सम्भावना न के बराबर होती है लेकिन बाहर रखने पर बैक्‍टीरिया होने के चान्सेस काफी बढ़ जाता हैं. जिससे फूड प्‍वाइज़निंग हो सकती है. 2. बासी खाने में बैक्‍टीरिया होता है जिसे खाने से पेट की कई समस्या पैदा हो सकती है साथ ही पाचन क्रिया में परेशानी आती है इसलिए बासी खाने से दूर ही रहे.  3. बासी खाना खाने की आदत को बंद कर दें. इससे एसिडिटी की भी समस्या हो सकती है.  4. 1-2 दिन पुराना खाना बिल्कुल नहीं खाना चाहिए इससे उल्‍टियां या पेट से सम्बंधित कई समस्या पैदा हो सकती है इसलिए ताजा खाना ही खाए. 5. क्या आप जानते है डायरिया की समस्या इसी कारणों से होती है, इसलिये ताजा खाना खाने की आदत डाले.  6. पेट में दर्द, पेट में गैस और एसिडिटी इसी कारणों से होता है इसलिए फ्रिज का या बहार रखा खाना ना खाएं.
    लौंग में प्रोटीन, आयरन, कार्बोहायड्रेट, कैल्शियम, फास्फोरस, सोडियम, हाइड्रोकोलिक एसिड, मैग्नीशियम, फाइबर, विटामिन A और C पाया जाता है. लौंग में वोलेटाइल आयल पाए जाते हैं जिनका हिस्सा eugenol नामक कॉम्पोनेन्ट होता है जो एंटीइन्फ्लेमेटरी और दर्द में आराम देने वाला होता है. Eugenol के कारण लौंग में अरोमा होता है. लौंग में Flavonoids पाए जाते हैं जो एंटीइन्फ्लेमेटरीऔर एंटीऑक्सीडेंट होता है. लौंग का तेल दांत के दर्द में लगाने से आराम मिलता है. दांत के इन्फेक्शन को दूर भगाने में लौंग बहुत सहायक है. इसमें पाया जाने वाला Eugenol ब्लड शुगर लेवल सुधारता है. सुबह नियमित रूप से खाली पेट लौंग का पाउडर पानी के साथ लेना फायदेमंद होता है. लौंग का पाउडर सुबह खाली पेट पानी के साथ लेने से कोलेस्ट्रोल लेवल में सुधार होता है. पेट में कीड़े होने पर लौंग को पानी में उबाल कर पीने से कीड़े समाप्त हो जाते हैं. मुँह की दुर्गन्ध दूर करने के लिए लौंग के उबले पानी से गार्गल करना अच्छा रहता है. लौंग को खाना खाने के बाद खाना चाहिए जिससे पाचन क्रिया सुचारू रूप से होती है. लौंग खाने से एसिडिटी न हो इसके लिए लौंग खाने के एक घंटे तक कुछ खाना नहीं चाहिए. केवल पानी पीना चाहिए.
    इंटरनेट पर मौजूद शुल्क मुक्त अश्लील सामग्री (पोर्न) के लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव पर किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, सेक्स के लती व्यक्तियों में यह अश्लील सामग्री सेक्स को और भड़का देता है. अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि सेक्स व्यसन से ग्रस्त व्यक्ति अपने अन्य साथियों की अपेक्षा सेक्स की नई-नई छवियां तलाशते रहते हैं. कैंब्रिज विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने यह भी बताया कि सेक्स के लती व्यक्ति सामान्य छवियों की अपेक्षा सेक्स छवियों वाले वातावरण से ज्यादा प्रभावित होते हैं. मनोचिकित्सा विज्ञान विभाग में चिकित्सक वालेरी वून ने बताया, "अमूमन हम सभी इंटरनेट पर हमें उत्तेजित या प्रभावित करने वाली नई-नई चीजें खोजते हैं, चाहे वह खबरों की एक वेबसाइट से दूसरी वेबसाइट पर जाना हो या फेसबुक से अमेजॉन या यूट्यूब पर लौटना." वून ने कहा, "लेकिन सेक्स के प्रति अत्यधिक रुचि रखने वाले व्यक्तियों के मामले में यह आदत उनके नियंत्रण से बाहर चली जाती है और उनका पूरा ध्यान नई-नई अश्लील चित्रों और साइटों पर रहता है." वास्तव में सेक्स की लत सामान्य-सी बात है. यह लत चार फीसदी युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं. वेलकम ट्रस्ट द्वारा वित्तपोषित इस अध्ययन में वून और उनके सहयोगियों ने सेक्स के लती 22 पुरुषों और 40 सामान्य पुरुषों के व्यवहार का अध्ययन और विश्लेषण किया. पहले कार्य में प्रतिभागियों को ऐसी तस्वीरें दिखाई गईं, जिनमें नग्न महिलाओं, कपड़े पहने हुई महिलाओं और फर्नीचर की तस्वीरें शामिल थीं. इसके बाद उन्हें अन्य तस्वीरें दिखाई गईं, जिसमें पहले दिखाई गई तस्वीरों से संबद्ध और बिल्कुल नई तस्वीरें शामिल थीं और उनसे कहा गया कि वे उनमें से एक तस्वीर चुनकर एक पाउंड राशि जीत सकते हैं। हालांकि प्रतिभागियों को यह नहीं बताया कि उनके जीतने की संभावना 50 फीसदी ही थी. अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सेक्स के लती पुरुषों ने अधिकतर बिल्कुल नई तरह की नग्न तस्वीरें चुनीं. अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सेक्स के लती व्यक्ति जब सेक्स से जुड़े एक जैसे चित्र देखते हैं तो उनके मस्तिष्क के एक विशेष हिस्से की गतिविधि में गिरावट आती है. मस्तिष्क का यह हिस्सा इनाम मिलने की आशा होने और नई चीजों के प्रति सक्रिय हो उठता है.
    सेक्स के बाद औरत के कूल्हे और स्तनों का वजन क्यों बढ़ जाता है, इसके कोई मनोवैज्ञानिक कारण नहीं है. यह एक आम धारणा है कि सेक्शुअल रिलेशन की शुरुआत होते ही महिलाओं के हिप्स और ब्रेस्ट का वजन बढ़ जाता है. हालांकि, यह एक पूर्ण मिथक है. दरअसल, यह परेशानी उन लड़कियों में ज्यादा देखी जाती है, जिनकी शादी होने वाली होती है या शादी हुए कुछ महीने ही हुए हैं. इसलिए वे इससे निपटने के उपाय तलाशने लगती हैं. सेक्स से शारीरिक सेहत और मानसिक सेहत दोनों को फायदा होता है. कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि शादी के बाद वजन बढ़ जाता है. यह बात पुरुष और महिला, दोनों पर लागू होती है. माना जाता है कि कई में महिलाओं के खून में स्पर्म आत्मसात हो जाता है और वह बाहर नहीं निकल पाता लेकिन २-3 मिलीलीटर स्पर्म से मात्र 15 कैलोरी बढ़ती हैं. इसलिए सेक्स को मनोवैज्ञानिक रूप से वजन बढ़ने का सही तथ्य नहीं माना गया है. बेहतर सेक्स हेल्थ का सीधा असर फिजिकल हेल्थ पर पड़ता है। विल्किस यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट्स के मुताबिक हफ्ते में एक या दो बार सेक्स करने से इम्यूनोग्लॉबिन नाम के एंटीबॉडी में बढ़ोतरी होती है. अगर आप चाहते हैं कि शादी के बाद भी फिगर का संतुलन बना रहे तो रेगुलर एक्सरसाइज करें और हेल्दी डाइट को मेंटेन करें.
    अक्सर लोग नार्मल सेक्स के समय तो कंडोम का उपयोग कर लेते है लेकिन जब ओरल सेक्स करते है तो कोई सुरक्षा नहीं बरतते है. नतीजन उन्हें किसी छुआ छूत की बिमारी से ग्रसित होना पढता है. इसलिए अगर आप सेफ ओरल सेक्स चाहते हैं तो उसके लिए जरूरी है कि आप कंडोम का सही इस्तेमाल करें. हालांकि पुरूषों के लिए जहां ओरल सेक्स के लिए अलग कंडोम आता है वहीं महिलाओं के लिए ओरल सेक्‍स के लिए डेंटल डैम आता है. कंडोम के उपयोग से आप एचआईवी एड्स, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस और किसी भी होने वाले अन्य इंफेक्‍शन या वायरस से बच सकते हैं. इतना ही नहीं, सीमन के मुंह में जाने से ना सिर्फ आपकी जीभ का टेस्ट खराब हो सकता है बल्कि सीमन बहुत देर तक मुंह में रहने से आपकी जीभ सुन्न भी हो सकती है. दिलचस्प बात ये है कि डेंटल डैम को लगाने या फिर पुरूषों के लिए ओरल सेक्स के लिए मौजूद कंडोम के उपयोग के दौरान आपके ओरल सेक्स में कोई बाधा नहीं होगी बल्कि आप ओरल सेक्स को बिना किसी घृणा के अधिक एन्जॉय कर सकते हैं.
    बाजार से ख़रीदे गए पाउडर वाले मंजन में कई तरह के केमिकल्स मिक्स हो सकते है जो आपके दाँतों के अलावा आपके शारीर को भी नुक्सान पंहुचा सकते है. ऐसे में घर पर ही पाउडर वाला मंजन बनना एक अच्छा आईडिया होगा. कैसे बनाए: सामग्री: 3 टेबलस्पून बेंटोनाइट मिट्टी, 2 टेबलस्पून बेकिंग सोड़ा, 1 टेबलस्पून पुदीने की सूखी पत्तियों का चूर्ण, ½ टेबलस्पून दालचीनी पावडर, ½ टेबलस्पून लौंग पावडर. विधि: आप पुदीना, दालचीनी और लौंग के स्थान पर उनके तेलों का उपयोग भी कर सकते हैं. परन्तु इससे आपके टूथपावडर को कोई द्रव्यमान नहीं मिलेगा. इसके अलावा लौंग और दालचीनी का पावडर मिलाकर पावडर के खुरदुरेपन को बढ़ाते हैं. अत: अच्छा होगा कि इनका पावडर के रूप में उपयोग करें. सभी घटकों को एक कटोरी में मिलाएं तथा कांच के एक मर्तबान में भर लें. धातु के बर्तन का उपयोग न करें. इस्तेमाल कैसे करें: इसका उपयोग दो तरीकों से किया जा सकता है. या तो परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए अलग मर्तबान रखें ताकि वे अपना टूथब्रश उसमें डुबा सकें. या मर्तबान में प्लास्टिक का एक चम्मच रखें तथा लगभग एक चौथाई टी स्पून पावडर लेकर उसे गीले ब्रश पर छिडकें तथा फिर ब्रश करें.
    क्या आप जानते हैं कि कॉफी आपके मस्तिष्क में बारीक बदलाव लाती है? एक शोधकर्ता ने 18 महीने तक अपने दिमाग का एमआईआई स्कैन किया, जिसमें ऐसे बदलाव दिखे जो इससे पहले नहीं देखे गए थे. स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शोधकर्ता पोल्ड्रेक ने लगभग डेढ़ साल तक मस्तिष्क पर अध्ययन किया. वहीं दो सप्ताह के बीच उन्होंने मस्तिष्क संचार के अलग-अलग हिस्सों में 'कन्नेक्टोम' में परिवर्तन की सूचना मिली. एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिस दिन पोल्ड्रेक ने कुछ नहीं खाया, उस दिन उनके मस्तिष्क में कैफीन की कमी से कनेक्टिविटी के विभिन्न स्तरों का पता चला. उन्हें मस्तिष्क कनेक्टिविटी प्रभावित करने वाले सबसे बड़े कारक का आसानी से पता चला. हालांकि यह पूरी तरह अनपेक्षित था, लेकिन यह आपके मस्तिष्क की कनेक्टिविटी में बदलाव लाता है. कैफीन के निम्नस्तर के साथ सोमेटोसेंसरी मोटर नेटवर्क के साथ तंगी बढ़ी है. अभी यह तो नहीं कहा जा सकता कि यह अच्छा है या बुरा, लेकिन ये दिलचस्प है कि यह अपेक्षाकृत निम्नस्तर के क्षेत्र हैं. शोधकर्ता अब मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के साथ रोगियों में संवृति का अध्ययन चाहते हैं, जो बाधित कनेक्टिविटी से पीड़ित हैं.

    जोरो शोरो की गर्मी शुरू हो चुकी है. ऐसे में आपको अपने शारीर के साथ साथ दिल का ख्याल भी रखना चाहिए. बाहर के तापमान में वृद्धि होने से शरीर को ठंडा रखने के लिए आम दिनों से ज्यादा पानी खर्च हो जाता है. दिल को ज्यादा तेजी से काम करना पड़ता है, ताकि त्वचा की सतह तक रक्त पहुंचा पसीने के जरिए शरीर को ठंडा रखने में मदद की जाए. 1. सुबह सैर करना, दौड़ना और बागबानी ठंडे वक्त में करना चाहिए. 2. हल्के वजन और रंगों वाले ऐसे कपड़े पहनें, जिनमें सांस लेना आसान हो. 3. कैफीन और शराब से दूर रहें, क्योंकि यह डिहाइड्रेटिंग करते हैं. 4. हल्का और सेहतमंद आहार लें. 5. पूरे दिन में आठ से दस गिलास पानी पीना जरूरी है. 6. गर्मियों में अच्छी नींद लेना दिल पर दबाव कम करने और शरीर को स्फूर्ति देने के लिए आवश्यक है.
    कुछ तो ऐसे भी होते हैं जो योनि में लिंग को प्रवेश कराने से पहले ही आलिंगन चुम्बन के समय ही स्खलित हो जाते हैं. ऐसे पुरुष कभी भी अपने पत्नी को सेक्स क्रिया का भरपूर आनन्द नहीं दे पाते. इस स्थिति में ऐसे पुरुष वैद्य-हकीमों के चक्करों में पड़कर अपने धन तथा स्वास्थ्य को भी नष्ट कर देते हैं. पुरुषों के शीघ्रपतन को दूर करने के लिए बहुत से चिकित्सकों ने कई तरीकों की खोज की है. इन तरीकों को सावधानी से अपनाने से शीघ्रपतन की समस्या से बचा जा सकता है और सेक्स क्रिया का भरपूर आनन्द भी लिया जा सकता है. 1. यदि किसी व्यक्ति को शीघ्रपतन की शिकायत हो तो वह सेक्स क्रिया करने से एक दो घंटे पहले हस्तमैथुन करके वीर्य को निकाल दे. इसके बाद जब आप सेक्स क्रिया करेंगे तो उस समय शीघ्रपतन का भय नहीं रहेगा और लम्बे समय तक सेक्स क्रिया का आनन्द भी ले सकेंगे. 2. सेक्स क्रिया करते समय लंबी-लंबी सांसे लेने की आदत डालें. इससे सेक्स क्रिया में पूर्ण रूप से आनन्द मिलता है. 3. अगर सेक्स क्रिया करते वक्त स्खलन का एहसास हो तो किसी दूसरी चीज की ओर अपना ध्यान लगाएं, इससे स्खलन होने की संभावना रुक जाती है. इसके कुछ देर बाद फिर से सेक्स क्रिया करने लगे. इस तरह की क्रिया कई बार करें. इससे भरपूर आनन्द मिलेगा. 4. सेक्स क्रिया के दौरान वीर्य स्खलन होने की स्थिति उत्पन्न हो जाए तो अपनी गुदा को संकुचित कर लें और कुछ समय तक इसी अवस्था में रुके रहे हैं. इससे स्खलन की स्थिति रुक जाती है. 5. संभोग करते वक्त जब योनि को लिंग में प्रवेश करें तब उस समय अपनी गुदा को संकुचित कर लें और लिंग के स्नायुओं को भी सिकोड़ लें. इस स्थिति में रहने के साथ ही स्ट्रोक लगा-लगाकर घर्षण करें. इस तरीके से सेक्स क्रिया लम्बे समय तक बनी रह सकती है.
    यदि आपको या आपके किसी जान पहचान वाले को कैंसर है तो आपको पीड़ित व्यक्ति के खान पान पर विशेष ध्यान देना होगा. कैंसर में व्यक्ति का शारीर नाजुक और संवेदनशील बन जाता है ऐसे में सही आहार का चुनाव जरूरी हो जाता है. 1. रोज नींबू, संतरा या मौसमी में से कम-से-कम एक फल अवश्य ही खाएं. इससे मुंह, गले और पेट के कैंसर की आशंका बहुत ही कम हो जाती है. 2. ऑर्गेनिक फूड का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें ,ऑर्गेनिक यानी वे दालें, सब्जियां, फल जिनके उत्पादन में पेस्टीसाइड और केमिकल खादें इस्तेमाल नहीं हुई हों. 3. अनार का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करें अनार कैंसर के इलाज खासकर स्तन कैंसर में बहुत ही प्रभावी माना गया है. 4. तुलसी इस रोग में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा देती है. घाव भरने में भी तुलसी मददगार होती है. 5. नियमित रूप से गेंहू के पौधे के रस का सेवन करें. 6. कैंसर का पता लगने पर दूध या दूध के बने पदार्थों का उपयोग बंद कर दें. इनसे व्यक्ति को नहीं वरन कैंसर के बैक्टीरिया को ताकत मिलती है. 7. पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं, रोज सुबह उठकर रात को ताम्बे के बर्तन रखा 3-4 गिलास पानी अवश्य ही पियें.
    इस चिलचिलाती गर्मी में हमारे शरीर को बहुत कुछ सहन करना पड़ता है. पसीना, लू लपट, पानी की कमी, गर्मी से होने वाले रेसेज और भी ना जाने क्या क्या. ऐसे में इस गर्मी में अपने शरीर को ठंडा रखना जरूरी हो जाता है. अधिक गर्मियों में अपनी ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेने चाहिए. फिर भी एकदम चिल्ड ड्रिंक्स से बचें, क्योंकि उससे पेट में ऐंठन या अन्य बीमारी होने का डर हो सकता है. इससे खांसी, जुकाम अन्य बीमारी होने का डर रहता हैं. गर्मियों में आपको हल्का भोजन और हरी सब्जियां खाना चाहिए. तेलयुक्त भारी भोजन से बचें. लाइट मील लें और ऐसे भोजन से दूर ही रहें जो शरीर में गर्मी देते हों. कई बार भोजन कर ने से बचें बाहर खुले में या गलियों के ठेलों के पास के कटे फलों का सेवन बिल्कुल न करें. गर्मियों काफी सीजनल फल आते हैं. गर्मियों मेंफल जरूर खाएं. फल पानी की पूर्ति करता है और पेट को भी भर देता है. अगर आपको फल खाने की इच्छा न हो तो आप इन फलों का शेक, जूस आदि बना सकते हैं.
    आजकल की आधुनिक दुनिया में टेक्नोलॉजी और खान पान की बुरी आदत के चलते बचपन से ही आँखों पर चश्मा चढ़ जाता है. ऐसे में यदि आप अपनी आँखों की रौशनी को बढ़ाना चाहते है तो यह नुस्खे जरूर अपनाए. 1. प्रतिदिन भोजन के साथ 50 से 100 ग्राम मात्रा में पत्तागोभी के पत्तों का सलाद बारीक कतर कर, इन पर पिसा हुआ सेंधा नमक और काली मिर्च डालकर खूब चबा-चबाकर खाएँ. 2. सूखें आँवले को रात में पानी में अच्छी तरह धोकर भिगो दें फिर दिन में 3 बार इसे रुई से आँखों में डालें और आँवले का ज्यादा ज्यादा किसी ना किसी रूप में अपने खाने / पीने में अवश्य ही प्रयोग करें. 3 माह के अंदर ही चश्मा उतर जायेगा. 3. आंखों की स्वस्थ्यता के लिए अच्छी नींद जरूरी है, नहीं तो आंखों के नीचे काला घेरा पड़ जाता है और रोशनी भी कम होती है. 4. 300 ग्राम सौंफ को अच्छे से साफ करके कांच के बर्तन में रख ले अब बदाम और गाजर के रस से सौंफ को तीन बार भगोएँ जब सुख जाए तो इसे रोज रात दूध के साथ लें इससे भी आँखों की रोशनी बढ़ती है. 5. आंखों की रोशनी तेज करने के लिए अपनी डाइट में प्याज और लहसुन को जरूर शामिल करें. इनमें सल्फर होता है जो आंखों के लिए ग्लूटाथाइन नामक एंटीऑक्सीडेंट तैयार करता है, जिससे नेत्रों की ज्योति बढ़ती है.  
    आज देश में एचआईवी एड्स से पीड़ित कई मरीज अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. इन मरीजों को कई तरह की समस्याओं और समाज के भेद भाव का सामना करना होता हैं. इस बिमारी के अंदर हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हैं. जिससे पीड़ित व्यक्ति का शरीर बिमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाता हैं. ऐसे में इस बिमारी में लाभ पहुंचाने के लिए एचआईवी एड्स के मरीजों को अपने आहार में बकरी का दूध शामिल करना चाहिए. बहुत कम लोगो को इस बात की जानकारी होती हैं कि एचआईवी एड्स में बकरी का दूध लाभकारी होता हैं. बकरी के दूध में मौजूद गुण से एचआईवी एड्स से पीडि़त मरीजों को लंबे समय तक बचाया जा सकता है. सीडी 4 काउन्टस को बढ़ाता है बकरी का दूध. जो एचआईवी पीडि़त रोगीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है.  
    आज हम आपको बताएँगे कि अलसी खाने से क्या क्या लाभ होते हैं. अलसी हमारे शारीर के लिए काफी लाभकारी मानी जाती हैं. इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन, केरोटिन, थायमिन, राइबोफ्लेविन और नियासिन पाए जाते हैं. लाभ: 1. ऊर्जा, स्फूर्ति व जीवटता प्रदान करता है. 2. तनाव के क्षणों में शांत व स्थिर बनाए रखने में सहायक है. 3. कैंसररोधी हार्मोन्स की सक्रियता बढ़ाता है. 4. रक्त में शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है. 5. जोड़ों का कड़ापन कम करता है. 6. प्राकृतिक रेचक गुण होने से पेट साफ रखता है. 7. हृदय संबंधी रोगों के खतरे को कम करता है.  
    यदि आप गर्मी में कई समस्याओं से जूझ रहे हैं तो आपको बेलफल को आजमाना चाहिए. इसे कई नामों से जाना जाता है. इसे श्रीफल, वुड एप्पल और बेलफल आदि कहा जाता है. भारत के प्राचीन ग्रंथों में भी बेल के पत्तों के धार्मिक महत्व के बारे में बताया गया है. बेल के पत्तों को भगवान सदा शिव को चढ़ाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ती होती है ऐसा शिवमहापुराण में  कहा गया है. लेकिन बेल के रस पीने से आपको कई तरह के स्वास्थवर्धक फायदे मिल सकते हैं जिससे आप और आपका परिवार भंयकर बीमारियों से आसानी से बच सकता है. क्या हैं बेल के फायदे वैदिक वाटिका इस बारे में आपको पूरी जानकारी दे रही है. गर्मियों में शरीर से उर्जा तेजी से कम हो जाती है. ऐसे में शरीर को ठंड़ा और उर्जावान बनाने के लिए बेल का रस पीना चाहिए. बेल के रस में प्रोटीन की अधिक मात्रा होती है जो शरीर को भंयकर गर्मी में भी ताजगी देती है. आप बेल का जूस सुबह नाश्ते से एक घंटे पहले और रात को खाना खाने के भी एक घंटे पहले बेल का शर्बत व रस पी सकते हैं.
    खांसी और जुकाम ये दोनों ऐसे रोग हैं जो हर मौसम में कभी भी हो जाते हैं और इन रोगों से शरीर कमजोर हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप मेडिकल स्टोर से दवाई लेने की बजाय अपने घर में मौजूद चीजों का प्रयोग करके आप इन रोगों से बच सकते हो. हमारे घर में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जिसे हम रोज खाते हैं पर हम ये नहीं सोचते होगें की इनसे हमें रोगों से बचने में भी सहायता मिलती है. आपने रोटी में और दाल चावल में घी डाल के तो बहुत खाया होगा लेकिन बहुत ही काम लोगो को यह बात पता हैं कि यही देसी घी आपको सर्दी जुकाम से भी राहत दिला सकता हैं. आइए जाने कैसे... 50 ग्राम गुड़ और हल्दी़, 25 ग्राम अदरक को दो चम्मच देशी घी में पका कर इसके छोटे-छोटे गोले बना लीजिए और सुबह खाली पेट और रात को सोने से पहले लें. ध्यान रहे कि इसके बाद पानी न पीएं. थोड़ी समय में ही आपको जुकाम से व खांसी से राहत मिल जाएगी.
    आजकल पसलियों में दर्द की समस्या अधिकतर लोगों में देखी जा रही है. युवाओं में भी पसलियों के दर्द की परेशानी अधिक हो रही है. बच्चों को भी यह रोग होता है. ये दर्द खांसी व छींक आने से और ज्यादा होता है. क्योंकि ऐसा होने पर पसलियों पर झटका लगता है और वे दुखने लगती है. पसलियों में दर्द होने का मुख्य कारण है शरीर में खून की कमी और विटामिन डी की कमी. इस समस्यां से निपटने के लिए आपको दर दर भटकने की जरूरत नहीं हैं. इसका इलाज आपके किचन में ही मौजूद हैं. हम यहाँ बात कर रहे हैं मेथी दाने की. तो आइए जाने इसका उपयोग कैसे किया जाए. मेथी भी पसलियों के दर्द में बेहद राहत देती है. 100 ग्राम मेथी दानों को हल्का भूनें और इसे कूट लें फिर इसमें बेहद थोड़ा काला नमक भी मिला लें और इसका सेवन सुबह और शाम एक-एक चम्मच खाएं. एक महीने तक लगातार खाने से पसलियों का दर्द ठीक होने लगता है.  

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